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Sagar: मुकेश की आंखें जिंदगी के बाद भी दुनिया को निहारेंगी, जाते वक्त किया यह पुण्य का काम

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सागर, 1 अक्टूबर। मप्र के सागर निवासी 45 वर्षीय मुकेश यादव अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन वे जिंदगी के बाद भी अपनी आंखों से दूसरे शरीर में इस खूबसूरत दुनिया को निहारते रहेंगे। उन्होंने अपनी मृत्यु के पूर्व परिजन से नेत्रदान करने की इच्छा बताई थी। मुकेश कैंसर से पीड़ित थे। उनके भाई व रेलवे स्टेशन मास्टर अनिल यादव ने अपने छोटे भाई की अंतिम इच्छा का सम्मान किया और बीएमसी के नेत्ररोग विभाग के एचओडी डॉ. प्रवीण खरे से संपर्क कर मुकेश की आंखें दान की हैं। मुकेश के परिजन सहित समाज के लोगों ने भी इससे प्रेरणा लेकर नेत्रदान का संकल्प ले लिया है।

मुकेश यादव नेत्रदान

बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के मीडिया प्रभारी डॉ. उमेश पटेल ने जानकारी देते हुए बताया कि सागर में खुरई मार्ग स्थित सिलेरा गांव निवासी व रतौना रेलवे स्टेशन मास्टर अनिल यादव के छोटे भाई मुकेश यादव 45 साल का कैंसर के चलते निधन हो गया था। मुकेश जाते-जाते अपने परिजन से उनकी आंखें दान करने की अंतिम इच्छा बता गए थे। अनिल यादव ने सभी परिजन से सहमति बनाकर मुकेश के नेत्रदान करने का फैसला लिया और बीएमसी प्रबंधन से संपर्क किया था। अनिल यादव की बात बीएमसी में ऑप्थेलमोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. प्रवीण खरे से कराई गई। इसके बाद बीएमसी की टीम मुकेश के घर पहुंची और पूरी सतर्कता के साथ आंखों का कार्निया निकालकर उसे एमके मीडिया लिक्विड में सुरक्षित कर लिया है। डॉ. प्रवीण खरे के अनुसार फोन पर नेत्रदान की सूचना मिलते ही नेत्र रोग के डॉ. रजनीश सिंह, डॉ. विमलेश ओझा, डॉ. रंजीत, डॉ. शशि लखरे को लेकर वे मृतक मुकेश के घर पहुंचे थे और कॉर्निया निकालकर सुरक्षित कर लिया। नेत्रदान करने वाले व्यक्ति का पूरा मेडिकल रिकॉर्ड ले लिया गया है।

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दानदाता की कोरोना सहित ब्लड की तमाम जांचे कराई जाएंगी
नेत्रदान करने वाले व्यक्ति के शरीर से ब्लड सहित विभिन्न जांचों के लिए सैंपल लिए जाते हैं। इसमें कोविड व खून सहित अन्य जांचें कराई जा रही हैं। ताकि जब ये कार्निया दूसरे मरीज को ट्रांसप्लांट किया जाए तो कोई संशय न रहे और ट्रांसप्लांट सफल रहे। मृतक मुकेश की सभी रिपोर्ट सही पाए जाने के बाद कॉर्निया को जरूरतमंद व्यक्तियों को ट्रांसप्लांट करने के लिए भोपाल के गांधी मेडिकल भेजा जाएगा। इसमें सागर व बुंदेलखंड क्षेत्र के लोगों को प्राथमिकता में रखा जाएगा।

आईबैंक बनने के बाद बीएमसी में यह दूसरा नेत्रदान है
बीएमसी में करीब दो साल पहले आईबैंक की स्थापना हुई थी। नेत्ररोग विभाग के एचओडी डॉ. प्रवीण खरे के नेतृत्व में इसे प्रारंभ किया गया था। करीब एक साल पहले बीएमसी में शहर का पहला नेत्रदान 1 अक्टूबर 2021 को विजय टॉकीज निवासी 85 वर्षीय वृद्धा श्यामा बाई जैन ने किया था। उनकी आंखों को दो जरुरतमंद व्यक्तियों को ट्रांसप्लांट किया गया था, जो सफल हुआ था। विभागाध्यक्ष डॉण् खरे ने सभी क्षेत्रवासियों से नेत्रदान के महत्व को समझने और इस मामले में जागरुक बनने का आह्वान किया है।

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English summary
Mukesh Yadav, a resident of Silera village in Sagar, left the world at the age of 45 due to cancer. They donated their eyes as they went. Two needy lives facing the brunt of darkness in the world will be illuminated by Mukesh's eyes. Mukesh will also continue to look at the beautiful world with his eyes in another body.
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