महाराष्ट्र का सीएम कौन? तस्वीर साफ होने में देरी क्यों, महायुति के भीतर खींचतान तो नहीं!
महाराष्ट्र में महायुति की प्रचंड जीत के बाद सीएम पद को लेकर संशय की स्थिति अभी भी बनी है। तस्वीर जब तक स्पष्ट नहीं हो जाती कयासों का बजार गर्म है। इस बीच दावा किया जा रहा है कि महायुति गठबंधन में शामिल दलों को बीच सीएम पद को लेकर खींचतान चल रही है, जिसके चलते सीएम पद के लिए चेहरे के ऐलान में देरी हो रही है। हालांकि महायुति में शामिल दलों के नेता किसी तरह की खींचतान की स्थिति से इनकार जरूर करते हैं, लेकिन अपने दल के ही नेता को सीएम बनाने की वकालत कर रहे हैं।
महाराष्ट्र में सरकार गठन से पहले भाजपा अंतिम फैसले के लिए नई दिल्ली जा रही है। इसको लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि सहयोगी दल एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना महाराष्ट्र में भी 'बिहार पैटर्न' का पालन करने के लिए कह रही है। ऐसे में एनसीपी को भी अजित पवार के सीएम बनने की उम्मीद है, जाग उठी है।

वहीं दूसरी ओर आरएसएस ने भाजपा के देवेन्द्र फड़नवीस का समर्थन किया है। दरअसल फड़नवीस को महाराष्ट्र चुनाव में महायुति प्रदर्शन के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। इस बार फड़नवीस ने महायुति-एनडीए सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए दो-तिहाई बहुमत हासिल करने और विपक्षी महा विकास अघाड़ी-इंडिया ब्लॉक को ध्वस्त करने के लिए महाराष्ट्र में पहले कभी नहीं देखी गई जीत की पटकथा लिखी।
महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल मंगलवार यानी 26 नवंबर को समाप्त हो रहा है। इससे पहले सरकार गठन को लेकर स्थिति साफ नहीं हो पाई है। इस बीच कई शिवसेना नेताओं उदय सामंत, दादा भुसे, दीपक केसरकर और डॉ नीलम गोरे ने फड़नवीस से मुलाकात की।
बिहार पैटर्न का जिक्र
शिंदे के विश्वासपात्र और ठाणे के सांसद नरेश म्हस्के ने कहा कि भाजपा को बिहार पैटर्न जारी रखना चाहिए। म्हस्के ने कहा कि सरकार में तीनों दलों का नेतृत्व होना चाहिए। उन्होंने कहा, "हमें लगता है कि शिंदे को बिहार की तरह ही मुख्यमंत्री होना चाहिए, जहां भाजपा ने संख्या को नहीं देखा, लेकिन फिर भी जदयू नेता नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाया।"
वहीं शिंदे के लिए ढाई साल के कार्यकाल से भी शिवसेना सहमत है क्योंकि वह चुनावों का चेहरा थे और कई कल्याणकारी योजनाओं के वास्तुकार थे, जो कथित तौर पर महायुति गठबंधन के लिए काम करते थे। हालांकि, भाजपा के वरिष्ठ नेताओं पूर्व केंद्रीय मंत्री रावसाहेब पाटिल-दानवे और प्रवीण दारेकर ने शिवसेना की बात को खारिज कर दिया। दरेकर ने कहा, "लोगों ने देवेंद्र फड़नवीस को जनादेश दिया है। महाराष्ट्र के लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पीछे खड़े हैं।"
वहीं दूसरी ओर अजित पवार की राकांपा शिंदे की जगह फड़णवीस का समर्थन कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, उम्मीद है कि शीर्ष पद के लिए पवार के नाम पर भी विचार किया जाएगा।












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