BMC Election 2026: कौन असली मुंबईकर? चुनाव से पहले 'मराठी मानुष' पर बहस तेज, अन्नामलाई के बयान से गरमाई सियासत
BMC Election 2026: मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव के लिए जैसे-जैसे मतगणना की तारिख नजदीक आते जा रही है वैसे-वैसे वहां कि राजनीति में गरमाहच बढ़ती जा रही है। इसी बीच राज्य में 'कौन असली मुंबईकर और कौन बाहरी' की बहस ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है।
इस विवाद के केंद्र में आ गए हैं तमिलनाडु भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व IPS अधिकारी के. अन्नामलाई, जिनके एक बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में तीखी बयानबाज़ी को जन्म दे दिया है। विस्तार से जानिए विवाद की असली जड़ क्या है...

अन्नामलाई के बयान से बढ़ा विवाद
BMC चुनाव प्रचार के दौरान धारावी में आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए अन्नामलाई ने मुंबई को "इंटरनेशनल सिटी" बताया और कहा कि यह सिर्फ महाराष्ट्र की ही नहीं, बल्कि पूरे देश की आर्थिक राजधानी है। उनके इस बयान को लेकर शिवसेना (UBT) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने तीखी प्रतिक्रिया दी।शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने अन्नामलाई के बयान को लेकर भाजपा पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि अन्नामलाई के बयान से साफ है कि उनकी पार्टी "मुंबई और महाराष्ट्र का सिर्फ अपमान और शोषण करना चाहती है।"
आदित्य ठाकरे ने तंज कसते हुए कहा, अन्नामलाई BJP का चेहरा हैं, जो खुद 'जीरो' हैं। वह तमिलनाडु में चुनाव जीत नहीं सके और अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए। भाजपा यह दिखाने की कोशिश करती है कि अन्नामलाई भविष्य के प्रधानमंत्री होंगे, जबकि हकीकत यह है कि तमिलनाडु की जनता ने उन्हें नकार दिया है।
आदित्य ठाकरे ने इस मौके पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन की तारीफ करते हुए कहा कि स्टालिन राज्य को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं, जबकि भाजपा नेता सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप और गाली-गलौज में लगे हुए हैं।
अन्नामलाई का पलटवार: 'मुंबई को विश्वस्तरीय कहना अपराध नहीं'
आदित्य ठाकरे और अन्य नेताओं की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए अन्नामलाई ने अपने बयान का बचाव किया। उन्होंने कहा कि मुंबई को विश्वस्तरीय शहर कहना किसी भी तरह से मराठी अस्मिता का अपमान नहीं है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा,अगर मैं कहूं कि कामराज भारत के महान नेताओं में से एक हैं, तो क्या वह तमिल नहीं रह जाते? अगर मैं मुंबई को वर्ल्ड क्लास सिटी कहूं, तो क्या इसका मतलब यह है कि महाराष्ट्रीयनों ने इसे नहीं बनाया? अन्नामलाई ने खुद को एक किसान का बेटा बताते हुए कहा कि उन्हें धमकाने का कोई अधिकार नहीं है और सिर्फ उन्हें गालियां देने के लिए बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
राज ठाकरे ने पुराने नारे को किया फिर जिंदा
इस विवाद में सबसे तीखी प्रतिक्रिया MNS प्रमुख राज ठाकरे की ओर से आई। उन्होंने 1960-70 के दशक में शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे के दौर के विवादित नारे को दोहराते हुए कहा-"हटाओ लुंगी, बजाओ पुंगी"
यह नारा दक्षिण भारतीयों, खासकर तमिल समुदाय, के खिलाफ इस्तेमाल किया जाता रहा है। राज ठाकरे ने अन्नामलाई पर तंज कसते हुए कहा, एक रस मलाई तमिलनाडु से आया है, तुम्हारा यहां से क्या संबंध?
क्या है तमिल समुदाय और 'लुंगी' राजनीति का इतिहास?
मुंबई में तमिल भाषी आबादी करीब 4 प्रतिशत मतदाताओं की मानी जाती है। इनमें से बड़ी संख्या धारावी और अन्य झुग्गी इलाकों में रहती है। 1960 के दशक में बाल ठाकरे ने मराठी युवाओं में बेरोजगारी के मुद्दे को लेकर दक्षिण भारतीयों-तमिल, मलयाली और कन्नड़ भाषियों-को निशाना बनाया था। 'लुंगी' शब्द दक्षिण भारतीयों के पारंपरिक पहनावे को लेकर इस्तेमाल किया जाने वाला अपमानजनक संबोधन बन गया था
। उस दौर में यह राजनीति मराठी वोट बैंक को एकजुट करने में कारगर साबित हुई और शिवसेना एक बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी। बाद के सालों में शिवसेना का रुख उत्तर भारतीय प्रवासियों की ओर मुड़ गया, लेकिन 'लुंगी' टिप्पणी आज भी मुंबई की राजनीति के संवेदनशील इतिहास की याद दिलाती है।
BMC चुनाव में क्यों अहम है यह मुद्दा?
महाराष्ट्र में 29 नगर निगमों, जिनमें मुंबई और पुणे शामिल हैं, के चुनाव 15 जनवरी को होने हैं और मतगणना 16 जनवरी को होगी। BMC चुनाव खास तौर पर इसलिए अहम हैं क्योंकि यह देश की सबसे अमीर नगर निकाय है और शिवसेना के 2022 में हुए विभाजन के बाद पहला बड़ा नगर निकाय चुनाव है। इस बीच 'बाहरी बनाम स्थानीय' की बहस ने चुनावी माहौल को और तीखा बना दिया है। वहीं, तमिलनाडु में भी इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं, जिससे अन्नामलाई की सक्रियता और ज्यादा राजनीतिक मायने रखती है।
BMC चुनाव से पहले अन्नामलाई के बयान ने मुंबई की राजनीति में पुराने घाव फिर से हरे कर दिए हैं। मराठी अस्मिता, प्रवासी राजनीति और विकास के मुद्दे अब खुलकर आमने-सामने हैं। आने वाले दिनों में यह शब्दों की जंग और तेज होने की संभावना है, जिसका असर सीधे मुंबई की सियासत और चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है।












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