क्या पीएम बनना चाहते हैं नितिन गडकरी? खुद दिया जवाब, VIDEO वायरल
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी अपने कामकाज के साथ-साथ अपने बेबाक बयानों के लिए भी हमेशा चर्चा में रहते हैं। हाल ही में नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने जनता के प्यार और आशीर्वाद को जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बताया। इसके साथ ही गडकरी ने प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बनना चाहते हैं या नहीं इस पर ऐसा बयान दिया जो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।
दरअसल, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी शनिवार, 23 मई को नागपुर में राष्ट्रभाषा परिवार द्वारा आयोजित 'मित्रों के बीच' नामक इस कार्यक्रम को संबोधित करने पहुंचे थे, वहां पर उन्होंने अपने कामकाम और राजनीतिक करियर से जुड़े अनुभवों को शेयर किया। इसी दौरान गडकरी प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति बनना चाहते हैं या नहीं इसका जवाब दिया।

क्या पीएम बनना चाहते हैं नितिन गडकरी?
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, 'राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री पद किसलिए चाहिए? जनता का प्यार ही सबसे बड़ा पद होता है।' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वास्तविक संतुष्टि केवल लोगों के स्नेह और उनके समर्थन में ही निहित है।
'लोगों का प्यार ही सबसे बड़ी चीज है'
अपनी उम्र और राजनीति के भविष्य पर बोलते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'राजनीति अपने हिसाब से चलेगी, मुझे इसकी कभी चिंता नहीं होती। हमारा मुख्य उद्देश्य तो बस लोगों की सेवा करना है, और आपका यही प्यार हमें आगे काम करने की प्रेरणा देता है।'
गडकरी ने बताया राष्ट्रपति और पीएम पद क्यों नहीं चाहिए?
गडकरी, जिन्होंने दशकों पहले नागपुर से राजनीतिक यात्रा शुरू की थी, ने पूर्वी महाराष्ट्र के आदिवासी क्षेत्रों सहित अपनी अनेक कल्याणकारी परियोजनाओं पर चर्चा की। अपनी कार्यशैली पर बात करते हुए गडकरी ने कहा, ''मेरे जनता दरबार कार्यक्रमों में हजारों लोग आते हैं... मैं उनसे यह नहीं पूछता कि उन्होंने मुझे वोट दिया था या नहीं। अगर मैं कुछ कर सकता हूं तो मैं हां कहता हूं, अगर नहीं कर सकता, तो मैं ना कहता हूं। और मेरा अनुभव अच्छा रहा है, मुझे पूरे देश से प्यार मिला है। और भला किसी को राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री जैसे बड़े पदों की चाह क्यों होनी चाहिए? लोगों का प्यार ही सबसे बड़ी चीज है।''
गडकरी ने एक दिलचस्प किस्सा भी साझा किया
गडकरी ने एक दिलचस्प किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि कई लोग उनसे कहते हैं कि जब वे कानपुर जाते हैं और खुद को नागपुर का बताते हैं, तो ढाबे वाले अक्सर उनसे खाने का बिल नहीं लेते।













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