Bhopal News: भोपाल कलेक्ट्रेट पहुंचे परिवार ने प्रशासन से नाराज होकर अपनी ही गाड़ी में लगाई आग

Bhopal MP news: राजधानी में नाथुबरखेड़ा गांव के रघुनाथ सिंह और उनकी पत्नी शक्कर बाई ने कलेक्ट्रेट में पहुंचकर एक गंभीर आरोप लगाया है कि उनके परिवार की पैतृक संपत्ति को हड़पने की कोशिश की जा रही है।

उनका आरोप है कि एक बिल्डर, जो उनके परिवार के अन्य सदस्य के साथ मिलकर उनकी जमीन को खरीदने की योजना बना रहा है, लगातार दबाव बना रहा है। रघुनाथ और शक्कर बाई की शिकायत है कि बिल्डर परिवार के अन्य सदस्य के साथ मिलकर उनकी जमीन को हड़पने के लिए दबाव डाल रहा है, जबकि वे अपनी संपत्ति को बेचना नहीं चाहते।

The family reached Bhopal Collectorate angry with the administration and set their own car on fire

परिवार की संपत्ति और विवाद का शुरूवात

रघुनाथ सिंह और शक्कर बाई के परिवार के पास कई दशकों पुरानी पैतृक संपत्ति है। इस संपत्ति के कई वारिस हैं, जो अलग-अलग जगहों पर रहते हैं। कुछ समय पहले, एक बिल्डर ने परिवार के कुछ अन्य लोगों से संपर्क किया और उनकी जमीन को खरीदने का प्रस्ताव दिया। हालांकि रघुनाथ और शक्कर बाई अपनी संपत्ति को किसी भी कीमत पर बेचना नहीं चाहते थे, लेकिन परिवार के अन्य सदस्य और बिल्डर लगातार उन पर दबाव बना रहे थे, ताकि वे अपनी जमीन बेचने के लिए तैयार हो जाएं।

प्रशासन से की शिकायत

रघुनाथ और शक्कर बाई ने कई बार प्रशासन से अपनी शिकायतें कीं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्हें यह महसूस हो रहा था कि उनके मामले को नजरअंदाज किया जा रहा है। उनकी शिकायत थी कि बिल्डर और परिवार के कुछ सदस्य मिलकर उनकी संपत्ति को हड़पने के प्रयास में लगे हुए थे, और प्रशासन कोई कदम नहीं उठा रहा था।

जनसुनवाई के दौरान गाड़ी में आग लगाई

जब उनकी शिकायतों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो रघुनाथ सिंह और उनका परिवार निराश हो गए। उन्होंने प्रशासन के अधिकारियों के सामने अपनी परेशानियां रखने के लिए कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई का रास्ता अपनाया। रघुनाथ और उनके परिवार ने जनसुनवाई में अपनी गाड़ी खड़ी की, जिसमें वे बैठे हुए थे। इस दौरान रघुनाथ ने गाड़ी में पेट्रोल डालकर उसे आग लगा दी। यह आग इतनी भयंकर थी कि गाड़ी पूरी तरह जलने लगी, लेकिन सौभाग्य से मौके पर मौजूद अन्य लोगों ने तत्काल उन्हें गाड़ी से बाहर निकाल लिया और किसी भी सदस्य को नुकसान नहीं हुआ।

जमीन की हड़पाई का आरोप

रघुनाथ और शक्कर बाई के परिवार के पास एक बड़ी पैतृक संपत्ति है, जिसके कई वारिस हैं। कुछ समय पहले, एक बिल्डर ने परिवार के कुछ अन्य सदस्य से संपर्क किया और उनकी जमीन खरीदने का प्रस्ताव दिया। हालांकि रघुनाथ और शक्कर बाई अपनी संपत्ति को किसी भी कीमत पर बेचना नहीं चाहते थे। इसके बावजूद, उनका आरोप है कि बिल्डर और उनके परिवार के सदस्य मिलकर उनकी जमीन हड़पने की कोशिश कर रहे हैं और उन्हें मानसिक रूप से परेशान कर रहे हैं।

प्रशासन से की शिकायत, लेकिन कोई सुनवाई नहीं

रघुनाथ और शक्कर बाई ने कई बार प्रशासन से अपनी शिकायत की, लेकिन उन्हें कोई सुनवाई नहीं मिली। उनका कहना है कि जब उन्होंने अपनी समस्याओं को प्रशासन के अधिकारियों तक पहुंचाया, तो उनकी शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्हें यह भी महसूस हुआ कि अधिकारियों ने उनकी शिकायतों को नजरअंदाज किया। उन्होंने कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई के दौरान भी अपना आवेदन दिया, लेकिन वहां भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

गाड़ी में आग लगाकर किया विरोध

प्रशासन से निराश होकर रघुनाथ सिंह और उनका परिवार कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई के दौरान अपनी गाड़ी में बैठा हुआ था। इस दौरान रघुनाथ ने गाड़ी में पहले से पेट्रोल डाल रखा था। जैसे ही जनसुनवाई शुरू हुई, उन्होंने गाड़ी में आग लगा दी। आग लगते ही गाड़ी धू-धू कर जलने लगी, लेकिन मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत ही परिवार के तीनों सदस्यों को गाड़ी से बाहर निकाल लिया और उनकी जान बच गई।

यह घटना न केवल प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि नागरिक अपनी समस्याओं के समाधान के लिए किस हद तक जा सकते हैं। रघुनाथ और शक्कर बाई ने यह कदम इसलिए उठाया, क्योंकि उन्हें लगा कि यदि वे प्रशासन के सामने अपनी समस्याओं का समाधान नहीं लाएंगे, तो कोई उनकी मदद नहीं करेगा।

प्रशासन की जिम्मेदारी

अब प्रशासन के ऊपर यह जिम्मेदारी है कि वह इस मामले की गंभीरता को समझे और तुरंत कार्रवाई करे। रघुनाथ और शक्कर बाई को अपनी जमीन का हक सुरक्षित रखने का पूरा अधिकार है, और प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी उन्हें उनके अधिकारों से वंचित न करे। साथ ही, इस मामले की सही जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और परिवार को न्याय मिल सके।

यह घटना प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाती है और यह भी दर्शाती है कि यदि समय पर कार्रवाई न की जाए, तो नागरिकों को अपनी आवाज उठाने के लिए इस तरह के कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

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