Bahu Balli: बदल रहा भारत, इस राज्य में लगा पहला बांस से बना क्रैश बैरियर
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि महाराष्ट्र में पहला बांस से बना क्रैश बैरियर लगा, जो पूरी तरह से सुरक्षित है।

देश में सड़क हादसों की संख्या काफी ज्यादा बढ़ रही है। इससे वो राज्य सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जहां पर पहाड़ पर सड़कें बनी हैं। इसको लेकर कई राज्यों ने सार्थक पहल की और जोखिम वाली जगहों पर क्रैश बैरियर लगवाए, लेकिन अब केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इसमें स्वदेशी जुगाड़ लगा दिया है। जिसके तहत महाराष्ट्र में बांस से बने क्रैश बैरियर लगाए गए। ये दुनिया के पहले ऐसे क्रैश बैरियर होंगे, जिनका पूरा निर्माण बांस से हुआ है।
मामले में नितिन गडकरी ने कहा कि महाराष्ट्र में चंद्रपुर और यवतमाल जिलों को जोड़ने वाले एक हाईवे पर 200 मीटर लंबा बांस क्रैश बैरियर लगाया गया है। ये अपने आप में दुनिया का पहला बंबू क्रैश बैरियर है। गडकरी के मुताबिक ये देश के लिए खास उपलब्धि है। ये क्रैश बैरियर स्टील का एक सही विकल्प प्रदान करता है। साथ ही इससे पर्यावरण को भी नुकसान नहीं होता।
गडकरी ने इस बैरियर की तस्वीर भी शेयर की है। इसके साथ उन्होंने लिखा कि दुनिया के पहले 200 मीटर लंबे बांस क्रैश बैरियर के विकास के साथ #AatmanirbharBharat की दिशा में असाधारण उपलब्धि। इसे वाणी-वरोरा हाईवे पर लगाया गया है। मंत्री के मुताबिक इस बैरियर को बहु-बल्ली नाम दिया गया है। ये बाहुबली शब्द से मिलता चुलता है।
मंत्री के मुताबिक इंदौर के पीथमपुर में नेशनल ऑटोमोटिव टेस्ट ट्रैक्स (NATRAX) जैसे विभिन्न सरकारी संस्थानों में इसका कठोर परीक्षण किया गया। इसके बाद रुड़की में केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI) में इसका फायर रेटिंग टेस्ट हुआ। इसे क्लास 1 का दर्ज मिला है। साथ ही इंडियन रोड कांग्रेस ने भी इसको मान्यता दी। खास बात ये है कि बांस बैरियर की रिसाइकिलिंग वैल्यू 50-70 प्रतिशत है, जबकि स्टील के मामले में ये 30-50 प्रतिशत ही रहती है।
खास प्रजाति का है बांस
इस बैरियर को बनाने में इस्तेमाल की जाने वाली बांस की प्रजाति बंबूसा बालकोआ है, जिसे क्रेओसोट तेल से ट्रीट किया गया। इसमें रिसाइकिल हाई-डेंसिटी पॉली एथिलीन (एचडीपीई) की कोटिंग है। इससे पर्यावरण को भी किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होगा। साथ ही ये ग्रामीण उद्योग को बढ़ावा देगा।












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