Smart City Sagar: सीवर कनेक्शन का ₹ 3000 वसूलने प्रस्ताव, जनप्रतिनिधि-अधिकारी तय करेंगे कैसे ली जाए राशि
Smart City Sagar में अब रहना महंगा हो सकता है। नगर निगम परिषद ने पहली ही बैठक में जनता पर बोझ डालने वाला प्रस्ताव लाया गया है। इसमें सीवर के हाउस कनेक्शन का भारी-भरकम शुल्क 3 हजार रुपए वसूलने का प्रस्ताव परिषद के सामने रखा गया था। बैठक में तय किया गया कि इस राशि को कैसे लिया जाए, इसके लिए महापौर, विधायक, निगमाध्यक्ष व आयुक्त निगम पार्षदों के साथ बैठककर निर्णय लेंगे।

नगर निगम सागर की निर्वाचित नगर निगम परिषद की पहली बैठक गुरुवार दोपहर में आयोजित हुई। परिषद में आसंदी पर नगर निगम अध्यक्ष वृंदावन अहिरवार ने बैठक का संचालन किया। महापौर संगीता तिवारी, सांसद प्रतिनिधि डॉ. सुशील तिवारी, विधायक शैलेंद्र जैन सहित एमआईसी सदस्य, पार्षद विपक्षी पार्षद, नगर निगम आयुक्त चंद्रशेखर शुक्ला मौजूद थे। बैठक में शहर विकास से जुड़े सामान्य प्रस्ताव के साथ-साथ सबसे अहम प्रस्ताव सीवर प्रोजेक्ट के हाउस कनेक्शन का शुल्क तय करने का प्रस्ताव था। इसमें प्रत्येक घर से सीवर कनेक्शन का 3 हजार रुपए शुल्क वसूलने का प्रस्ताव सबसे महत्वपूर्ण था। पार्षदों ने इस पर चर्चा कर कैसे इसकी वसूली की जाए इस पर सुझाव दिए। कुछ पार्षदों ने कहा कि इसे किस्तों में लिया जाए तो एक पार्षद ने एसी, एसटी वर्ग को इसमें रियायत देने का सुझाव दिया। बैठक में तय किया गया कि सीवर कनेक्शन तीन हजार रुपए लेने के विषय पर अलग से बैठक कर निर्णय लिया जाए। इसके लिए महापौर, विधायक, निगमाध्यक्ष, आयुक्त और पार्षद अलग से बैठक कर चर्चा कर निर्णय लेंगे।
टाटा कंपनी के काम को लेकर हर पार्षद ने जताई नाराजगी
परिषद की बैठक में टाटा कंपनी द्वारा शहर में किए जा रहे कामों में गड़बड़ी, लापरवाही, लेट लतीफी को लेकर चर्चा की गई। इसमें टाटा कंपनी के अधिकारियों ने अपनी बात रखी, लेकिन परिषद के सदस्यों ने उन पर असहमति जताई। कंपनी ने जानकारी दी कि जनवरी 2023 से 6 जोन के वार्डो में पेयजल की सप्लाई प्रारंभ हो जाएगी। सांसद प्रतिनिधि डॉण् सुशील तिवारी ने कहा कि परिषद में चर्चा होने के बाद मैं सभी पार्षदों की पीड़ा को देख रहा हूं। उनकी यह पीड़ा बाजिब है, जनता इनके जवाब से संतुष्ट नहीं है अगर दिसंबर तक काम पूर्ण ना किया जाए तो इनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। इसी प्रकार सीवर प्रोजेक्ट को लेकर विधायक ने कहा कि इसको लेकर कई विसंगतियां है। एसटीपी प्लांट को सबसे आखिर में बनाना था, जबकि उसे सबसे पहले बनाया गया है। दिसंबर तक सीवर प्रोजेक्ट के काम पूरा होने आश्वासन लक्ष्मी सिविल इंजीनिरिंग कंपनी के अधिकारियों द्वारा लिखित में दिया जाए। निगमाध्यक्ष वृंदावन अहिरवार ने आसंदी से कहा कि सीवर कंपनी लिखित में पत्र दें और काम के दौरान यह ध्यान रखा जाए कि नालियां चोक न हो, जलभराव की समस्या न हो।












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