मंत्री के गृहनगर में जनपद सीईओ पर तानाशाही के आरोप, अध्यक्ष-सदस्यों को करना पड़ रहा बहिष्कार
Madhya Pradesh के सागर की जनपद पंचायत सागर में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेंद्र के भतीजे पृथ्वीसिंह की पत्नी व मंत्री की बहू सविता सिंह जनपद अध्यक्ष हैं। उनकी और जनपद की सीईओ डॉ. मनीषा चतुर्वेदी की पटरी नहीं बैठ रही है। सीईओ की कार्यप्रणाली और अध्यक्ष सहित सदस्यों को विश्वास में लेकर काम न करने के तनातनी चल रही है। बीते रोज पूर्व तय साधारण सभा की बैठक के दौरान सीईओ समय पर बैठक में नहीं पहुंची। उन्होंने अपनी जगह बीडीओ व पीसीओ को भेज दिया। करीब आधा से पौन घंटे इंतजार के बाद अध्यक्ष और सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। इसके पूर्व भी सीईओ की कार्यप्रणाली से नाराज होकर बैठक का बहिष्कार किया जा चुका है।

जानकारी अनुसार जनपद पंचायत सागर में बीते रोज साधारण सभा की बैठक का आयोजन किया गया था। दो बजे से आयोजित बैठक में अध्यक्ष सविता पृथ्वी सिंह सहित तमाम सदस्य मौजूद थे। इधर करीब पौन घंटे तक इंतजार के बाद सीईओ डॉ. मनीषा सिंह बैठक से नदारद थीं। जिसके कारण सभी सदस्यों और अध्यक्ष ने नाराज होकर बैठक का बहिष्कार कर दिया। सीईओ कार्यालय के स्टॉफ के सदस्यों कोा भी खरी-खोटी सुनाई। इस मामले में बताया जा रहा है कि सीईओ ने जो पक्ष बताया है वे न्यायालयीन कार्य से गई हुई थीं। उन्होंने अपनी जगह बीडीओ व पीसीओ को बैठक में बैठने के लिए अधिकृत किया था।
अध्यक्ष का आरोप-सदस्यों का अपमान कर रही हैं सीईओ
जनपद अध्यक्ष सविता सिंह का आरोप है कि सीईओ डॉ. मनीषा चतुर्वेदी लोकतांत्रिक तरीके से चुनकर आए सदस्यों का लगातार अपमान कर रही हैं। दो दिनप पहले बैठक के दौरान जनपद सदस्य चंद्रशेखर घुरेटा ने सवाल उठाया था। इसमें उन्होंने पूछा था कि ऑफिस में अवांछित लोगों का जमावड़ा क्यों लगा रहता है, जिस पर सीईओ ने तत्काल सदस्य की तरफ देखते कहा तुम कौन हो? और किस हैसियत से सवाल कर रहे हो। बैठक में मौजूद जब अन्य सदस्यों ने बताया कि सवाल करने वाले जनपद सदस्य हैं तो वे चुप हो गईं।
भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोप लगा रहे जनपद सदस्य
जनपद सदस्य संजय मोंटी यादव ने आरोप लगाते हुए कहा कि सीईओ लगातार सदस्यों की अवहेलना कर रही हैं। उनका अधिनस्थ अमला भ्रष्टाचारियों और दलालों से घिरा रहता है। जनपद कार्यालय को भ्रष्टाचार का अड्डा बना रखा है। कुछ दलाल टाइप के लोग पूरे दिन यहां डेरा जमाए रहते हैं। सवाल उठाने पर सीईओ अभद्रता से पेश आती हैं। शपथग्रहण के बाद से पांच बैठकें हुईं जिनमें से सभी सदस्यों ने एक राय होकर बहिष्कार किया है। इसका कारण सीईओ ही हैं।












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