श्रीराम विवाहः श्रीरामराजा को हल्दी चढ़ाई, पंगत होगी, श्रीपंचमी पर निकलेगी सरकार की बारात
Sri Ramaraja Sarkar Orchha देश में भगवान श्रीरामराजा सरकार की एकमात्र राजधानी ओरछा में भगवान श्रीराम-जानकी विवाह की तैयारियां चल रही हैं। रविवार को श्रीरामराजा मंदिर में भगवान को हल्दी की रस्म निभाई गई। शाम को विवाह की पंगत का आयोजन होगा। श्रीपंचमी पर सोमवार शाम को भगवान श्रीराम दूल्हा बनकर बारात लेकर जानकी माता को ब्याहने जानकी मंदिर जाएंगे।

ओरछा में भगवान श्रीराम के विवाह की तैयारियां, दुल्हन की तरह सज गया मंदिर
ओरछा में भगवान श्रीराम के विवाह की तैयारियां व पूरे उत्साह के साथ चल रही हैं। रविवार को मंदिर दुल्हन की तरह सज गया है। बाहर मुख्य मार्ग से लेकर मंदिर के अंदर तक आकर्षक तरीके से सजाया गया है। मंदिर परिसर के बीचों-बीच मंडप सजाया गया है। रविवार को भगवान श्रीराम को हल्दी की रस्म निभाई गई। मंदिर में शाम को विवाह की पंगत का भव्य तरीके से आयोजन किया जाएगा। दोपहर में यहां भोजन प्रसादी तैयार करने में हलवाई जुटे हुए थे।

ओरछा में तीन दिन भगवान को नहीं लगता श्रद्धालुओं का राजभोग
ओरछा में श्रीराम विवाह पर एक परंपरा है। यहां 3 दिन तक भगवान को यहां आने वाले श्रृद्धालुओं की तरफ से राजभोग नहीं लगता है। यहां आने वाला हर भक्त और व्यक्ति ओरछा में श्रीरामराजा सरकार का मेहमान होता है। देशभर से लोग यहां आमंत्रित होते हैं। यह राजशाही परंपरा यहां सदियों से चली आ रही है। श्रीराम विवाह के दौरान यहां धर्म, संस्कृति और परंपराओं का प्राचीन व अनूठा संगम देखने को मिलेगा।

110 हवाई 250 क्विंटल सामग्री का भोग बनाएंगे
श्रीरामराजा सरकार व जानकी माता के विवाह की पंगत के लिए मंदिर पसिर में प्रशासन की देखरेख में रसोई तैयार होती है। यहां पर करीब 110 हलवाई राम विवाह की रसोई तैयार करते हैं। इसमें 250 क्विंटल खाद्य सामग्री से रसोई तैयार होती है। रविवार को यहां विवाह की पंगत का आयोजन किया जाएगा। इसमें बुंदेलखंड के विशेष व्यंजन परोसे जाते हैं।

साल में केवल एक बार रात 2 बजे तक होंगे दर्शन
श्रीरामराजा मंदिर में पूरी राजकीय परंपरा का निर्वहन किया जाता है। रात 9 बजे राजदरबार के पट बंद कर दिए जाते हैं। साल में केवल एक दिन ही रात 2 बजे तक भगवान के राजमंदिर के पट खुले रहते हैं। यह मौका होता है उनके विवाह व श्रीराम बारात का। इस दिन भगवान राजमंदिर में 2 बजे रात तक दर्शन देते हैं। 29 नवंबर को मंदिर परिसर में भगवान का कुंवर कलेवा की रस्में होंगी












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