कौन है सीहोर वाले पंडित प्रदीप मिश्रा और क्यों बरसाना में दण्डवत होकर मांगनी पड़ी माफी, जानिए पूरा मामला
Pandit Pradeep Mishra News: पंडित प्रदीप मिश्रा इन दिनों काफी सुर्खियों में है। दरअसल, उन्होंने कुछ दिन पहले अपनी कथा के दौरान राधा रानी को लेकर एक बयान दिया था जिसके बाद साधु संतों समेत अनेक महात्माओं ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। इसके बाद आज उन्होंने बरसाने पहुंच कर राधा रानी के सामने दंडवत होकर माफी मांगी।
प्रदीप मिश्रा ने क्यों मांगी माफी
कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने राधा-रानी के जन्म और विवाह से जुड़े अपने बयान पर माफी मांग ली। वे शनिवार की दोपहर बरसाना पहुंचे। राधा रानी मंदिर में नाक रगड़कर माफी मांगी। इसके बाद मंदिर से बाहर निकले। हाथ जोड़कर ब्रज वासियों का अभिनंदन किया।

मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, 'मैं ब्रजवासियों के प्रेम की वजह से यहां आया हूं। लाडली जी ने खुद ही इशारा कर मुझे यहां बुलाया। मेरी वाणी से किसी को ठेस पहुंची है, तो उसके लिए माफी मांगता हूं।' उन्होंने कहा, 'ब्रजवासियों के चरणों में दंडवत माफी मांगता हूं। मैं लाडली जी और बरसाना सरकार से क्षमा चाहता हूं। सभी से निवेदन है कि किसी के लिए कोई अपशब्द न कहें। राधे-राधे कहें, महादेव कहें। मैं सभी महंत, धर्माचार्य और आचार्य से माफी मांगता हूं।'

ब्रज में पंडित मिश्रा के खिलाफ था गुस्सा
बता दे पंडित प्रदीप मिश्रा ने 28 जून की रात अचानक दिल्ली की यात्रा की। उन्होंने 29 जून की सुबह दिल्ली पहुंचकर ब्रज धाम के कुछ संतों से चर्चा की। इसके बाद, वे सीधे 11 बजे बरसाना के राधा रानी के मंदिर पहुंचे। गोवर्धन के संतों ने उन्हें बताया कि ब्रज में उनके खिलाफ गुस्सा है और माफी मांगना ही समाधान है। इसके बाद पंडित मिश्रा ने फैसला किया कि वे बरसाना जाएंगे। उनके बरसाना पहुंचने से पहले राधा रानी के मंदिर में भारी सुरक्षा की व्यवस्था की गई। इसके बाद पंडित मिश्रा ने राधा रानी के मंदिर में पहुंचा।

क्या है पूरा मामला
बता दे पंडित प्रदीप मिश्रा ने 9 जून को कथा के दौरान कहा था कि राधा जी बरसाना की नहीं, रावल की थीं। पंडित प्रदीप मिश्रा ने 9 जून को ओंकारेश्वर में विवादित बयान दिया था। कथा के पहले दिन प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा था, 'राधा-रानी का नाम भगवान श्रीकृष्ण की 108 पटरानियों और 1600 रानियों में नहीं हैं। राधा के पति का नाम अनय घोष, उनकी सास का नाम जटिला और ननद का नाम कुटिला था। राधा जी का विवाह छाता में हुआ था।'

पंडित मिश्रा ने कहा था, 'राधा जी बरसाना की नहीं, रावल की रहने वाली थीं। बरसाना में तो राधा जी के पिता की कचहरी थी, जहां वह साल भर में एक बार आती थीं।' पंडित प्रदीप मिश्रा का ये प्रवचन वायरल हुआ तो संत, ब्रजधाम में लोगों ने विरोध किया। सबसे तल्ख टिप्पणी प्रेमानंद महाराज की तरफ से आई थी। उन्होंने कहा था कि 'लाड़ली जी के बारे में तुम्हें पता ही क्या है? तुम जानते ही क्या हो? अगर तुम किसी संत के चरण रजका पान करके बात करते तो तुम्हारे मुख से कभी ऐसी वाणी नहीं निकलती।'

कौन थे पंडित प्रदीप मिश्रा और कैसे बने कथा वाचक
पंडित प्रदीप मिश्रा के पिता का नाम स्व रामेश्वर मिश्रा था। वे ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे और चने का ठेला चलाते थे। बाद में उन्होंने चाय की दुकान खोल ली। पंडित प्रदीप मिश्रा ने अपने पिता के काम में मदद की और बड़ी मुश्किल हालत में अपनी बहन की शादी की।
पंडित मिश्रा को बचपन से ही भक्ति और भजन में रुचि थी, और वे अपने स्कूल के दिनों में ही भजन कीर्तन करते थे। बड़े होने पर उन्हें एक ब्राह्मण परिवार की गीता बाई पराशर ने कथा वाचक बनने के लिए प्रेरित किया। उन्हें इंदौर भेजा गया और वहां उन्होंने रु श्री विठलेश राय काका जी से दीक्षा ली और पुराणों का ज्ञान प्राप्त किया।
उन्होंने शिव मंदिर से शुरू में कथा वाचन की और फिर शिव मंदिर की सफाई करते थे। उन्होंने सीहोर में पहली बार कथावाचक के रूप में मंच संभाला और उनके कथा कार्यक्रम में 'एक लोटा जल समस्या का हल' बताया। इसके बाद उनकी कथाओं को लोगों ने सुनना शुरू किया और उन्हें 'सीहोर वाले बाबा' के नाम से भी जाना गया। उनके प्रवचन में शिवपुराण की कथाएं बहुत प्रसिद्ध हुईं और उन्होंने उसके उपाय भी बताए। वे यूट्यूब और फेसबुक पर लाखों फॉलोअर्स हैं।












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