महाराष्ट्र में सीटों के तालमेल को लेकर खास फॉर्मूले पर काम कर रही है कांग्रेस, MVA के बाकी दलों से अलग एजेंडा
महाराष्ट्र में लोकसभा चुनावों के लिए सीटों के तालमेल को लेकर एमवीए में आम सहमति नहीं बन पा रही है। एनसीपी जल्द बंटवारा चाहती है। कांग्रेस बिल्कुल अलग सोच रही है।

महाराष्ट्र में विपक्षी महा विकास अघाड़ी गठबंधन के बाकी सहयोगी दल 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए जितनी जल्दी सीटों के तालमेल का मुद्दा हल करना चाहते हैं, कांग्रेस उतनी उतावली नहीं है। एनसीपी में खासकर अजित पवार का खेमा चाहता है कि एमवीए जल्द से जल्द यह मसला सुलझा ले, लेकिन कांग्रेस तैयार नहीं है। उद्धव ठाकरे वाली शिवसेना (यूबीटी) की ओर से भी इसपर मंशा जाहिर की जा चुकी है।
सभी 48 सीटों का जमीनी जायजा लेना चाहती है कांग्रेस
महाराष्ट्र में कांग्रेस पार्टी की ओर से 2024 के लोकसभा चुनावों को लेकर राज्य की सभी 48 लोकसभा सीटों पर अपनी तैयारियों का जायजा लेने की कवायद शुरू की गई है। पार्टी जमीनी हकीकत जानने के बाद ही महा विकास अघाड़ी के नेताओं के बीच अपनी मांग रखना चाहती है।
अभी सीटों का बंटवारा नहीं चाहती कांग्रेस
प्रदेश कांग्रेस के नेताओं की ओर से साफ कर दिया गया है कि जबतक सभी 48 सीटों की समीक्षा नहीं कर ली जाती, तबतक सीटों के बंटवारे को लेकर कोई चर्चा नहीं की जाएगी। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि इस समय सीटों के बंटावारे का कोई सवाल ही नहीं है।
सर्वे के बाद जनसंपर्क अभियान में निकलेंगे कांग्रेस नेता
एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता के मुताबिक, 'एक महीने में सीटों के बंटवारे को लेकर एमवीए नेताओं के बीच चर्चा की संभावना नहीं है। अभी सीटों के बंटवारे को लेकर जल्दबाजी की जरूरत नहीं है, क्योंकि हम जमीनी सच्चाई का पता लगाने के लिए प्रदेश में एक सर्वे करा रहे हैं।' इसके बाद हर लोकसभा क्षेत्र में पार्टी के नेता जनसंपर्क अभियान में निकलेंगे और रैलियां करेंगे।
ज्यादा तैयारियों के लिए एनसीपी जल्द चाहती है सीटों पर तालमेल
इससे ठीक उलट एनसीपी नेता अजित पवार और उनके करीबी चाहते हैं कि सीटों के बंटवारे की घोषणा जल्द हो जाए। हाल ही में रायगढ़ से पार्टी सांसद और उनके करीबी सुनील तटकरे ने इंडियन एक्सप्रेस के टाउन हॉल कार्यक्रम में कहा था कि सीटों का बंटवारा जल्द होना चाहिए। इससे 2024 के आम चुनावों के लिए ज्यादा समय मिल पाएगा।
कार्यकर्ताओं का मूड खराब नहीं करना चाहती कांग्रेस
उनके मुताबिक इससे यह भी स्पष्ट रहेगा कि सत्ताधारी गठबंधन के खिलाफ कौन कहां से मैदान में होगा। लेकिन, कांग्रेस सूत्रों ने इस विचार को खारिज कर दिया है। कांग्रेस के नेता और एक पूर्व मंत्री ने कहा, 'पहले दो दलों की बात थी और अब तीन हैं। यह बहुत आसान नहीं रहने वाला है, क्योंकि हममें से प्रत्येक को एडजस्ट करना होगा और जमीन पर जो कार्यकर्ता हैं, उन्हें फैसले को स्वीकारने के लिए तैयार करना होगा।'
कांग्रेस को बीजेपी का भी डर सता रहा है
उनके मुताबिक पहले से सीटों की घोषणा हो जाने से अंदरूनी लड़ाई बढ़ेगी और सीटों पर तालमेल के दौरान मतभेद उभरना निश्चित है। उनका यह भी कहना है, 'सबसे महत्वपूर्ण बात कि अपने कार्ड को बीजेपी से आखिरी वक्त तक छिपाकर रखना हमेशा अच्छा है।'
शिवसेना (यूटीबी) सीटिंग-गेटिंग की दे रही है दलील
उधर एमवीए की तीसरी पार्टी शिवसेना (यूबीटी) की ओर से बार-बार कहा जा रहा है कि वह उन सभी 18 सीटों पर लड़ेगी, जहां 2019 में वह जीती थी। पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा था कि, 'एमपीए में सीटों का बंटवारा उसी आधार पर होगा, जिसपर पार्टियां जीती थी।'
2019 में सीटों पर जीत का क्या था समीकरण?
2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी और शिवसेना (संयुक्त) मिलकर चुनाव लड़ी थी और 48 में से 23 सीटों पर बीजेपी को जीत मिली थी। वहीं तबकी शिवसेना 18 सीटों पर सफल रही थी। जबकि, कांग्रेस और एनसीपी ने तब भी मिलकर चुनाव लड़ा था और एनसीपी को 4 और कांग्रेस को सिर्फ 1 सीट मिली थी। 1 सीट ओवैसी की एआईएमआईएम और 1 निर्दलीय के खाते में गई थी।
एमवीए में असली लड़ाई यहां होगी
जहां तक एमवीए की बात है तो तीनों दलों की जीती हुई सीटों पर तो कोई खास उलझन होने की संभावना नहीं है। असली लड़ाई बीजेपी वाली सीटों और बाकी दोनों सीटों पर होनी तय है।












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