गणतंत्र दिवस समारोह 2024 में शामिल हुए CM मोहन यादव, कहा- NCC करती है भाग्य बदलने का मार्ग प्रशस्त
Madhya Pradesh News: मुख्यमंत्री मोहन यादव नई दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह 2024 के अवसर पर लगे कैम्प में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय कैडेट्स कोर के मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ निदेशालय के प्रतिभागियों को आज संबोधित करते हुए कहा कि मानव जीवन भाग्य से मिलता है और भाग्य को सौभाग्य में बदलने का रास्ता एनसीसी से प्राप्त होता है।
सीएम यादव ने कहा कि भारत एक बड़ी आबादी वाला देश है। इसमें जल, वायु, थल सेना की संख्या मात्र साढ़े तेरह लाख है और इन साढ़े तेरह लाख जवानों पर पूरा देश अपनी सुरक्षा का विश्वास करता है। हमारी सेना हर चुनौती का सामना करने में सक्षम है। सेना की इस गौरवशाली परम्परा से जुड़ने का मार्ग एनसीसी से निकलता है।

सीएम ने कहा कि घुड़सवारी में 6 पदक जीतना महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के कैडेट्स द्वारा अर्जित की गईं उपलब्धियां सराहनीय हैं। सभी कैडेट्स बधाई के पात्र हैं। सीएम यादव ने उपलब्धियां प्राप्त करने वाले कैडेट्स को सम्मानित भी किया। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले कैडेट्स को सीएम द्वारा 6 लाख 25 हजार रूपए के पुरस्कार के रूप में चैक भी प्रदान किए गए।
उन्होंने कहा कि एनसीसी के कार्यक्रम में भाग लेना अपने परिवार में आने के समान है। मैं स्वयं शाला स्तर पर एनसीसी का सक्रिय कैडेट रहा हूँ। कैडेट्स द्वारा अर्जित की गईं उपलब्धियां उनकी प्रतिबद्धता की परिचायक हैं। मुझे विश्वास है कि कैडेट्स अगले वर्ष प्रथम स्थान का लक्ष्य रखकर परिश्रम के साथ निरंतर प्रयास करेंगे।
एनसीसी का ध्येय वाक्य एकता, अनुशासन और संगठन के प्रति समर्पण है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इन उद्देश्यों के साथ कार्य करना हम सबको गौरव और आत्म-सम्मान प्रदान करता है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने दीपावली का पर्व सीमा पर खड़े सेना के जवानों के साथ मनाकर अद्भुत आदर्श प्रस्तुत किया है।
गणतंत्र दिवस का एनसीसी कैम्प जीवनभर याद रहता है
सीएम यादव ने कहा कि भारत विश्व का सबसे युवा देश है। हमें आगे कई लक्ष्य प्राप्त करने हैं। एनसीसी के माध्यम से देश के सभी युवा प्रेरणा पाएं। गणतंत्र दिवस शिविर के दौरान 28 राज्यों और 8 केन्द्र शासित प्रदेशों के कैडेट्स के साथ बिताया समय जीवनभर की यादों की धरोहर बनता है। अलग भाषा, अलग प्रदेश फिर भी अपना एक देश, इस भिन्नता के बाद भी देश की एकता और आत्मीयता का अनुभव ऐसे शिविरों में ही होता है।












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