बागेश्वर धाम: धीरेंद्र शास्त्री का हिंदू राष्ट्र पर जोर, भूत-प्रेत के दावे और बैलगाड़ी की कहानी से माहौल गरम
मध्य प्रदेश के बागेश्वर धाम सरकार के महंत पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की हनुमंत कथा का पानीपत में रविवार को दूसरा दिन था। सेक्टर 13-17 मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में श्रद्धालु जुटे।
कथा की शुरुआत 'सत्यम शिवम सुंदरम' भजन से हुई, जिसके बाद मंच पर शास्त्री ने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में धर्म, राजनीति, विज्ञान और समाज पर तीखी और व्यंग्यात्मक टिप्पणियां कीं।

कथा के दौरान एक महिला के "भूत-प्रेत" कहकर चिल्लाने पर शास्त्री ने कहा -"इसे पारले जी बिस्किट खिलाओ।" यह कथन मंच पर मौजूद लोगों को गुदगुदा गया, वहीं उनके "पानीपत के पागलों, उठाओ दोनों हाथ, बजाओ ताली" जैसे बोलों ने माहौल में जोश भर दिया।
शास्त्री की मंच से कही गई 6 अहम बातें:
1. 'हां में हां' मिलाने वाला सचिव मत रखो
राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्थाओं पर बोलते हुए शास्त्री ने सलाह दी:"ऐसा सचिव मत रखो जो बस हां में हां मिलाए। वो सचिव रखो जो सच बोले-नेता जी, इस वार्ड में हम हार रहे हैं, वहां 20 वोट गड़बड़ में हैं।" यह बात उन्होंने एक व्यावहारिक राजनीतिक संदर्भ में कही, जो लोकल नेतृत्व की आलोचना भी मानी जा सकती है।
2. "सब कुछ भगवान करवाने वाला है"
स्वाभाविक अहंकार पर तंज कसते हुए शास्त्री ने कहा: "लोग कहते हैं हमने यह किया, वह किया। अबे ठठरी के बारे, तूने क्या किया? भगवान ने करवाया, तूने किया।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि सोने की चेन पहनोगे तो चोर की नजर पड़ेगी, लेकिन तुलसी की माला पहनोगे तो 'चित्तचोर' (कृष्ण) की नजर पड़ेगी।
3. "विज्ञान की शंका रखने वाले छात्रों को चेतावनी"
विज्ञान बनाम आस्था की बहस छेड़ते हुए उन्होंने एक छात्र के पत्र का हवाला दिया और कहा: "तेरा नाम ही गलत है। क्या तूने अपने बाप का प्रैक्टिकल किया है कि वही तेरे बाप हैं? मेरे सामने आ गया तो नंगा कर के भेजूंगा, घर वाले भी नहीं पहचान पाएंगे।" यह बयान मंच से तीखा और विवादास्पद रहा, जिसे सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया मिल रही है।
4. "कुछ बातें मंच से नहीं कही जा सकतीं"
धार्मिक अनुभूति और अनुभव को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा: "तुमने हवा नहीं देखी, लेकिन हवा है। तार में करंट नहीं देखा, लेकिन पकड़ोगे तो नानी याद आ जाएगी।" शास्त्री ने 'तनय' नाम के एक स्टूडेंट को संबोधित करते हुए चुनौती दी कि वह अपनी टीचर को लेकर उनके पास आए।
5. "हनुमान जी की पर्ची पहले नहीं, भक्ति पहले"
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि बहुत लोग पर्ची के लिए कथा में आते हैं, लेकिन उन्होंने साफ किया:"पहले हनुमान जी का गुणगान होगा, फिर पर्ची दी जाएगी। हम भी बदमाश हैं, पर्चा हनुमान जी का ही थमाएंगे।" उनकी यह बात उस आलोचना का उत्तर थी जिसमें उन्हें 'चमत्कारी पर्चा बाबा' कहा जाता है।
6. "लाहौर वाले ताली नहीं बजायेंगे"
देशभक्ति और हिंदू राष्ट्रवाद पर बोलते हुए उन्होंने कहा: "जिन्हें हिंदू राष्ट्र चाहिए, वो ताली बजाओ। क्या लाहौर वाले ताली बजायेंगे?" यह बयान स्पष्ट रूप से एक विचारधारात्मक राजनीतिक संकेत देता है, जो धार्मिक कथा में राजनीति के मिश्रण की ओर इशारा करता है।
धार्मिक रंग में सियासी रंग भी
शास्त्री की कथा में भक्ति के साथ-साथ व्यंग्य, कटाक्ष और वैचारिक भाषणों का मिश्रण रहा। एक ओर उन्होंने भगवान के प्रति आस्था और सनातन परंपरा का प्रचार किया, तो दूसरी ओर राजनीति, प्रशासन और आधुनिक विचारधाराओं पर तीखे व्यंग्य किए।
धीरेंद्र शास्त्री की पानीपत कथा का दूसरा दिन भी पहले दिन की तरह जोशीला, विवादास्पद और भीड़ भरा रहा। एक तरफ जहां भक्त उनके 'भक्तिभाव' से अभिभूत नजर आए, वहीं कई टिप्पणियां मंच की मर्यादा और सामाजिक सौहार्द पर सवाल भी खड़े करती हैं। क्या धार्मिक मंचों पर इस तरह की भाषा और विमर्श को स्वीकार्य माना जा सकता है? यह प्रश्न अब समाज और व्यवस्थाओं के आगे है।
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