UPSC CSE Result 2023: गजब हो गया सबसे बड़े एग्जाम में, 1 ही रोल नंबर वाली 2 'आयशा' और रिजल्ट में एक ही रैंक 184
UPSC CSE Result 2023 में सैकड़ों बच्चों के सपने साकार हुए तो इस बीच मध्य प्रदेश में एक नाम की 2 लड़कियों के एक ही रोल नंबर पर 1 रैंक के अजीबों गरीब मामले ने नई उलझन पैदा कर दी हैं। जानिए पूरा मामला इस आर्टिकल मे।

UPSC CSE Result 2023: रील लाइफ में तो डबल रोल और कहानी खूब देखी सुनी। लेकिन रियल लाइफ में लाइफ से जुड़े कई किस्से चौंका देते हैं। देश के सबसे बड़ा एग्जाम माने जाने वाले यूपीएससी 2022 के नतीजे आए तो मध्य प्रदेश में दो कैंडिडेट्स के बीच कुछ ऐसा हुआ कि मामला चर्चा में हैं।
शक्ल, एडमिट कार्ड में पिता का नाम, शहर और कुछ जानकारी छोड़ यूपीएससी के नतीजे में सब कुछ एक सा है। मंगलवार को घोषित हुए परिणाम में रैंक 184 को लेकर बवाल मच गया हैं। एमपी के दो अलग शहरों की रहने वाली दोनों आयशा इस रैंक पर दावा कर रही है।
कहानी बेहद दिलचस्प है। आयशा फातिमा देवास जिले की रहने वाली है, जबकि दूसरी कैंडिडेट आयशा मकरानी अलीराजपुर जिले से आती हैं। दोनों UPSC के एग्जाम में शामिल हुई। तीनों स्टेज की परीक्षा में दोनों सम्मिलित हुई।
जब रिजल्ट आया तो दोनों आयशा के घर के लोग ख़ुशी से झूम उठे और मिठाईयां बंटने लगी। जब सोशल मीडिया पर दोनों की तस्वीरें 184 रैंक के साथ वायरल होना शुरू हुई तो पूरे यूपीएससी एग्जाम पर सवाल खड़े हो गए है।

सोशल मीडिया में वायरल दोनों आयशा का एडमिट कार्ड के मुताबिक रोल नंबर 7811744 है। देवास की आयशा के पिता का नाम नजीरुद्दीन है, जबकि अलीराजपुर की आयशा के पिता का नाम सलीमुद्दीन है। बड़ा फर्क यह है कि देवास की आयशा के रोल नंबर पर क्यू आर कोड है और अलीराजपुर की आयशा के एडमिट कार्ड में रोल नंबर पर यह कोड नदारत है।

रोल नंबर 7811744 पर नतीजा 184 रैंक दर्शा रहा है। अब सबसे बड़ी उलझन यह है कि यह परिणाम कौन सी आयशा सही माने? दोनों अपनी मेहनत और सफलता का दावा कर रही हैं। आयशा मकरानी के एडमिट कार्ड में पर्सनालिटी टेस्ट की लिखी तारीख 25 अप्रैल में दिन गुरूवार डला है, जबकि दिन मंगलवार था। यूपीएससी की ओर से इस संबंध में दोनों कैंडिडेट को एक सा नाम होने का मेल भी पहुंचा है।

अब देवास की आयशा फातिमा का कहना है कि एग्जाम उसने क्वालीफाई किया है। 184वीं रैंक उसकी ही है। इधर आयशा मकरानी के भाई शहबाजुद्दीन ने बताया कि यदि बहन को न्याय नहीं मिला तो वह न्यायलय की शरण लेगा। वहीं दूसरे लोग भी हैरान है और इस गड़बड़ी की वजह भी जानना चाहते है कि दोनों कैंडिडेट के पिता का नाम और शहर अलग होते हुए एक ही रोल नंबर कैसे जारी हो गया?
अब संघ लोक सेवा आयोग के द्वारा इस मामले में आगे पड़ताल के बाद ही असलियत का खुलासा होगा और पता चलेगा कि 184वीं रैंक का नतीजा किसका है? हाल ही में MPPSC के एग्जाम के वक्त जबलपुर में भी ऐसी स्थिति सामने आ चुकी है। लेकिन एक ही रोल नंबर पर परीक्षा देने दो अभ्यर्थी में एक लड़की थी और एक लड़का। उसकी भी जांच जारी।
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