महाराष्ट्र में कांग्रेस की लड़ाई कहीं MVA को न ले डूबे, क्या उद्धव गुट बढ़ा रहा है विवाद ?

महाराष्ट्र में कांग्रेस के आंतरिक कलह में शिवेसना के उद्धव ठाकरे गुट ने अपनी दिलचस्पी बढ़ा रखी है। कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व की ओर से चेतावनी के बावजूद संजय राउत बालासाहेब थोराट की पैरवी करते दिख रहे हैं।

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महाराष्ट्र में कांग्रेस के दो कद्दावर नेताओं के बीच आरपार की जंग छिड़ी हुई है। पार्टी विधायक दल के नेता और कई अहम पदों से इस्तीफा दे चुके बालासाहेब थोराट और महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले के बीच का मतभेद सार्वजनिक हो चुका है। थोराट ने पटोले के काम करने के तरीके पर सीधी उंगली उठाई है। लेकिन, एक राजनीतिक पार्टी के अंदर के इस मामले में इसकी सहयोगी शिवसेना (उद्धव ठाकरे बालासाहेब ठाकरे) और विरोधी भारतीय जनता पार्टी भी खूब दिलचस्पी ले रही है। लेकिन, उद्धव ठाकरे गुट के रवैए से कांग्रेस का संकट और गहराने का खतरा पैदा होता दिख रहा है।

क्या उद्धव गुट बढ़ा रहा है विवाद ?

क्या उद्धव गुट बढ़ा रहा है विवाद ?

महाराष्ट्र में कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई में अब शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट की भूमिका से विवाद और बढ़ता नजर आ रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने एक दिन पहले महा विकास अघाड़ी में पार्टी की सहयोगी शिवसेना उद्धव गुट के नेता संजय राउत को साफ तौर पर पार्टी के आंतरिक मामले से दूर रहने की हिदायत दी थी। लेकिन, संजय राउत पर कांग्रेस नेतृत्व के टोकने का भी कोई असर नहीं पड़ा है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में कांग्रेस विधायक दल के नेता और पार्टी के बहुत बड़े नेता बालासाहेब थोराट ने सार्वजनिक तौर पर पटोले की कार्य प्रणाली पर सवाल उठाते हुए पार्टी के तमाम पदों से इस्तीफा दे दिया है। उसके बाद से उनको लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं और शिवसेना भी उनपर डोरे डालने में जुट चुकी है।

पटोले ने राउत को पार्टी के मसले से दूर रहने को कहा था

पटोले ने राउत को पार्टी के मसले से दूर रहने को कहा था

द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार को नाना पटोले ने संजय राउत का नाम लेकर उन्हें पार्टी के आंतरिक मसले से दूर रहने की हिदायत देते हुए कहा था, 'राउत कांग्रेस के प्रवक्ता नहीं हैं और मुझे नहीं पता कि क्या उन्होंने (थोराट ने) उन्हें (राउत को) अपना प्रवक्ता नियुक्त कर लिया है।' थोराट ने विधायक दल से इस्तीफे जैसा कदम तब उठाया, जब हाल में नासिक से एमएलसी चुनाव में उनके भांजे सत्यजीत तांबे को भारी बहुमत से जीत मिली, जबकि उन्हें कांग्रेस उम्मीदवार के बजाए निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। हालांकि, पटोले का दावा है कि पार्टी में कोई गुटवाजी नहीं है और यह तांबे और थोराट के बीच की यह 'पारिवारिक समस्या' है।

महाराष्ट्र में कांग्रेस की लड़ाई कहीं एमवीए को न ले डूबे!

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जब पटोले ने राउत को साफ आईना दिखा दिया कि वह कांग्रेस के मामले में दखल देना बंद करें तो शिवसेना नेता ने सीधे उनपर ही निशाना साधना शुरू कर दिया और प्रदेश में उद्धव ठाकरे की सरकार गिरने का जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की। शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा है, 'विधानसभा स्पीकर का पद बहुत ही महत्वपूर्ण पद है। जिस तरीके से नाना पटोले ने इस पद से इस्तीफा दिया था, विपक्ष को हमारी सरकार गिराने का मौका मिल गया। यह एक साजिश थी। अगर नाना पटोले ने इस्तीफा नहीं दिया होता, हमारी सरकार आज भी चल रही होती।'

कांग्रेस के कद्दावर नेता हैं बालासाहेब थोराट

कांग्रेस के कद्दावर नेता हैं बालासाहेब थोराट

शिवसेना के उद्धव गुट के नेता राउत ने कांग्रेस के आंतरिक विवाद को लेकर यह भी कहा है कि बालासाहेब थोराट के साथ जो कुछ चल रहा है, वह ठीक नहीं है। कांग्रेस नेतृत्व को उनसे बातचीत करके मसले का हल निकालना चाहिए। थोराट महाराष्ट्र के 7 बार के एमएलए हैं। पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष से लेकर कांग्रेस वर्किंग कमिटी के सदस्य भी रह चुके हैं। उन्हें पार्टी का जमीनी नेता माना जाता है। उद्धव ठाकरे सरकार में थोराट राज्य में राजस्व, कृषि और स्कूली शिक्षा जैसे विभाग संभाल चुके हैं।

बहुत बढ़ चुकी है महाराष्ट्र कांग्रेस की लड़ाई

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इससे पहले तांबे परिवार आरोप लगा चुका है कि उन्हें और थोराट को बदनाम करने के लिए पटोले और कुछ दूसरे कांग्रेस नेताओं ने साजिश रची है। राउत भी कांग्रेस नेतृत्व का 'शुभचिंतक' बनकर शायद यही बताना चाह रहे हैं कि तांबे के साथ सही नहीं हुआ है। थोराट ने भी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को लिखी चिट्ठी में कथित तौर पर यही आरोप लगाया है कि पार्टी की ओर से आयोजित बैठकों में भी पटोले की ओर से उन्हें 'निशाना' बनाया जाता है और 'अपमानित' किया जाता है, इसलिए उनके साथ काम करना 'असंभव' है।

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    बीजेपी भी थोराट से दिखा रही है दरियादिली

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    महाराष्ट्र कांग्रेस में जो कुछ चल रहा है, उसमें अकेले उद्धव की सेना ही दिलचस्पी नहीं ले रही है। सत्ताधारी बीजेपी की भी नजरें टिकी हुई हैं। महाराष्ट्र बीजेपी के अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले कह चुके हैं, 'बीजेपी के दरवाजे सबके लिए खुले हुए हैं। बालासाहेब थोराट कांग्रेस के बहुत बड़े नेता हैं और मैं उन्हें पार्टी ज्वाइन करने का ऑफर देने वाला कोई नहीं होता। भरोसा रखिए, बीजेपी में शामिल होने वाले का निजी कद का ना सिर्फ सम्मान बरकरार रखा जाएगा, बल्कि ज्यादा महत्त्व और आदर भी मिलेगा।' थोराट की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि सीएलपी से उनका इस्तीफा यह बताता है कि पार्टी में निश्चित रूप से कुछ बड़ी गड़बड़ है। (तस्वीरें-फाइल)

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