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BMC Election: मुंबई नगर निगम में 3 साल के बाद होंगे चुनाव, कौन संभालेगा भारत के सबसे अमीर नगर निगम की कमान?

BMC Election: बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) में 2025 में चुनाव होने हैं। बीएमसी में तीन सालों से चुनाव नहीं हुए हैं। बीएमसी में लगभग तीन सालों से बिना निर्वाचित पार्षदों के काम हो रहा है। बीएमसी की 227 सीटों के लिए चुनाव 2022 की शुरुआत में होने थे लेकिन किसी वजह से टाल दिए गए थे, उसके बाद से चुनाव अभी तक लंबित हैं।

बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) भारत का सबसे अमीर नागरिक निकाय (नगर निगम) है। वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए बीएमसी को 52,000 करोड़ रुपये से अधिक का बजट दिया गया था। इतना बजट देश के किसी अन्य नगर निगम को नहीं दिया जाता है।

Brihanmumbai Municipal Corporation

रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2022 से अब तक शहर के प्रशासन का प्रबंधन आयुक्तों-पहले इकबाल सिंह चहल और अब भूषण गगरानी के साथ-साथ उनकी टीम द्वारा किया गया है। इस बीच महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महायुति गठबंधन और बीजेपी को मिली शानदार जीत के बाद पार्टी का लक्ष्य बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) महत्वपूर्ण जीत हासिल करना है।

बीजेपी फिर से शुरू करेगी 'मिशन 150' अभियान
बीजेपी ने फरवरी 2023 में शुरू किए गए अपने "मिशन 150" अभियान को फिर से शुरू किया है, ताकि नगर निकाय में बहुमत हासिल किया जा सके। संडे मिड-डे से बात करते हुए मुंबई बीजेपी के उपाध्यक्ष रवि राजा ने कहा, 'राज्य चुनाव परिणामों के आधार पर, हमारा लक्ष्य 150 नहीं बल्कि 175-180 सीटों तक बढ़ गया है।'

उद्धव ठाकरे के लिए बनेगी चुनौती
हाल ही में बीजेपी में शामिल हुए कांग्रेस के पूर्व नेता राजा ने भी चुनाव जल्दी कराए जाने की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि ये चुनाव 2025 की शुरुआत में हो सकते हैं। तो वहीं, बीजेपी का बढ़ता प्रभाव शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के लिए एक बड़ी चुनौती है। अविभाजित शिवसेना लंबे समय से मुंबई की राजनीति पर हावी रही है।

कमजोर पड़ी है शिवसेना यूबीटी
हालांकि, हाल के वर्षों में शिवसेना यूबीटी की पकड़ कमजोर हुई है, खासकर 2022 में यूबीटी और एकनाथ शिंदे गुटों में विभाजित होने के बाद। 2017 के बीएमसी चुनावों में, शिवसेना ने 84 सीटें जीतीं और निर्दलीयों के समर्थन से नियंत्रण बरकरार रखा, जबकि बीजेपी ने 82 सीटें हासिल कीं, जो 012 में उनकी पिछली 51 सीटों की संख्या से काफी अधिक थी।

हाल ही में राज्य विधानसभा के नतीजे यूबीटी गुट के संघर्ष को उजागर करते हैं। इसने मुंबई की 21 सीटों में से केवल 10 पर जीत हासिल की, जो 2019 में 14 से कम है। जबकि, भाजपा ने 18 में से 15 सीटों पर कब्जा किया। भाजपा ने अपने बेहतर स्ट्राइक रेट का भी बखान किया है- यूबीटी गुट के 47.62 प्रतिशत के मुकाबले 83.33 प्रतिशत।

बीजेपी नेता अपनी सफलता का श्रेय बुनियादी ढांचे के विकास, खासकर मुंबई के मेट्रो नेटवर्क पर अपने फोकस को देते हैं। महाराष्ट्र भाजपा प्रवक्ता केशव उपाध्याय ने मिड-डे में कहा, 'बीजेपी मेट्रो का विस्तार करने और मुंबईकरों को बेहतर बुनियादी ढांचा देने के लिए प्रतिबद्ध है।' मुंबई का विकास मतदाताओं के लिए एक अहम मुद्दा बना हुआ है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने मिड-डे को बताया कि ये विकास मुंबईकरों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण हैं। मार्च 2022 से चुनावों में देरी के कारण बीएमसी बिना निर्वाचित प्रतिनिधियों के काम कर रही है। इस अवधि के दौरान, नगर आयुक्त अन्य नौकरशाहों के साथ शहर के मामलों की देखरेख करते हैं।

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