‘ओरछा’ देश की दूसरी अयोध्या जहां ’राजा‘ के रुप में विराजे ‘श्री रामराजा सरकार’

सागर, 11 सितंबर। मप्र में बुंदेलखंड का 'ओरछा' कभी बुंदेली राजा-महाराजाओं की राजधानी रहा है। इसे देश की दूसरी अयोध्या कहा जाता हैं। भगवान श्री रामराजा सरकार की नगरी ओरछा में इतिहास और पुरातत्व की इमारतें अपने गौरवशाली गाथा को खुद बयां कर रही हैं। ओरछा देश-विदेश के पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बिंदू हैं। यहां पर्यटक और मनमोहक स्थलों की काफी संख्या है। बाहर से आने वाले पर्यटक यहां दो से तीन दिन रुककर मंदिर, छतरियों, महलों, पार्क, वाटरफाॅल का दीदार करते नहीं थकते।

श्री रामराजा मंदिर, ओरछा को बुंदेलखंड की अयोध्या कहा जाता है

श्री रामराजा मंदिर, ओरछा को बुंदेलखंड की अयोध्या कहा जाता है

ओरछा को देश-विदेश के नक्शे पर भगवान श्री रामराजा की नगरी के रुप में जाना जाता है। यह मंदिर वास्तुकला, शिल्पकला का अद्भुत इमारत है। मूल रुप से यह एक किला हैं। यह महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है। श्री रामराजा मंदिर के पीछे लंबा इतिहास छिपा है। एक समय यह तत्कालीन शासक मधुकर शाह का महल था। भगवान ने राजा मधुकर शाह को स्वप्न देकर यहां मंदिर स्थापित करने के लिए आज्ञा दी थी। मंदिर तैयार होने के साथ-साथ यहां श्रीराम दरबार की प्रतिमाएं लाई गईं थी, लेकिन वे जहां रखी थीं, उस स्थान से स्थानांतरित नहीं की जा सकीं। यह स्थल मूल रुप से राजा की पत्नी रानी गणेशकुमारी का महल था। मधुकर शाह ने इस महल को ही मंदिर बना दिया था। यह देश का एकलौता मंदिर है, जहां भगवान राम को राजा के रुप में पूजा जाता है। यहां भगवान को राजा के रुप में पूजा दी जाती है। सुबह और शाम की आरती के समय सशस्त्र बल की टुकड़ी द्वारा उन्हें गार्ड आॅफ आॅनर दिया जाता है।

‘ओरछा फोर्ट' 16 वीं सदी कि सबसे भव्य इमारत

‘ओरछा फोर्ट' 16 वीं सदी कि सबसे भव्य इमारत

ओरछा में बेतवा नदी के किनारे 16वीं सदी में निर्मित भव्य इमारत ओरछा फोर्ट मौजूद है। यह घूमने के लिए बेहतरीन जगह है। यह मप्र टूरिज्म निगम के अधीन है। ओरछा किला पर्यटकों के घूमने के लिए महत्वपूर्ण इमारत है। यह टूरिस्टों और इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए आकर्षक का केंद्र भी है। वास्तुकला का बेहतरीन नमूना भी है। लोग यहां घंटो समय बिताते हैं। किले का एक-एक हिस्सा पर्यटकों को लुभाता हैं। बता दें कि ओरछा किले का निर्माण 16वीं सदी में बुंदेला रुद्र प्रताप सिंह ने कराया था। यहां पर समय-समय पर लाइट एंड साउंड शो भी आयोजित होते हैं।

