MP-UP पानी बंटवारा विवाद जल्द हो सकता है खत्म, शिवराज के साथ बैठक के बाद केद्रीय मंत्री शेखावत ने दिए संकेत

भोपाल। Madhya pradesh and uttar pradesh Water dispute उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच केन-बेतवा लिंक परियोजना के कारण उपजे विवाद का जल्द निपटारा हो सकता है। दोनों राज्यों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर 15 साल से जारी विवाद पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने जल्द अच्छी खबर देने की बात कही है। दरअसल, शेखावत ने शनिवार को इस मसले पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ बैठक की ताकि दोनों राज्य किसी सहमति पर पहुंच सकें।

Shivraj Singh Chouhan

मध्य प्रदेश सरकार ने रखा अपना पक्ष

इस बैठक में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अलावा जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट भी मौजूद रहे। प्राप्त जानकारी के अनुसार बैठक के दौरान एमपी सीएम ने अपना पक्ष मजूबती से रखा। बैठक में शिवराज ने कहा कि इस परियोजना से मध्यप्रदेश 700 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) पानी उत्तर प्रदेश को देने तैयार है। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों में आपसी सहमति बनते ही शीघ्रता से इस परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा।

यूपी के रबी फसलों को मिल सकता है इतना पानी

वहीं, मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मप्र के यूपी को रबी फसलों के लिए 930 एमसीएम देने के कई पहलुओं पर सहमति बन गई है। हालांकि, एमपी इस परियोजना से कितना पानी देगा इसका अंतिम फैसला 2005 और 2017 में लिए गए निर्णय के आधार पर किया जा सकता है।

केंद्र सरकार लेंगी अंतिम निर्णय

इस बैठक के बाद शेखावत ने अपने बयान में कहा, 'केंद्र सरकार दोनों राज्यों को समान रूप से देखकर वही फैसला लेगी जो किसानों के हित में हो। हम समझौते तक पहुंच गए हैं, जल्दी ही इस विषय में शुभ समाचार देंगे।' आपको बता दें कि केंद्र सरकार दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करके पानी की जरूरत का आकलन कर रही है। रविवार को एमपी सीएम से पहले यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ भी एक दौर की बैठक हो चुकी है। अब जल्द ही दोनों राज्यों के साथ बैठक करके केंद्र सरकार इसपर अपना अंतिम निर्णय सुनाएगी। केंद्रीय मंत्री ने मार्च-अप्रैल में इस परियोजना को शुरू करने की उम्मीद जताई है।

क्या है विवाद की वजह?

गौरतलब है कि इस परियोजना पर पिछले 15 साल से विवाद है। कई बार वार्ताएं हुईं जो बेनतीजा रहीं। साल 2005 में उत्तर प्रदेश को रबी फसल के लिए 547 एमसीएम और खरीफ फसल के लिए 1153 एमसीएम पानी देने का निर्णय हुआ था। बाद में वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश को रबी फसल के लिए 700 एमसीएम पानी देने पर भी सहमति बनी और केंद्र सरकार ने यूपी को 788 एमसीएम पानी देना तय भी कर दिया था। लेकिन, विवाद तब हुआ जब यूपी सरकार ने जुलाई 2019 में 930 एमसीएम पानी मांगा, जिसे मध्य प्रदेश ने इंकार कर दिया था। एमपी का कहना था कि पहले से निर्धारित मात्रा से ज्यादा पानी देने पर मध्य प्रदेश में 4.47 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की मुश्किलें आएंगी। मध्य प्रदेश के संबंधित विभाग का कहना है कि परियोजना में जंगल, जमीन और वन्यप्राणियों के लिए रहवास क्षेत्र का नुकसान हमारे राज्य को वहन करना है। इसके मद्देनजर पानी की ज्‍यादा मात्रा पर एमपी का हक है।

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