OPINION: जैविक खेती में बुलंदियों पर मप्र, देश में बना नंबर वन, 17.31 लाख हेक्टेयर में सबसे ज्यादा उत्पादन
Opinion: मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने अपने कार्यकाल में प्रदेश को कृषि के मामले में समृद्ध बनाने के लिए कई योजनाओं को प्रारंभ किया था। इसमें प्राकृतिक खेती और जैविक खेती भी प्रमुखता से शामिल थे। बीते 20 सालों में मप्र जैविक खेती और प्राकृतिक खेती के मामले में देश में पहले पायदान पर आ गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 17 लाख 31 हजार हेक्टेयार में जैविक तो 7.5 लाख हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती हो रही है।

शिवराज सिंह चौहान सरकार किसानों की समृद्धि और खुशहाली के लिए काम कर रही है। योजनाओं का सकारात्मक परिणाम जमीन पर दिख रहा है। सभी के समन्वित प्रयासों का सुखद परिणाम है कि आज प्रदेश जैविक खेती में सिरमौर है। इससे प्रदेशवासियों को हेल्दी फूड मिल रहा है। प्रदेश में जैविक खेती का कुल क्षेत्र लगभग 16 लाख 37 हजार हेक्टेयर है, जोकि देश में सर्वाधिक है। जैविक उत्पाद का उत्पादन 14 लाख 2 हजार मीट्रिक टन रहा, जो क्षेत्रफल की भांति ही देश में सर्वाधिक है। मध्यप्रदेश में कुल 17 लाख 31 हजार हेक्टेयर क्षेत्र जैविक हैं। जिसमें 16 लाख 38 हजार एपीडा से और 93 हजार हेक्टेयर क्षेत्र, पी.जी.एस. से पंजीकृत हैं।
नर्मदा के किनारों पर प्राकृतिक खेती होगी
प्राकृतिक खेती में भी प्रदेश नंबर 1 बनने जा रहा है। सरकार की योजना के तहत नर्मदा नदी के दोनों किनारों पर पांच-पांच किलोमीटर के दायरे में प्राकृतिक खेती का निर्णय लिया गया है। इसके लिए सरकार ने बाकायदा अलग से योजना बनाकर पोर्टल पर किसानों के पंजीयन कराए हैं। इसमें 59,071 किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराए हैं। सरकार की योजना है कि 7.50 लाख हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती कराई जाए।
जैविक को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में उठाए जा रहे कदम
प्रदेश ने पिछले वित्त वर्ष (2020-21) में 2683 करोड़ मूल्य के पांच लाख मीट्रिक टन से ज्यादा के जैविक उत्पाद निर्यात किए। प्रदेश में जैविक वनोपज भी ली जा रही है। प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में जैविक खेती को शामिल करने की योजना भी है।
- राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2011 में जैविक नीति तैयार की गई थी। वर्ष 2015 में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में परंपरागत कृषि विकास योजना लागू की गई एवं योजनांतर्गत 880, 500 क्लस्टर एवं 2448 समूह का क्रियान्वयन किया गया। वर्तमान में भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा जैविक खेती के क्षेत्र में अनेक उपलब्धियां अर्जित की गई हैं।
- जैविक खेती के प्रोत्साहन स्वरूप मध्यप्रदेश में कुल 24.636 लाख हेक्टेयर जैविक प्रमाणिक क्षेत्र हैं।
- इस 24.636 लाख हेक्टेयर में से 23.706 लाख हेक्टेयर जैविक क्षेत्र एपीडा के अंतर्गत पंजीकृत हैं, जबकि शेष 0.93 लाख हेक्टेयर जैविक क्षेत्र पी.जी.एस. के अंतर्गत पंजीकृत हैं, जो कि देश का सर्वाधिक है। साथ ही जैविक उत्पादों की निर्यात में भी प्रदेश में वर्ष 2021-22 में 176,385.91 मीट्रिक टन जैविक उत्पाद विश्वभर में निर्यात किए गए हैं। प्रदेश जैविक कपास उत्पादन के क्षेत्र में विश्व के अग्रणी क्षेत्रों में से एक है। प्रमाणिक जैविक क्षेत्र के अतिरिक्त प्रदेश में जैविक वनोपज भी किया जा रहा है, जिसका प्रमाणीकरण नहीं है।
- परंपरागत कृषि विकास योजनांतर्गत वर्ष 2015-16 से वर्ष 2022- 23 तक प्रदेश में कुल 3888 जैविक क्लस्टर तैयार किए जा चुके हैं। • पर परंपरागत कृषि विकास योजनांतर्गत अभी तक लगभग 115960 से अधिक किसानों का पंजीयन योजनांतर्गत किया जा चुका है। 74221 किसानों को पीजीएस प्रमाण-पत्र जारी किए जा चुके हैं।
- प्रदेश के 8 आकांक्षी जिलों में परंपरागत कृषि विकास योजना अंतर्गत 40 समूह (प्रति समूह 20 हेक्टेयर) प्रदाय किए गए हैं।












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