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बकरीद से पहले SP के अबू आजमी का बड़ा दावा, कहा- बहादुर शाह जफर ने गाय की बलि पर फांसी की सजा का किया था ऐलान

Maharashtra News: बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने 3 जून 2025 को बड़ा फैसला सुनाया है। जिसके बाद महाराष्‍ट्र के कोल्‍हापुर के विशालगढ़ किले में स्थित दरगाह में बकरीद और उर्स के मौके पर जानवरों की बलि (कुर्बानी) की इज़ाजत मिल चुकी है। कोर्ट के आदेश पर समाजवादी पार्टी के महाराष्‍ट्र विधायक अबू आजमी ने खुशी जताते हुए कोर्ट के आदेश का स्‍वागत किया है।

अबू आजमी ने कोर्ट के इस आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए सांप्रदायिक लोगों पर मुसलमानों को हर मौके पर नीचा दिखाने का आरोप लगाया और शिवाजी महाराज के शासनकाल को याद करते हुए सवाल किया कि क्‍या उनके शासन में मुसलमान नहीं थे? क्‍या वे ईद नहीं मनाते थे? इसके साथ ही सपा विधायक अबू आजमी ने मुगल शासक बहादुर शाह जफर के शासनकाल का उदाहरण दिया और दावा किया उन्‍होंने अपने शासन काल में गाय की बलि देने पर फांसी की सजा का ऐलान किया गया था।

SP MP Abu Azmi

अबू आजमी ने क्‍या दावा किया?

सपा विधायक अबू आजमी ने कहा, "गाय की बलि हमेशा से गुनाह है। सीएम योगी पहले नहीं हैं जिन्‍होंने इस पर रोक लगाई है, मुगल शासक बहादुर शाह जफर समेत कई मुस्लिम राजाओं ने गाय की हत्‍या करने वालों को फांसी देने की बात कही थी। मोदी सरकार तो फांसी की सजा नहीं लाए। इन्‍हें शर्म आनी चाहिए कि भाजपा शासित राज्‍यों में काउ स्‍लॉटर हो रहा है।"

क्‍या बहादुर शाह जफर ने किया था ये ऐलान

मशहूर इतिहासकार विलियम डैलरिंपल की किताब "द लास्‍ट मुगल" में इस बात का जिक्र हैं कि बहादुर शाह जफर पेट की बीमारी से ग्रसित थे वो बीमारी से बचने के लिए पीर, फकीरों से ज्‍यादा ज्‍योतिषियों पर विश्वास करते थे। उनके साथ हमेशा एक ज्‍योतिषी रहता था और उनसे हर अहम बातों में सलाह करते थे। विलियम ने अपनी किताब में इस बात का भी जिक्र किया है कि बहादुर शाह जफर सभी हिंदू त्‍यौहार बड़े उत्‍साह से मनाते थे और हिंदू धर्म के प्रति सम्‍मान के चलते अपने शासन में गाय हत्‍या पर रोक लगाई थी लेकिन गाय की हत्‍या पर फांसी देने का ऐलान का जिक्र कहीं नहीं है।

क्‍या है 1857 की क्रांति और गाय वाला किस्‍सा

1857 को गद्दार गौरी शंकर ने अग्रेंजों को पत्र लिखा था और बकरीद पर दिल्‍ली के अंदर गायों की कुर्बानी की साजिश रची थी ताकि हिंदू-म‍ुस्लिम आपस में लड़े और बिट्रिश सरकार हमला बोल कब्जा कर लें। लेकिन बहादुर शाह जफर ने सभी गायों को कोतवाली में बंधवा दिया और कोई गौ हत्‍या ना करें। साथ ही दिल्‍ली में किसी भी जानवर की कुर्बानी पर रोक लगा दी थी। जिस कारण 2 अगस्‍त 1857 को पहली बार किसी जानवर की कुर्बानी नहीं की गई थी। तब हिंदू मुसलमनों ने मिलकर बिट्रिश फौज पर हमला बोल दिया था।"

बहादुर शाह जफर ने क्‍या कहा था?

विलियम डैलरिंपल ने लिखा है, "बहादुर शाह जफर के शासन में लाल किले में एक साथ लगभग 200 मुसलमान घुस आए और उन्‍होंने बादशाह से गाय की कुर्बानी करने की गुज़ारिश की। इस पर बहादुर शाह जफर बहुत नाराज हो गए। उन्‍होंने तब गुस्‍साते हुए कहा था, "मुसलमानों का धर्म गाय की कुर्बानी पर निर्भर नहीं है।"

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