एमपी: खाद न मिलने पर किसान धनपाल ने दी जान, पुलिस नोट में खुदकुशी की बात नहीं, डीएम ने कहा- वो किसान नहीं था
अशोक नगर, 30 अक्टूबर। खाद की कमी के संकट से जूझ रहे मध्य प्रदेश के किसान सहकारी संस्थाओं के बिक्री केंद्रों पर लंबी लाइनों में लग रहे हैं लेकिन उपलब्धता नहीं होने की वजह से उनको खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। संकट इस कदर गहरा हो गया है कि किसान अब विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और पुलिस की लाठी खा रहे हैं। प्रदेश के अशोक नगर जिले के ईशागढ़ थाना क्षेत्र के पिपरौल गांव के किसान धनपाल को जब खाद नहीं मिला तो गुरुवार की रात में उन्होंने सल्फास की गोलियां खाकर जान दे दी। धनपाल के परिजन तो यही कह रहे हैं लेकिन पुलिस और जिला प्रशासन इस बात को सिरे से नकार रहा है कि खाद की कमी की वजह से धनपाल ने खुदकुशी की या जहर खा लिया। पुलिस के मुताबिक, धनपाल के परिजनों ने जहर खाने के बारे में कुछ नहीं बताया है। वहीं अशोकनगर जिला प्रशासन ने धनपाल को किसान मानने से ही इनकार कर दिया। जिला प्रशासन के मुताबिक, धनपाल के नाम पर जमीन ही नहीं है, वह तो ड्राइवर का काम करता था और शराब पीने की लत का शिकार था।

पुलिस के प्रेस नोट में जहर खाने का जिक्र नहीं
धनपाल के परिवार के लोगों का कहना है कि उनके ऊपर कर्ज का बोझ था और खेतों में बुवाई के लिए खाद नहीं मिल पाने की वजह से वे परेशान थे। धनपाल पिछले दो सप्ताह से खाद बिक्री केंद्र के आगे लाइन में लग रहे थे लेकिन खाली हाथ लौटते थे। इंडियन एक्सप्रेस से धनपाल के भाई राजबीर यादव ने बताया कि गुरुवार को वो जहर लेकर आए और खा लिया। हमलोगों को तब जानकारी हुई जब उनका बेटा हमलोगों को बताने आया। हम सब उनको प्रखंड अस्पताल ले गए जहां उनको पानी चढ़ाया गया, फिर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। अशोक नगर पुलिस ने जो प्रेस नोट जारी किया है उसमें मृतक धनपाल के भाई शिशुपाल का जिक्र है। पुलिस का कहना है कि शिशुपाल ने अस्पताल में भाई धनपाल से बात की थी। धनपाल ने भाई से कहा था कि पेट में बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है। पुलिस के मुताबिक, जहर खाने की बात धनपाल ने भाई से नहीं कही थी। प्रेस नोट के मुताबिक, धनपाल की पत्नी ने पुलिस को सूचना दी थी कि दो दिन से उन्होंने खाना नहीं खाया था जिस वजह से वह बीमार हो गए थे। प्रेस नोट में लिखा है कि धनपाल ने पत्नी से खेती या खाद खरीदने को लेकर किसी बात का जिक्र नहीं किया था।

कलेक्टर ने कहा- धनपाल किसान नहीं, ड्राइवर था
अशोक नगर कलेक्टर आर उमामाहेश्वरी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि प्राथमिक रिपोर्ट से यह साबित नहीं हुआ है कि जहर की वजह से धनपाल की मौत हुई है, यह विसरा रिपोर्ट आने पर ही पता चल पाएगा। कलेक्टर ने यह कहा कि धनपाल के नाम पर जमीन ही नहीं है, वह तो ड्राइवर का काम करता था। कलेक्टर के इस दावे को धनपाल के भाई शिशुपाल ने खारिज कर दिया। शिशुपाल ने कहा कि पिता जिंदा हैं, उनके नाम पर ही जमीन है। सिर्फ तीन बीघा जमीन है जिस पर खेती के भरोसे किसका पेट पल सकता है, इसलिए घर चलाने के लिए हमलोग ड्राइविंग जैसा काम भी करते हैं। लेकिन यह भी सच है कि खाद के लिए हमलोग रोज लाइन में लग रहे हैं और कर्जदाता हमें परेशान कर रहे हैं। खाद नहीं मिली और खेत बोवाई के लिए तैयार नहीं हो पाई, जिस वजह से भाई धनपाल ने खुदकुशी करने जैसा कदम उठा लिया। पुलिस-प्रशासन के बयानों से दुखी धनपाल के भाई शिशुपाल ने कहा कि पुलिस इस मामले को भटका रही है। यहां भाजपा की सरकार है। पुलिस भी उनकी है। मोदी जी को बस वोट और नोट चाहिए। बाकी जिसका जो होता है, वो होता रहे।

एमपी में खाद के लिए हाहाकार
मध्य प्रदेश में सरसों और गेहूं जैसे रबी फसलों की बुवाई से पहले खाद की भारी किल्लत से किसान जूझ रहे हैं। अशोक नगर जिले में भी लाइनों में लगकर परेशान होने वाले किसान अब विरोध प्रदर्शन कर चक्का जाम कर रहे हैं। अशोकनगर के अलावा भिंड, मुरैना में भी किसान खाद के लिए लंबी लाइनों में लग रहे हैं। मुरैना जिले में पिछलो दिनों सहकारिता विभाग के बिक्री केंद्रों पर भगदड़ जैसे हालात बन गए। खाद के लिए लाइनों में लगे किसानों पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। 21 अक्टूबर को सिहोर जिले में किसानों ने तब विरोध प्रदर्शन किया जब कई दिनों तक लाइनों में लगकर इंतजार करने के बाद भी सरकारी बिक्री केंद्रों पर खाद देने से मना कर दिया गया।












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