मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला: पंचायत सचिवों के परिजनों को अब 7 साल तक में मिलेगी अनुकम्पा नियुक्ति
मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य की 23 हजार पंचायतों में पदस्थ पंचायत सचिवों के परिजनों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यदि किसी पंचायत सचिव की सेवाकाल के दौरान असमय मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिजनों को अनुकम्पा नियुक्ति देने की प्रक्रिया अब सात साल के भीतर पूरी की जा सकेगी। पहले यह अवधि केवल तीन साल की थी।
इस बदलाव से उन मामलों में तेजी आएगी जहां पंचायत सचिव की मृत्यु के बाद अनुकम्पा नियुक्ति की प्रक्रिया लंबित रहती थी। पहले तीन साल की अवधि में यदि मृतक सचिव के परिवार का सदस्य निर्धारित योग्यता नहीं रखता था, तो अनुकम्पा नियुक्ति का लाभ नहीं मिल पाता था।

अब सात साल की अवधि में यह प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी, जिससे पंचायत सचिव पद पर अनुकम्पा नियुक्ति के पेंडिंग मामलों में तेजी आएगी।
पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग ने इस संबंध में विभागीय नियमों में बदलाव किया है और सभी कलेक्टरों तथा जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को नए नियमों के आधार पर अनुकम्पा नियुक्ति देने के आदेश जारी किए हैं।
विभाग के उपसचिव द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि ग्राम पंचायत सचिव की सेवाकाल में मृत्यु की दशा में अनुकम्पा नियुक्ति को लेकर 15 नवम्बर 2017 को आदेश जारी किया गया था। पहले के आदेश के अनुसार, अनुकम्पा नियुक्ति की पात्रता ग्राम पंचायत सचिवों की मृत्यु की तारीख से तीन साल तक थी। अब इस नियम में संशोधन कर इसे सात साल तक बढ़ा दिया गया है, जिससे सचिवों के परिवारों को सहायता मिल सकेगी और प्रक्रिया को सुगम बनाया जा सकेगा।

अब रिक्त पदों पर अन्य जिलों में नियुक्ति संभव
भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार ने पंचायत सचिवों के परिजनों को अनुकम्पा नियुक्ति देने की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण सुधार किया है। पहले जिलों में रिक्त पदों की कमी के कारण अनुकम्पा नियुक्तियों में अड़चनें आती थीं, लेकिन अब सरकार ने इस समस्या का समाधान कर दिया है।
पहले की व्यवस्था के अनुसार, यदि जिले में पंचायत सचिव के पद खाली नहीं होते थे, तो मृतक सचिव के आश्रितों को अनुकम्पा नियुक्ति नहीं मिलती थी। इस समस्या को हल करने के लिए, पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग ने मई 2024 में एक नया नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके तहत, पंचायत अधिनियम के नियम 5 (क) के तहत नया प्रावधान लागू किया गया है।
नए प्रावधान के अनुसार:
- यदि जिस जिले में पंचायत सचिव सेवारत था, वहां की ग्राम पंचायतों में पंचायत सचिव का पद रिक्त नहीं है, तो उसके परिजनों को अनुकम्पा नियुक्ति अन्य जिलों में दी जाएगी जहां पंचायत सचिव के पद रिक्त हैं।
- पंचायत राज संचालनालय के माध्यम से संबंधित जिलों को ग्राम पंचायत सचिव के रिक्त पदों की जानकारी भेजी जाएगी।
- इसके आधार पर, अनुकम्पा नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की जाएगी और पात्रता के आधार पर संबंधित जिले में नियुक्ति की जाएगी।
- इस बदलाव से अब पंचायत सचिवों की मृत्यु के बाद उनके परिजनों को अनुकम्पा नियुक्ति के लिए बेहतर अवसर मिलेंगे और प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुगम होगी। यह निर्णय उन मामलों में भी राहत प्रदान करेगा जहां पहले रिक्त पदों की कमी के कारण नियुक्ति में देरी होती थी।












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