MP News: पचमढ़ी में मंगलवार को मध्यप्रदेश कैबिनेट की विशेष बैठक, राजा भभूत सिंह की स्मृति में होगा आयोजन
MP News: मध्य प्रदेश सरकार की कैबिनेट की अगली बैठक मंगलवार, 3 जून को सतपुड़ा की रानी पचमढ़ी में आयोजित होगी। यह बैठक जबलपुर, दमोह, महेश्वर और इंदौर के बाद भोपाल से बाहर होने वाली एक और महत्वपूर्ण बैठक होगी। मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए इस बार बैठक राजभवन, पचमढ़ी में आयोजित करने का फैसला लिया गया है।
यह बैठक कोरकू जनजाति के योद्धा और प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के नायक राजा भभूत सिंह की स्मृति को समर्पित होगी, जिन्हें नर्मदांचल का 'शिवाजी' कहा जाता है। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और उनके मंत्रिमंडल के सदस्य राजा भभूत सिंह की वीरता को स्मरण करते हुए उनके सम्मान में कई महत्वपूर्ण फैसले ले सकते हैं। स्थानीय प्रशासन ने बैठक की तैयारियां शुरू कर दी हैं, और कई मंत्री आज ही पचमढ़ी पहुंच रहे हैं।

राजा भभूत सिंह, नर्मदांचल के 'शिवाजी' की गौरव गाथा
पचमढ़ी के जागीरदार परिवार हर्राकोट रायखेड़ी में जन्मे राजा भभूत सिंह 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ब्रिटिश शासन के खिलाफ अपनी गोरिल्ला युद्ध तकनीक के लिए प्रसिद्ध थे। उनके दादा ठाकुर मोहन सिंह ने पेशवा अप्पा साहब भोसले का साथ दिया था, और राजा भभूत सिंह ने भी अपने शौर्य से अंग्रेजों को कड़ी चुनौती दी। 1857 के विद्रोह के दौरान जब मध्य भारत का राज गोंड साम्राज्य ब्रिटिश नियंत्रण में आ गया, तब पचमढ़ी विद्रोह का एक प्रमुख गढ़ बन गया। विद्रोही नेता तात्या टोपे ने इस क्षेत्र में शरण ली थी और राजा भभूत सिंह के साथ मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी।
डेनवा नदी के किनारे मटकुली के पास मद्रास इन्फैंट्री और राजा भभूत सिंह के बीच कई महीनों तक युद्ध चला, लेकिन अंग्रेज उन्हें पकड़ नहीं सके। तात्या टोपे को 1859 में पकड़कर फांसी दी गई, लेकिन भभूत सिंह ने सतपुड़ा की पहाड़ियों से अपनी गोरिल्ला रणनीति के जरिए ब्रिटिश सेना पर हमले जारी रखे। 1860 में जबलपुर जेल में उनकी गिरफ्तारी और फांसी के बाद ही अंग्रेजों को महादेव पहाड़ियों और क्षेत्र के जंगलों पर नियंत्रण मिल सका। मध्य प्रदेश राज्य अभिलेखागार के आधिकारिक रिकॉर्ड में इन घटनाओं का उल्लेख है, जो राजा भभूत सिंह की वीरता और बलिदान को रेखांकित करते हैं।
कैबिनेट बैठक का महत्व, राजा भभूत सिंह को सम्मान
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में यह कैबिनेट बैठक न केवल प्रशासनिक फैसलों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी खास है। शहरी विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने घोषणा की थी कि हाल ही में देवी अहिल्याबाई होल्कर को श्रद्धांजलि देने के बाद अब कैबिनेट पचमढ़ी में राजा भभूत सिंह की विरासत को सम्मान देगी।
बताया जा रहा है कि इस बैठक में राजा भभूत सिंह की स्मृति में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं। इनमें पचमढ़ी में उनकी प्रतिमा स्थापना, नर्मदांचल में उनके नाम पर किसी संस्थान का नामकरण, और पचमढ़ी में एक गार्डन को उनके नाम पर समर्पित करने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। ये कदम न केवल उनकी वीरता को सम्मान देंगे, बल्कि कोरकू जनजाति और नर्मदांचल क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को भी प्रोत्साहन देंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "पचमढ़ी न केवल प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है, बल्कि यह हमारे जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विरासत से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। प्रदेश सरकार का संकल्प है कि हर गौरवशाली पक्ष को सामने लाया जाए।"
विकास कार्यों को मिलेगी सौगात
पचमढ़ी में होने वाली इस कैबिनेट बैठक में कई विकास कार्यों को मंजूरी मिलने की संभावना है। सोशल मीडिया पोस्ट्स के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस दौरान 5 प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण और 6 नए प्रोजेक्ट्स का भूमिपूजन करेंगे। इन विकास कार्यों से पचमढ़ी और नर्मदांचल क्षेत्र में पर्यटन, बुनियादी ढांचे और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय प्रशासन ने बैठक और इन आयोजनों के लिए सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं को पुख्ता कर लिया है।
पचमढ़ी के कलेक्टर ने अधिकारियों को बैठक की तैयारियों के लिए जिम्मेदारियां सौंपी हैं। कई मंत्री सोमवार को ही पचमढ़ी पहुंच रहे हैं, ताकि बैठक से पहले स्थानीय स्तर पर तैयारियों का जायजा लिया जा सके।
पचमढ़ी: ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व
पचमढ़ी, जिसे सतपुड़ा की रानी कहा जाता है, न केवल अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह क्षेत्र राजा भभूत सिंह के नेतृत्व में ब्रिटिश विरोध का केंद्र रहा। उन्होंने इस पहाड़ी क्षेत्र का उपयोग न केवल शासन संचालन के लिए, बल्कि सांस्कृतिक धरोहरों और स्थानीय जनजातियों की सुरक्षा के लिए भी किया। उनकी गोरिल्ला युद्ध रणनीति ने अंग्रेजों को लंबे समय तक परेशान रखा, जिसके कारण उन्हें नर्मदांचल का 'शिवाजी' कहा गया।
पचमढ़ी का यह ऐतिहासिक महत्व आज भी कोरकू जनजाति और स्थानीय समुदाय के लिए गर्व का विषय है। कैबिनेट बैठक के आयोजन से न केवल इस क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी, बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव
यह कैबिनेट बैठक मध्य प्रदेश सरकार की उस पहल का हिस्सा है, जिसके तहत ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नायकों को सम्मान देने के लिए विभिन्न शहरों में बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इससे पहले सिंग्रामपुर में रानी दुर्गावती, महेश्वर में देवी अहिल्याबाई होल्कर, और इंदौर में अन्य ऐतिहासिक व्यक्तित्वों की स्मृति में बैठकें आयोजित की गई थीं।
स्थानीय लोगों और कोरकू जनजाति के नेताओं ने इस आयोजन की सराहना की है। कोरकू समुदाय के एक नेता रमेश कोरकू ने कहा, "राजा भभूत सिंह हमारे लिए प्रेरणा हैं। उनकी वीरता को सम्मान देना और उनके नाम पर संस्थान या गार्डन बनाना हमारे समुदाय के लिए गर्व की बात है।"












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