छत्तीसगढ़ सरकार का 'मिशन सुशासन': आईआईएम रायपुर में मंत्रियों की क्लास, क्या बदलेगा?

छत्तीसगढ़ सरकार ने सुशासन को मजबूत करने और मंत्रियों को प्रशासनिक चुनौतियों के लिए तैयार करने के मकसद से आईआईएम (IIM) रायपुर में दो दिवसीय 'कैबिनेट चिंतन और प्रशिक्षण शिविर' की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य कैबिनेट को आधुनिक लीडरशिप स्किल, तकनीकी जानकारी और 'विकसित भारत' के विजन के अनुरूप नीतिगत दृष्टिकोण से लैस करना है।

Chhattisgarh Cabinet Camp at IIM Raipur

शिविर के पहले दिन मंत्रियों ने लीडरशिप, जीवन मूल्यों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल गवर्नेंस और ग्रामीण अर्थव्यवस्था जैसे विषयों पर विशेषज्ञों के सत्रों में हिस्सा लिया। गहन चर्चा और रणनीतिक योजना बनाने के लिए कैबिनेट के सभी सदस्य पूरे कार्यक्रम के दौरान आईआईएम कैंपस में ही रुक रहे हैं।

राज्य सरकार का मानना है कि 'विकसित भारत' के सपने को पूरा करने के लिए एक ऐसा गवर्नेंस मॉडल जरूरी है जो आधुनिक, जवाबदेह और परिणाम देने वाला हो। बस्तर में सुरक्षा स्थिति में आए बड़े सुधार के बाद, अब सरकार का पूरा ध्यान विकास की रफ्तार बढ़ाने, निवेश लाने, खेती-किसानी, पर्यटन और दूरदराज के आदिवासी इलाकों में सरकारी सेवाओं को बेहतर बनाने पर है।

प्रशासन से आगे: लीडरशिप और संवेदनशीलता

प्रशिक्षण की शुरुआत मोटिवेशनल स्पीकर और आध्यात्मिक गुरु गौर गोपाल दास के सत्र से हुई। उन्होंने लीडरशिप, जीवन मूल्यों, भावनात्मक संतुलन और सार्वजनिक जीवन में संवेदनशीलता पर बात की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज के जनप्रतिनिधियों को केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जनता का भरोसा जीतने और चुनौतीपूर्ण स्थितियों में संतुलित फैसले लेने की कला भी सीखनी चाहिए।

AI और डिजिटल गवर्नेंस पर रहा जोर

तकनीकी विशेषज्ञ अभय करंदीकर ने मंत्रियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा-आधारित गवर्नेंस और डिजिटल निर्णय लेने की बढ़ती भूमिका के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भविष्य का सुशासन तकनीक के इस्तेमाल पर निर्भर करेगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी, फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे और मॉनिटरिंग सिस्टम मजबूत होगा। इससे खासकर दूरदराज के इलाकों में सार्वजनिक सेवाओं की डिलीवरी बेहतर होगी।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खेती पर फोकस

नीति आयोग के सदस्य डॉ. रमेश चंद ने ग्रामीण आय बढ़ाने, कृषि वैल्यू चेन, स्थानीय उद्यमों और गांव-केंद्रित विकास पर एक सत्र लिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि छत्तीसगढ़ का टिकाऊ विकास तभी संभव है जब नीतियों के केंद्र में किसान, ग्रामीण रोजगार और वन-आधारित आजीविका को रखा जाए।

बस्तर के विकास पर विशेष चर्चा

चर्चा के दौरान बस्तर के विकास की ओर बढ़ते कदमों पर भी खास ध्यान दिया गया। सरकार का मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, निवेश और स्थानीय आजीविका को बेहतर बनाने के लिए एक आधुनिक गवर्नेंस अप्रोच की जरूरत है, जिसमें नीतियों को तेजी से लागू किया जा सके।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस चिंतन शिविर को आज के बदलते दौर में बेहद जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि सरकारों को लगातार सीखने, अपने प्रदर्शन का मूल्यांकन करने और भविष्य की चुनौतियों के लिए खुद को तैयार रखने की जरूरत है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम छत्तीसगढ़ सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत एक कुशल, जवाबदेह और तकनीक-आधारित शासन व्यवस्था बनाकर 'विकसित भारत' के राष्ट्रीय विजन को साकार किया जा सके।

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