महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े उलटफेर की तैयारी, दिल्ली में भाजपा का शीर्ष नेतृत्व ले सकता है मुश्किल फैसला
लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को दो राज्यों में सबसे बड़ा झटका लगा है। पार्टी को उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में बड़ी हार का मुंह देखना पड़ा और पिछले चुनाव की तुलना में सीटों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है।
चुनाव के नतीजों के बाद भाजपा में आंतरिक मंथन शुरू हो गया है। महाराष्ट्र के चुनाव नतीजों के बाद दिल्ली में मंगलवार को भाजपा की अहम बैठक होने जा रही है।

हालांकि इस बैठक को चुनावी समीक्षा का नाम दिया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि महाराष्ट्र में भविष्य की राजनीति को लेकर इस बैठक में बड़ा फैसला हो सकता है।
दिल्ली में होने वाली बैठक में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले, आशीष शेलार, अशोक चौहान, गिरीश महाजन सहित कई बड़े नेता हिस्सा लेंगे।
यह बैठक भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ होने जा रही है। इस बैठक में चर्चा का केंद्र बिंदु यह रहने वाला है कि प्रदेश की 48 लोकसभा सीटों में एनडीए आखिर क्यों 17 सीटों पर ही जीत दर्ज कर सकी।
इससे पहले प्रदेश के चुनावी नतीजों को लेकर समीक्षा हो चुकी है। बैठक में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, रक्षा ख़से, विनोद तावड़े भी शामिल हुए थे। गौर करने वाली बात है कि महाराष्ट्र में भाजपा को सिर्फ 9 सीटों पर जीत मिली थी। एनडीए को प्रदेश में 17 तो इंडिया गठबंधन को यहां 30 सीटों पर जीत मिली थी।
दरअसल महाराष्ट्र में इसी वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में पार्टी के लिए लोकसभा चुनाव के नतीजे बड़ी चिंता लेकर आए हैं। यही वजह है कि पार्टी की प्रदेश इकाई और केंद्रीय इकाई सक्रिय हो गई है और आगामी चुनाव को लेकर रणनीति बनाने में जुट गई है।
चुनाव में भाजपा की हार के मंथन के लिए 16 बड़े नेताओं को पहले ही काम पर लगाया जा चुका है। माना जा रहा है कि 16 से 22 जून के बीच यह टीम महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष को अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है।
महाराष्ट्र विधानसभा में कुल 288 सीटें हैं। चुनाव से पहले भाजपा ने भूपेंद्र यादव और अश्विनी वैष्णव को चुनाव प्रभारी और सह प्रभारी नियुक्त किया है।
बता दें कि लोकसभा चुनाव में हार के बाद देवेंद्र फडणवीस ने पार्टी के नेता के तौर पर अपने इस्तीफे की पेशकश की थी। उन्होंने कहा था कि चुनाव से पहले वह पार्टी के लिए पूरी तरह से काम करना चाहते हैं।
हालांकि वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप के बाद फडणवीस का इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ। माना जा रहा है कि 18 जून को होने वाली बैठक में देवेंद्र फडणवीस को लेकर भी बड़ा फैसला हो सकता है।












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