मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने शिवसेना सांसद भावना गवली को किया तलब
मुंबई, सितंबर 29: मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शिवसेना सांसद भावना गवली को पूछताछ के लिए चार अक्टूबर को तलब किया है। सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी कि, ईडी ने उन्हें चार अक्तूबर को पूछताछ के लिए दक्षिणी मुंबई स्थित प्रवर्तन निदेशालय के कार्यायल में तलब किया है। यवतमाल-वाशिम की सांसद भावना गवली के करीबी सईद खान को इससे पहले ईडी ने गिरफ्तार किया था।

एजेंसी ने मामले में मंगलवार को गवली के कथित सहयोगी सईद खान को धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के संबंधित प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें पीएमएलए कोर्ट में पेश किया गया था, जहां से सईद खान को एक अक्टूबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया गया है। एजेंसी गवली से खान के साथ उसके संबंधों और 'महिला उत्कर्ष प्रतिष्ठान' के रूप में पहचाने जाने वाले ट्रस्ट और संबंधित लेनदेन के बारे में पूछताछ करना चाहती है।
ईडी ने अदालत को बताया था कि उसकी अब तक की जांच से पता चलता है कि 18.18 करोड़ रुपये के धन की हेराफेरी और 7 करोड़ रुपये (नकद) की चोरी की गई है। एजेंसी ने कहा कि ट्रस्ट के प्रबंधन के फर्जी हस्ताक्षर कर पैसे की हेराफेरी हुई। ईडी ने बताया कि ट्रस्ट से कुल 69 करोड़ रुपए नई कंपनी में गलत तरीके से हस्तांतरित किए गए। भावना पर एग्रो प्रोडक्ट्स एंड सर्विसेज कंपनी में गड़बड़ी करने का भी आरोप लगा था। कंपनी ने दो अलग-अलग बैंकों से 7.5 करोड़ रुपये के लोन लिए थे। बाद में यह आरोप लगाया गया कि कंपनी को भावना गवली के निजी सचिव को 7.9 करोड़ रुपये में बेच दिया गया था।
ईडी के मुताबिक, इस कंपनी के निदेशक खान और शिवसेना सांसद की मां शालिनिताई गवली हैं। दोनों के साथ भावना गवली इस कंपनी की सदस्य बताई जाती हैं। मंगलवार को एजेंसी ने विशेष पीएमएलए अदालत में कहा कि गवली ने 18 करोड़ रुपये की हेराफेरी करने के लिए, खान के माध्यम से जालसाजी और फर्जी तरीके से एक न्यास को निजी कंपनी में तब्दील करने का कथित आपराधिक षड्यंत्र रचा।
ईडी ने आरोप लगाया कि, भावना गवली ने अपने सहयोगी सईद खान, शेरगुल खान और उसके सहयोगियों के माध्यम से ट्रस्ट 'महिला उत्कर्ष प्रतिष्ठान' को जालसाजी और धोखाधड़ी के माध्यम से ट्रस्ट के फंड को हड़पने के उद्देश्य से धारा 8 कंपनी में बदलने की आपराधिक साजिश रची । प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि रिसोड अर्बन कोऑपरेटिव सोसाइटी में रखे गए ट्रस्ट के खाते से भारी मात्रा में नकद जमा और बड़ी रकम की निकासी हुई है। तब रिसौद अर्बन को-ऑपरेटिव सोसाइटी के शाखा प्रबंधक ने अपने बयान में कहा कि सोसायटी 3 लाख रुपये से अधिक की नकद राशि प्राप्त करने की हकदार नहीं है।












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