MP News: ग्वालियर में उजागर हुई हाई-टेक ठगी, सब्जी बेचने वाले के खाते में कैसे हुए 30 लाख के ट्रांजैक्शन
Gwalior news: जिसे सब्ज़ी का ठेला खींचते देख हर कोई उसकी मेहनत को सलाम करता था, वो खुद नहीं जानता था कि उसके नाम पर देश की सबसे बड़ी डिजिटल ठगियों में से एक को अंजाम दिया जा रहा है।
नाम है राहुल काहर, उम्र करीब 34 साल, नागदा के एक मोहल्ले में सुबह से शाम तक सब्ज़ी बेचकर दिन काटता है। लेकिन ग्वालियर पुलिस की साइबर सेल जब उसके पास पहुंची तो वह सन्न रह गया। वजह? उसके नाम पर चल रहे बैंक खाते से 30 लाख रुपए से ज्यादा का लेन-देन हो चुका था - और उसे खुद इसकी भनक तक नहीं थी।

ये मामला सिर्फ एक ठेले वाले तक सीमित नहीं था। जब जांच की परतें खुलने लगीं, तो पता चला कि यह तो एक अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह की साजिश है, जिसमें बैंक कर्मचारी, टेक्निकल एक्सपर्ट और सोशल मीडिया के जरिए ठगी करने वाले शातिर खिलाड़ी शामिल हैं। पूरे मामले में अब तक ₹3.24 करोड़ की धोखाधड़ी सामने आ चुकी है - और यह आंकड़ा अभी और भी बढ़ सकता है।
कैसे हुआ खुलासा: एक ट्रांजैक्शन से खुला बड़ा जाल
ग्वालियर पुलिस के पास जब रामकृष्ण मिशन आश्रम से संबंधित एक ऑनलाइन ठगी की शिकायत आई, तो साइबर टीम ने ट्रांजैक्शन को ट्रेस किया। ₹10 लाख की एक बड़ी रकम नागदा की बंधन बैंक शाखा में ट्रांसफर की गई थी। शुरुआती जांच में तो ये बस एक ट्रांजैक्शन लग रही थी, लेकिन जब बैंक खाते की डीटेल्स सामने आईं, तो कहानी ने रौंगटे खड़े कर दिए।
खाता था राहुल काहर के नाम पर - एक ऐसा व्यक्ति जो बैंक की भाषा तक नहीं समझता, पासबुक क्या होती है ये नहीं जानता और ATM कार्ड कभी हाथ में पकड़ा तक नहीं।
MP News: ठगों का तरीका: 'खाते किराए पर' लेने की साजिश
बंधन बैंक, नागदा शाखा के असिस्टेंट मैनेजर और महिला कैशियर ने अपने क्षेत्र में रहने वाले गरीब, अनपढ़ और जरूरतमंद लोगों को निशाना बनाया। उन्हें 1,000 रुपए का लालच दिया गया। फिर उनके नाम पर फर्जी तरीके से खाते खुलवाए गए। पासबुक और एटीएम कार्ड उनके हाथ में नहीं दिए गए - बैंककर्मियों ने उन्हें खुद अपने पास रख लिया।
इन खातों को फिर 'किराए पर' दे दिया गया साइबर ठगों को, जो किसी भी ऑनलाइन स्कैम, जैसे कि केवाईसी अपडेट, इंश्योरेंस, इनाम, नौकरी दिलाने, या UPI फ्रॉड के जरिए लोगों से पैसे लूटते और तुरंत इन फर्जी खातों में ट्रांसफर करवा देते। जैसे ही रकम आती, बैंककर्मी खुद जाकर उसे ATM से निकाल लेते या किसी और खाते में ट्रांसफर कर देते, ताकि पैसा ट्रेस न हो सके।
MP News: पुलिस की छापेमारी और गिरफ्तारियां
ग्वालियर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उज्जैन, नागदा और रतलाम में तीन दिन तक सघन छापेमारी की। इस दौरान गिरोह के 6 सदस्य गिरफ्तार किए गए - जिनमें बैंक के दो कर्मचारी भी शामिल हैं। उनके पास से पासबुक, ATM कार्ड, फर्जी दस्तावेज, मोबाइल फोन और 1.2 लाख रुपए नकद बरामद किए गए हैं।
ग्वालियर एसएसपी धर्मवीर सिंह ने बताया कि यह अब तक की सबसे संगठित और गहरी साइबर ठगी का मामला है, जिसमें बैंक के अंदरूनी लोग ही फ्रॉड को बढ़ावा दे रहे थे।
राहुल की कहानी: अनजाने में बन गया करोड़ों के खेल का मोहरा
जब पुलिस राहुल काहर के पास पहुंची और बताया कि उसके खाते से करोड़ों का लेन-देन हो चुका है, तो पहले तो वह घबरा गया। उसने कहा: "मैं तो सिर्फ सब्ज़ी बेचता हूं साहब। बैंक वाला आया था, कहा अकाउंट खुलवा लेते हैं, हर महीने 1000 रुपए देंगे। मैंने सोचा, चलो ठीक है। पासबुक-एटीएम भी नहीं दिया। फिर कभी बात नहीं हुई।"
राहुल जैसे कई गरीब लोग इस साजिश का शिकार बने हैं। शुरुआती जांच में तीन और ऐसे खाते मिले हैं जिनके असली खाताधारकों को कोई जानकारी नहीं थी, लेकिन उनसे करोड़ों की ट्रांजैक्शन हो चुकी है।
सवाल जो अब जवाब मांगते हैं
- बैंक में बिना ग्राहक की सहमति और जानकारी के कैसे ट्रांजैक्शन होते रहे?
- पासबुक और एटीएम कार्ड बैंक स्टाफ के पास कैसे रहे?
- इतने बड़े अमाउंट की ट्रांजैक्शन पर कोई अलर्ट या निगरानी क्यों नहीं हुई?
बड़ा खतरा: आपकी पहचान आपके खिलाफ इस्तेमाल हो सकती है
इस मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि गरीब, अनपढ़ ही नहीं, बल्कि हम में से कोई भी इस गिरोह का अगला शिकार हो सकता है। बस किसी ने आपकी KYC डिटेल्स, आधार नंबर या बैंक की जानकारी गलत हाथों में दे दी - और आपका नाम करोड़ों के ठगी कांड में शामिल हो सकता है, बिना आपको पता चले।
आगे क्या?
ग्वालियर पुलिस अब इस मामले को साइबर क्राइम की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को सौंपने की तैयारी में है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की मदद से डेटा की गहराई से जांच हो रही है, ताकि ठगों के पूरे नेटवर्क को ट्रेस किया जा सके। वहीं बैंक के खिलाफ आरबीआई और बैंकिंग नियामक संस्थाओं से भी जवाब-तलब की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है।












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