‘जहांगीर महल' कभी मुगलों का गढ़ था

‘जहांगीर महल' कभी मुगलों का गढ़ था

ओरछा में 'जहांगीर महल' पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। इस महल को मुगल शासकों के गढ़ के रुप में तैयार किया गया था। इस महल का निर्माण 1598 में किया गया था। इसको भरत भूषण द्वारा तैयार कराया गया था। ओरछा आने वाले पर्यटकों के लिए यह जहांगीर महल विशेष आकर्षण का केंद्र होता हैं। यह मुगल वास्तुकला कला का बेहतरीन उदाहरण है। इसके गुंबद, तैमूर, संस्कृति के हिसाब से बनाया गया हैं। महल के दरवाजे इतने बड़े और विशाल हैं कि उसमें से हाथी भी आसनी से निकल जाते हैं।

‘राजा महल' ओरछा में शासकों का शाही निवास

‘राजा महल' ओरछा में शासकों का शाही निवास

ओरछा में शाही महल नाम एक भव्य इमारत है। इसे राजा महल के नाम से जाना जाता है। इसे तत्कालीन शासकों ने अपने निवास के रुप में बनवाया था। यह उत्कृष्ठ सुंदरता और बेहतरीन संरचना के साथ बनाया गया था। इसके अंदर और बाहरी गुंबदों को लाटों से सजाया गया था। महल के अंदर भित्तिचित्रों की भव्यता नजर आती है। इसके अंदर बहुत ही व्यवस्थित आयताकार दो आंगन भी मौजूद हैं।

‘लक्ष्मी मंदिर' श्रीयंत्र और उल्लू की चोंच के आकार में बना है

‘लक्ष्मी मंदिर' श्रीयंत्र और उल्लू की चोंच के आकार में बना है

ओरछा का लक्ष्मी मंदिर वास्तुशास्त्र और शिल्पकला के हर पहलू को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यह मंदिर सन 1622 ईसवी में वीरसिंह देव ने बनवाया था। ओरछा के पश्चिम में एक पहाड़ी पर बना हुआ है। सबसे ताज्जुब की बात यह मंदिर बीते 36 सालों से मूर्ति विहीन है। मंदिर के अंदर उन्नीसवीं सदी में चटकीलें रंगों से चित्रों को उकेरा गया था, ऐसा प्रतीत होता है जैसे वे हाल ही में कुछ समय पहले बनाए गए हैं। मंदिर के बारे में सबसे अहम और खास बात जो हैं कि यह बुंदेलखंड का इकलौता मंदिर है जो श्रीयंत्र के आकार में उल्लू की चोंज को दर्शाते हुए बनाया गया है। 1983 में मंदिर में विराजमान प्रतिमाओं को चुरा लिया गया था, तब से मंदिर का गर्भगृह सूना है।

‘चतुर्भुज मंदिर' विश्वप्रसिद्ध मंदिर है, ‘चतुर्भुज मंदिर' विश्वप्रसिद्ध मंदिर है, भगवान श्री विष्णु की स्थापना कराई गई

‘चतुर्भुज मंदिर' विश्वप्रसिद्ध मंदिर है, ‘चतुर्भुज मंदिर' विश्वप्रसिद्ध मंदिर है, भगवान श्री विष्णु की स्थापना कराई गई

ओरछा का चतुर्भुज मंदिर अपने आप में एक कहानी है। इस मंदिर का निर्माण ओरछा के राजा श्री रामराजा सरकार को विराजमान कराने के लिए कराया गया था। जब 1558 से 1573 ई. के बीच में ओरछा के तत्कालीन राजा मधुकर शाह की पत्नी भगवान राम को प्रसन्न करने और उनको लेने के लिए ओरछा से अयोध्या कई थीं, उसी दौरान यह मंदिर बनाया गया था। मंदिर में महारानी भगवान श्रीराम को विराजमान कराना चाहती थीं। जब वे अयोध्या से श्रीराम राजा को लेकर लौटीं तो उन्होंने प्रतिमाएं अपने महल में रख लीं। जब उनकी मंदिर में स्थापना की बात आई तो फिर भगवान वहां से टस से मस नहीं हुए और उसी स्थान पर उनकी स्थापना करना पड़ी बाद में चतुर्भुज मंदिर में भगवान श्री विष्णु की स्थापना कराई गई थी।

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