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राजसी परंपराओं के साथ निकली बारात, दूल्हा बन जानकी को ब्याहने निकले श्रीरामराजा सरकार

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Orchha विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी, भगवान श्रीरामराजा की राजधानी ओरछा श्री पंचमी पर सियाराम के भजनों से गूंज रही थी। यहां की गली-गली में भगवान राम के विवाह के गीत गूंज रहे थे। सोमवार को यहां श्रीराम-जानकी विवाह का आयोजन किया गया। रात साढ़े आठ बजे से मंदिर से भगवान श्रीराम की बुंदेली भजन मंडलियों, वाद्ययंत्रों के साथ बारात निकाली गई। बारात का ओरछा के हर घर के बाहर स्वागत कर भगवान की आरती उतारी गई। बारात जानकी मंदिर पहुंची जहां मंदिर कमेटी ने भव्य और जोरदार तरीके से बारात का स्वागत किया।

विवाह के मांगलिक गीतों से गूंज रही ओरछा नगरी

विवाह के मांगलिक गीतों से गूंज रही ओरछा नगरी

ओरछा बुन्देलखण्ड की अयोध्या के नाम से विश्व विख्यात पवित्र, पावन, पर्यटन एवं धार्मिक नगरी ओरछा धाम में श्रीराम-जानकी विवाह महोत्सव हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी बड़े ही हर्षोउल्लास से मनाया गया। इस चार दिवसीय विवाह महोत्सव के अवसर पर नगर में चहुंओर खुशियाँ छाई हुई हैं। पूरे ओरछा में मांगलिक बन्ना बन्नी के गीत बने दूल्हा छवि देखो प्रभु श्रीराम की दुल्हन बनी सिया जानकी की, हरे बांस मण्डप छाए सियाजी को राम ब्याहन आए, आदि से गूंज रहे हैं।

ओरछा पहुंचे लाखों श्रृद्धालु, गली-गली को भव्य तरीके से सजाया गया

ओरछा पहुंचे लाखों श्रृद्धालु, गली-गली को भव्य तरीके से सजाया गया

ओरछा की हर गली एवं प्राचीन स्मारकों को बेहद ही आकर्षक लाईटिंग, झण्डे, रंगोली इत्यादि साज-सज्जा के सामान से दुल्हन की तरह सजाया सवारा गया है। जगह-जगह तोरण द्वार एवं प्रभु श्रीराम के चारित्रिक बैनर लगाए गए है। नगर में लगी आकर्षक लाइटिंग से सारा नगर दिवाली के की तरह चमक रहा हैं। परम्परागत चार दिवसीय श्रीराम जानकी महोत्सव के तीसरे दिन सोमवार को प्रभु श्रीरामराजा सरकार का दरबार श्रद्धालुओं के लिए दोपहर 12 बजे खोला गया और दोपहर 2 बजे बन्द कर दिया गया था तत्पश्चात बारात की तैयारियां प्रारम्भ की गई।

मन्दिर से बाहर निकलते पुलिस बल ने श्रीराजाराम को दी सलामी

मन्दिर से बाहर निकलते पुलिस बल ने श्रीराजाराम को दी सलामी

श्रीरामराजा सरकार की बारात सायं 7 बजे की आरती प्रारम्भ होने के पूर्व दूल्हा बने प्रभु श्रीराम की पालकी को राजसी ठाटबाट के साथ ढोल-नगाड़ों, गाजेबाजों एवं अन्य साज सज्जा के साथ निवाड़ी विधायक अनिल जैन, जिला कलेक्टर तरुण भटनागर, पुलिस अधीक्षक तुषारकान्त विद्यार्थी सहित प्रशासनिक अधिकारी व मंदिर कमेटी के सदस्य श्रीरामराजा की पालकी को कन्धों पर लेकर मन्दिर के बाहर निकलें। यहां सशस्त्र पुलिस बल की टुकड़ी ने भगवान को सलामी दी। वरयात्रा के दौरान प्रभु श्रीराम अपने छोटे भाई लक्ष्मणजी के साथ पालकी में विराजमान होकर नगर के प्राचीन प्रमुख मार्गों प्राचीन जनक भवन के जानकी-जू मन्दिर पहुंचे। यहां परम्परानुसार बुन्देली रीति रिवाजों मंत्रोच्चार के साथ दूल्हा सरकार का तिलककर बारात की आगवानी की।

जानकी जू मन्दिर में बारात का फूलों की वर्षा से स्वागत

जानकी जू मन्दिर में बारात का फूलों की वर्षा से स्वागत

बारात जब जानकी जू मन्दिर पहुंची तो यहां पर पुष्प वर्षा एवं 51 किलो देशी घी के लड्डुओं का वितरण किया गया। यहां धार्मिक विधि से पूजन के बाद बारात श्रीरामराजा मन्दिर वापस पहुंची, इसके बाद वैदिक रीति-रिवाजों मन्त्रोच्चार के साथ विवाह की अन्य सभी रस्में सम्पन्न कराई गईं। चार दिवसीय विवाह महोत्सव के चौथे दिन मंगलवार को 12 बजे कुंवर कलेवा का आयोजन किया जाएगा।

प्रभु श्रीराम दूल्हा स्वरूप भक्तों को देते है दर्शन

प्रभु श्रीराम दूल्हा स्वरूप भक्तों को देते है दर्शन

ओरछा में यही एक अवसर होता है जब प्रभु श्रीराम मन्दिर से बाहर निकलकर अपने भक्तों को दूल्हा स्वरूप दर्शन देते हैं। शहर के हर द्वार पर मांगलिक गायन कर प्रभु श्रीराम का तिलक करते है। शुभ विवाह पंचमी के अवसर पर श्रीराम जानकी विवाह महोत्सव को देखने एवं बारात में शामिल होने के लिए बुन्देलखण्ड अंचल से लाखों की संख्या में श्रद्धालु ओरछा आते हैं।

मन्दिर प्रांगण में हुआ रामलीला का मंचन

मन्दिर प्रांगण में हुआ रामलीला का मंचन

श्रीराम जानकी विवाह महोत्सव के दौरान रात्रि के समय मन्दिर प्रांगण में श्रीरामराजा सेवादल समिति के सचिव जगदीश तिवारी के निर्देशन में उत्तरप्रदेश के ख्याति प्राप्त कलाकारों द्वारा धनुष यज्ञ की लीला का आकर्षक मंचन किया गया। यहां रामलीला विगत 41 वर्षों से निरन्तर चल रही है।

श्रीराम विवाहः श्रीरामराजा को हल्दी चढ़ाई, पंगत होगी, श्रीपंचमी पर निकलेगी सरकार की बारातश्रीराम विवाहः श्रीरामराजा को हल्दी चढ़ाई, पंगत होगी, श्रीपंचमी पर निकलेगी सरकार की बारात

Comments
English summary
On Sripanchami, a procession of Shriramraja Sarkar was taken out in Orchha, which is called Ayodhya of Bundelkhand. The procession had reached Janaki temple with Bundeli tradition and music. Here, for the last five days, all the religious customs and rituals of marriage are being completed.
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