Nag Pachami: क्या सांप पीते हैं दूध?, एक्सपर्ट, सपेरे और पुजारी ने बताई चौंकाने वाली सच्चाई
Nag Panchami का पर्व देशभर में भक्तिभाव के साथ मनाया जा रहा है, जहां इस दिन लोग नाग देवता का पूजन करते हैं। वहीं इस दिन सपेरे नाग लेकर घर-घर पहुंचते हैं, जहां लोग नाग को दूध पिलाने के साथ ही हल्दी-कुमकुम लगाकर पूजन करते हैं।
आमतौर पर ऐसा माना जाता है की सांप दूध पीता है, लेकिन एनिमल एक्सपर्ट इसे गलत बताते हैं, वहीं धर्माचार्य भी इस विषय पर अपनी जो राय रखते हैं उसमें प्रत्यिकात्मक नाग पूजन का उल्लेख है। इतना ही नहीं खुद सपेरे भी इस बात को मानते हैं की दूध पीने के बाद सांप ज्यादा दिन तक जीवित नहीं रह पाते।

एनिमल एक्सपर्ट और चिड़ियाघर प्रभारी डॉ. उत्तम यादव बताते हैं की, हिंदू परंपरा में सांपों का बहुत महत्व है, सांप को हमने देवता भी माना है, इसलिए पूजा भी की जाती है। नाग पंचमी का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, ताकि जनता को अवेयर किया जा सके, सांपों के बारे में जानकारी दी जा सके, लेकिन होता उल्टा है, क्योंकि सांप को देवता मानकर पूजा की जाती है।
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डॉ. उत्तम यादव की माने तो पूजा करने के साथ-साथ उसे दूध पिलाया जाता है, जो की बहुत गलत है। सांप कभी दूध नहीं पीता, जब सांप दूध नहीं पीता, फिर भी यदि हम उसे जबरदस्ती दूध देते हैं, तो कई बार वह सांस लेने के साथ-साथ दूध उनके फेफड़ों में चल जाता है। इसके बाद उन्हें निमोनिया हो जाता है, और उनकी मौत हो जाती है।

चिड़ियाघर में काम करने वाले सपेरे गब्बर नाथ ने बताया की, नाग पंचमी का पर्व सदियों से मनाया जा रहा है, इस दिन सांप की पूजा होती है, दूध के छींटे लगा दिए जाएं ,क्योंकि सांप दूध नहीं पीता। यदि सांप दूध पिएगा, तो वह शाम तक मर जाएगा। दूध पीने के बाद सांप जीवित नहीं रह पाएगा। सपेरे जब नाग पंचमी पर सांप पकड़ कर लाते हैं, तो वह सबसे पहले उन्हें जंगल में तलाश करते हैं, पकड़ने के बाद सबसे पहले उसका दांत तोड़ते हैं, फिर उसका जहर निकाला जाता है। जहर निकालने के बाद 8 से 15 दिन तक घर में रखा जाता है, उन्हें हाथों से खिलाते हैं, फिर जब नाग पंचमी आती है, तो वह फेरी पर निकलते हैं। दूध तो सपेरे भी सांप को नहीं पिलाते। सपेरे हमेशा दूध पिलाने का मना करते हैं, सिर्फ पूजा की जाती है, और छींटे लगाए जाते हैं।

नाग मंदिर के पुजारी श्याम शर्मा बताते हैं की, धार्मिक मान्यता हैं कि, जो दुग्ध धारा है, उससे अभिषेक किया जाता है। नियमित भोग के लिए कटोरी में दूध रखा जाता है। नाग देवता आकर सिर्फ स्पर्श करके उसे चले जाते हैं। यह शुरू से जो हिंदू धर्म में मान्यता चली आ रही है। वह हम करते आ रहे हैं। मंदिर में भी रोज सुबह शाम चांदी की कटोरी में नाग देवता को दुग्ध अर्पित किया जाता है। नाग देवता दूध पीते हैं, या नहीं, इसके पीछे का रहस्य फिलहाल हम नहीं बता पाएंगे। प्रतीकात्मक तौर पर जो उनका पूजन किया जाता है, जो हम शीला के रूप में करते हैं, इस पर ही यदि हम करें या धातु की मूर्ति जैसे तांबा, पीतल, चांदी इत्यादि उन पर करें तो ज्यादा अच्छा है। साक्षात नाग देवता पर कंकू, चावल इत्यादि नहीं चढ़ाना चाहिए, उससे उनकी त्वचा को नुकसान पहुंचता है।
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