MP में बजरंग दल मुद्दे पर अब 'पॉलिटिकल फ्लू'!, बैन न करने वाले दिग्विजय के बयान ने क्यों खींची बड़ी लकीर?
MP News: एमपी समेत देश के 5 राज्यों में अब विधानसभा चुनाव का मौसम हैं। उसके बाद लोकसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू होगी। कर्नाटक की जीत में कांग्रेस ने जिस 'बजरंग दल' को बैन करने की घोषणा को हथियार बनाया, अब दिग्विजय सिंह की उस पर नजर बदल सी गई हैं।
'मध्य प्रदेश में 'बजरंग दल' को बैन करने की घोषणा नहीं करेंगे' यह बयान देकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने नई सियासी हलचल पैदा कर दी हैं। कर्नाटक इलेक्शन के वक्त भी दिग्विजय सिंह बयानों के बाद ही हल्ला मचा था। ऐसे में दिग्विजय ने अपने मन से यह बयान दिया या फिर कहलवाया गया, अभी रहस्य हैं।
सियासत के जानकार कह रहे है कि हार्ड हिंदुत्व की ओर बढ़ती कांग्रेस के लिए 'करो या मरो' वाले चुनाव के वक्त वो सब कुछ मंजूर है, जिससे पार्टी हमेशा किनारा करती रही। ताकतवर बीजेपी से मुकाबले करने कांग्रेस अब अपनी नहीं, बल्कि बीजेपी की गेंद से अपनी ही पिच पर खेलने तैयार हैं। ऐसी लकीर खींच दी जाए, ताकि बीजेपी को उसकी गेंद से खेलने का मौका ही न मिले।

हाल फिलहाल ' बजरंग दल' को कभी हिन्दू आतंकवादी तो गांजा बेचने वालों का समूह बताने वाले दिग्विजय सिंह ने अपने बयान में इस संगठन के प्रति हमदर्दी भी दिखाई। खुलकर कहा कि संगठन में कुछ लोग अच्छे हैं। आने वाले चुनाव के मद्देनजर इस बयान के भी कई मायने निकाले जा रहे हैं। दिग्विजय, कमलनाथ के आगे खड़ा होना चाहते है, इस बात में ज्यादा दम इसलिए नहीं है, क्योकि उन्होंने कुछ महीने पहले मीडिया के सामने कहा था कि चुनाव में पार्टी का चेहरा 'कमलनाथ' ही होंगे।
वहीं मध्य प्रदेश, हिन्दू-मुस्लिम कार्ड की सियासत रमी हुई हैं। बीजेपी उज्जैन महाकाल लोक के बाद हर हिस्से में हिन्दुओं के चर्चित धार्मिक स्थलों को 'लोकमय' बनाने की घोषणा करती चली आ रही हैं। धर्म यात्राएं निकल रही हैं, बुजुर्गों को हवाई जहाज से तीर्थ यात्राएं भी कराई जा रही हैं। मंत्री, विधायकों के द्वारा धार्मिक कथाओं का जलसा सजाकर माहौल अपने पक्ष में बनाने की कोशिश हैं। यही वजह भी रही कि इस चुनाव में भी कांग्रेस का चेहरा पूर्व सीएम कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा में भी हनुमान कथा करा ली गई। आयोजक के तौर पर भले ही नाम सांसद पुत्र नकुल नाथ का हुआ, लेकिन पैटर्न बीजेपी जैसा ही अपनाया गया।
दिग्विजय सिंह के यूटर्न के पीछे सियासी पंडित दूसरी बड़ी वजह 'तुष्टिकरण' की राजनीति के लगने वाले आरोपों को भी बता रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 अगस्त के भाषण में भी यह शब्द शामिल रहा। ठीक उसके बाद सामने आए दिग्विजय सिंह के 'बजरंग दल' वाला बयान इशारा करता है कि कांग्रेस एमपी में चुनाव जीतने सब कुछ करने तैयार हैं। क्योकि इसके बाद लोकसभा चुनाव भी हैं। विपक्षी नए गठबंधन I.N.D.I.A में शामिल दलों के बीच भी कांग्रेस चाहेगी कि भविष्य में उसकी छवि किरकिरी वाली न रहे। क्योकि आगामी चुनाव के समीकारणों में कांग्रेस के लिए एक-एक वोट कीमती हैं। एमपी में गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी दिग्विजय सिंह के बयान पर चुटकी ली कि 'अब धीरे-धीरे आई फ्लू ठीक हो रहा हैं'। कुछ दिनों सारे जाले साफ हो जाएंगे।












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