IIM रायपुर में शुरू हुआ साय कैबिनेट का चिंतन शिविर, सुशासन और AI आधारित प्रशासन पर मंथन
आईआईएम रायपुर में छत्तीसगढ़ के दो दिवसीय कैबिनेट सम्मेलन में नेतृत्व, एआई एकीकरण, डिजिटल प्रशासन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास पर जोर दिया गया। विशेषज्ञ मंत्रियों को प्रशासनिक आधुनिकीकरण, बस्तर-केंद्रित पहलों और जिलों में बेहतर सेवा वितरण पर मार्गदर्शन करते हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार ने सुशासन को नई दिशा देने और बदलती चुनौतियों के अनुरूप प्रशासनिक क्षमता विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में दो दिवसीय मंत्रिमंडलीय चिंतन एवं प्रशिक्षण शिविर शनिवार से IIM रायपुर में शुरू हुआ। शिविर के पहले दिन मंत्रियों ने नेतृत्व, जीवन-मूल्य, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल गवर्नेंस और ग्रामीण अर्थव्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया।

मंत्रिमंडल के सदस्यों के ठहरने की व्यवस्था भी IIM परिसर में की गई है, ताकि पूरा शिविर गंभीर संवाद, विचार-विमर्श और भविष्य की रणनीति तय करने का प्रभावी मंच बन सके।
राज्य सरकार का मानना है कि विकसित भारत के विजन को साकार करने के लिए शासन व्यवस्था को भी आधुनिक, जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनाना आवश्यक है। बस्तर में सुरक्षा स्थिति में सुधार के बाद अब सरकार का फोकस विकास, निवेश, कृषि, पर्यटन और दूरस्थ क्षेत्रों तक योजनाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने पर है। इसी उद्देश्य से मंत्रियों को नई प्रशासनिक चुनौतियों के लिए तैयार किया जा रहा है।
नेतृत्व और संवेदनशील प्रशासन पर जोर
शिविर की शुरुआत मोटिवेशनल स्पीकर एवं आध्यात्मिक गुरु गौर गोपाल दास के सत्र से हुई। उन्होंने मंत्रियों से नेतृत्व, जीवन-मूल्य, आंतरिक संतुलन और सार्वजनिक जीवन में संवेदनशीलता जैसे विषयों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज के जनप्रतिनिधि की भूमिका केवल विभागीय कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि जनता का विश्वास कायम रखना और संकट के समय संतुलित निर्णय लेना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
AI और डिजिटल गवर्नेंस पर विशेष फोकस
विशेषज्ञ अभय करंदीकर ने मंत्रिमंडल को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया और डिजिटल गवर्नेंस के बदलते स्वरूप से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि भविष्य का प्रभावी शासन वही होगा, जो तकनीक का उपयोग तेज निर्णय, पारदर्शिता और बेहतर सेवा वितरण के लिए करेगा। विशेष रूप से दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने में AI महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि विकास पर मंथन
नीति आयोग के सदस्य डॉ. रमेश चंद ने ग्रामीण आय बढ़ाने, कृषि मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने, स्थानीय उद्यमों को प्रोत्साहन देने और गांव-केंद्रित विकास मॉडल पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का आधार गांव, कृषि और वनोपज हैं, इसलिए सतत विकास के लिए इन क्षेत्रों को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
बस्तर के विकास पर भी विशेष ध्यान
सरकार का मानना है कि बस्तर के लिए अब अगला चरण विकास, जनविश्वास और रोजगार के नए अवसरों का है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और निवेश जैसे क्षेत्रों में तेजी लाने के लिए आधुनिक प्रशासनिक सोच और प्रभावी कार्यान्वयन जरूरी है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बदलते समय में शासन व्यवस्था को लगातार सीखते रहने, आत्ममूल्यांकन करने और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप स्वयं को तैयार रखने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रशासन को केवल सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि जवाबदेह, प्रशिक्षित और परिणाम देने वाली व्यवस्था के रूप में विकसित करना चाहती है।












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