रूसी पारदी : नहीं रहा वो शख्स जिसने डाली थी देश की सबसे बड़ी ट्रेन डकैती, चेन्नई एक्सप्रेस से लूटे थे 6 करोड़

गुना। देश में सबसे बड़ी ट्रेन डकैती डालने वाला डकैत रूसी पारदी नहीं रहा। मध्य प्रदेश की गुना जेल में रूसी पारदी ने अंतिम सांस ली। गुरुवार तड़के करीब तीन बजे रूसी पारदी की मौत हो गई। मौत की वजह हार्ट अटैक बताया जा रहा है। रूसी पारदी और उसकी गैंग 8 अगस्त 2016 को उस समय देशभर में चर्चित रही जब इन्होंने तमिलनाडू के सलेम स्टेशन से चेन्नई जा रही ट्रेन में डकैती डालकर करीब छह करोड़ रुपए लूटे थे। उस डकैती को देश की सबसे बड़ी ट्रेन डकैती माना जाता है। ट्रेन की दो बोगियों में आरबीआई के 342 करोड़ रुपए थे, जिनकी सुरक्षा में 18 हथियार पुलिसकर्मी थे। ​फिर भी डकैती को अंजाम दे डाला।

रूसी पारदी के परिजनों ने लगाए लापरवाही के आरोप

रूसी पारदी के परिजनों ने लगाए लापरवाही के आरोप

गुना जेल के अनुसार रूसी पारदी (35) पुत्र पेमड़ा पारदी निवासी खेजराचक 12 दिसंबर 2017 से गुना जेल में बंद था। गुरुवार तड़के करीब 3 बजकर 35 मिनट पर उसे दिल का दौरा पड़ा। डॉ. अनिल राजपूत ने प्राथमिक उपचार कर 3.45 बजे उसे एंबुलेंस से जिला अस्पताल भेजा, लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई। हालांकि रूसी पारदी के परिजनों ने गुना जेल प्रबंधन पर उसके इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। वहीं, जेल अधीक्षक दिलीप सिंह ने रूसी पारदी के इलाज में लापरवाही के आरोपों से इनकार किया है। सिंह की मानें तो मेडिकल बोर्ड से उसके शव का पोस्टमार्टम करवाया गया है,​ जिसकी वीडियोग्राफी भी की है।

 दो करोड़ के तो जला ही दिए थे नोट

दो करोड़ के तो जला ही दिए थे नोट

रूसी पारदी व उसकी गैंग इतनी शातिर थी कि चेन्नई एक्सप्रेस की विशेष बोगी के ऊपर से छेद कर 5 करोड़ 78 लाख रुपए लूट लिए थे। देश की इस सबसे बड़ी डकैती के तीन माह बाद 8 नवंबर को देश में नोटबंदी हो गई। ऐसे में पारदी गैंग ने 2 करोड़ रुपए के नोट तो जला ही दिए थे। शेष राशि का गैंग के सदस्यों ने बंटवारा कर संपत्ति खरीद ली थी। उस समय सीबी-सीआईडी ने प्रेस वार्ता में इसे देश की सबसे बड़ी ट्रेन डकैती बताया था।

 एक दिन पहले से जेल में मुलाकात

एक दिन पहले से जेल में मुलाकात

रूसी पारदी की पत्नी चंद्रकला ने बताया कि एक दिन पहले ही उसकी जेल में पति से मुलाकात हुई थी। उसने तबियत ठीक नहीं होने की बात कही थी। यह भी कहा था कि यहां खाना ठीक से नहीं दिया जा रहा है। जेल प्रशासन को कुछ कहते हैं तो वह ध्यान नहीं देता। गुरुवार के दिन उसे खाने में अंडा और चटनी ले जाना था। लेकिन इससे पहले मौत हो गई।

 मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम

मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम

अचानक सीने में दर्द हुआ। हमने डाक्टर राजपूत को भी बुलाया। यहां से अस्पताल लेकर गए। ईसीजी कराई, जहां उसकी मौत हो गई। मृतक ने हमे पहले बीमार होने की शिकायत नहीं की। परिजनों के आरोप बेबुनियाद हैं।

-दिलीप सिंह, जेलर जिला जेल गुना

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