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BMC Elections: 68 सीटों पर बिना वोटिंग जीत पर बवाल, महायुति के खिलाफ चुनाव आयोग का सख्त एक्शन

BMC Elections 2026: BMC चुनावों में सत्तारूढ़ महायुति (बीजेपी-शिवसेना-एनसीपी गठबंधन) के कई उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने के मामलों ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है। इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए राज्य चुनाव आयोग (SEC) ने जांच के आदेश दिए हैं।

आयोग ने कई जिलों और नगर निकायों से रिपोर्ट तलब की है। ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं विपक्षी उम्मीदवारों को डराया-धमकाया गया या फिर किसी तरह का प्रलोभन देकर नामांकन वापस लेने के लिए मजबूर तो नहीं किया गया।

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राज्य चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक संबंधित वार्डों के रिटर्निंग ऑफिसर (RO) को महायुति उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत की औपचारिक घोषणा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। आयोग का कहना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

कई नगर निगमों में बिना वोटिंग जीत पर सवाल

जानकारी के मुताबिक, पिंपरी-चिंचवाड़, जलगांव और छत्रपति संभाजीनगर नगर निगमों में कम से कम एक-एक बीजेपी उम्मीदवार निर्विरोध चुना गया है। वहीं कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में बीजेपी के पांच और शिवसेना (शिंदे गुट) के चार उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की स्थिति बनी है, क्योंकि उनके खिलाफ कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं है।

हालांकि, चुनाव आयोग को इस दौरान कई शिकायतें भी मिली हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि सत्तारूढ़ दलों ने चुनावी मशीनरी के साथ मिलकर विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका या उन पर दबाव बनाया।

विपक्ष के गंभीर आरोप

आम आदमी पार्टी (AAP) की नेता रेखा रेडकर ने राज्य चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि उन्हें नामांकन के आखिरी दिन रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा फॉर्म दाखिल करने की अनुमति नहीं दी गई, जबकि बीजेपी उम्मीदवारों को समय सीमा के बाद भी दस्तावेज और हलफनामे जमा करने की छूट दी गई। रेडकर ने कहा, चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह पक्षपातपूर्ण रही। मैं समय से पहले कार्यालय पहुंची थी, फिर भी मुझे टोकन तक नहीं दिया गया।

उन्होंने अपने आरोपों को साबित करने के लिए सभी वार्डों के सीसीटीवी फुटेज की मांग भी की है। रेडकर के अलावा कांग्रेस, जनता दल (एस) और आम आदमी पार्टी के अन्य उम्मीदवारों ने भी इसी तरह की शिकायतें दर्ज कराई हैं। मुंबई के कोलाबा इलाके के तीन वार्डों से भी इस तरह के आरोप सामने आए हैं।

चुनाव आयोग की सख्ती

राज्य चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आयोग उन नौ वार्डों से रिपोर्ट मंगाएगा, जहां उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं। नामांकन वापसी की अंतिम तारीख 3 जनवरी के बाद रिटर्निंग ऑफिसर, बीएमसी आयुक्त और संबंधित पुलिस आयुक्तों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी जाएगी।

इन रिपोर्टों के आधार पर यह तय किया जाएगा कि क्या किसी उम्मीदवार पर दबाव या रिश्वत देकर नामांकन वापस कराया गया था। अधिकारी ने यह भी कहा कि यदि नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो आयोग केवल रिटर्निंग ऑफिसर के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, नामांकन की अंतिम तारीख गुजर जाने के कारण नए उम्मीदवारों को फॉर्म दाखिल करने की अनुमति देने का कोई प्रावधान नहीं है।

कोलाबा में विधानसभा अध्यक्ष पर आरोप

मुंबई के वार्ड 'ए' (कोलाबा) में बीजेपी विधायक और विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। पूर्व सांसद हरिभाऊ राठौड़ ने दावा किया है कि नार्वेकर ने रिटर्निंग ऑफिसर के साथ मिलकर अन्य उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका। राठौड़ का आरोप है कि राहुल नार्वेकर खुद रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालय में मौजूद थे और उनके रिश्तेदार कोलाबा के तीन वार्डों से चुनाव लड़ रहे हैं।

उन्होंने इसे बीजेपी उम्मीदवारों को निर्विरोध जिताने की रणनीति बताया। इन आरोपों पर राज्य चुनाव आयोग ने बीएमसी आयुक्त भूषण गगरानी से रिपोर्ट मांगी है और रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालय के अंदर लगे सीसीटीवी फुटेज की भी जांच करने को कहा है। BMC में निर्विरोध जीत के बढ़ते मामलों और विपक्ष के आरोपों के बीच राज्य चुनाव आयोग की जांच को बेहद अहम माना जा रहा है।

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