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MP News: वेतन न मिलने से नाराज पंचायत सचिव उतरेंगे सड़कों पर, 7 दिन का सामूहिक अवकाश, सरकार को दिया अल्टीमेटम

MP News: मध्य प्रदेश की पंचायत व्यवस्था इन दिनों नए संकट की ओर बढ़ रही है। प्रदेश के करीब 23 हजार पंचायत सचिवों ने सरकार के खिलाफ बड़ा कदम उठाने का फैसला कर लिया है।

पंचायत सचिव संगठन ने चेतावनी दी है कि वे 26 मार्च से 1 अप्रैल तक सामूहिक अवकाश पर चले जाएंगे। अगर सरकार ने उनकी मांगे नहीं मानीं तो यह विरोध अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल जाएगा। सचिवों की नाराजगी का बड़ा कारण यह है कि उन्हें बीते तीन से चार महीने से वेतन नहीं मिला है।

Panchayat secretaries angry over non-payment of salaries will take to the streets 7 days mass leave

पंचायतों में रुक सकते हैं कामकाज

राज्य में पंचायत सचिवों के अवकाश पर जाने से गांवों के विकास कार्यों और प्रशासनिक गतिविधियों पर असर पड़ना तय है। ग्राम पंचायतों में शासकीय योजनाओं से लेकर जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, पेंशन से जुड़ी फाइलें और ग्रामीण विकास कार्य रुक सकते हैं।

सरकार से सात सूत्रीय मांगों का हल करने की अपील

मध्य प्रदेश पंचायत सचिव संगठन के अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने बताया कि सचिवों ने अपनी 7 सूत्रीय मांगों को लेकर पूरे प्रदेश में आंदोलन छेड़ने का मन बना लिया है। संगठन के 313 ब्लॉक और 52 जिलों के सचिव अपने-अपने मुख्यालयों पर कलेक्टरों को ज्ञापन सौंप रहे हैं। उन्होंने सरकार को 25 मार्च तक का अल्टीमेटम दिया है। अगर तब तक सरकार ने मांगें नहीं मानीं, तो 26 मार्च से 1 अप्रैल तक सामूहिक अवकाश रहेगा। इसके बाद भी समाधान नहीं हुआ तो सचिव अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।

क्या हैं पंचायत सचिवों की मुख्य मांगें?

  1. सचिवों को हर माह 1 तारीख को वेतन देने का आदेश जारी हो। फिलहाल सचिवों को 3-4 महीने तक वेतन के लिए इंतजार करना पड़ता है।
  2. मुख्यमंत्री की घोषणा और आदेश जारी होने के 20 महीने बाद भी सचिवों को समयमान वेतनमान का लाभ नहीं मिल पाया है।
  3. सचिवों को शासकीय कर्मचारियों की तरह सभी सुविधाएं दी जाएं।
  4. प्रदेश के 313 जनपद में से आधे से ज्यादा जनपदों में वेतन संकट बना रहता है। इसलिए बजट में सचिवों के वेतन का स्थाई प्रावधान हो।
  5. सचिवों के पांचवें और छठवें वेतनमान में सेवा की गणना उनकी नियुक्ति तिथि से की जाए।
  6. अनुकंपा नियुक्ति में शेष बचे पिछड़ा वर्ग और अन्य वंचित वर्गों की 100% नियुक्ति सुनिश्चित हो।
  7. सचिवों का संबंधित विभाग में संविलियन किया जाए।

संगठन का बड़ा आरोप

संगठन के अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा, "जब प्रदेश की ग्राम पंचायतें सचिवों के भरोसे चल रही हैं, तो सरकार हमें बेसिक सुविधाओं से क्यों वंचित कर रही है? महीनों तक वेतन न मिलना और पदोन्नति से जुड़े लाभ न देना सचिवों का मनोबल तोड़ रहा है।"

आगे बढ़ सकता है आंदोलन

संगठन ने संकेत दिया है कि यदि सरकार ने 7 दिन में कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो आंदोलन बड़ा रूप ले सकता है। इसका सीधा असर पंचायत व्यवस्था और ग्रामीण जनता पर होगा।

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