MP News: लहसुन के ढेर में छिपी थी नशे की दुनिया, मंदसौर नारकोटिक्स विंग ने पकड़ी 1.11 करोड़ की एमडी ड्रग
MP News: खेतों की खुशबू, लहसुन की गंध और ट्रकों की चुप्पी के बीच कुछ ऐसा छुपा था, जो शहर की आत्मा को झकझोर देने वाला था। शुक्रवार को मंदसौर नारकोटिक्स विंग ने एक ऐसी चालाकी से पर्दा हटाया, जो सीधे ड्रग्स की अंधेरी गलियों तक ले जाती है।
लहसुन से भरी पिकअप वैन के नीचे छुपा था 1 किलो 110 ग्राम एमडी ड्रग्स, जिसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 1.11 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। लेकिन यह सिर्फ नशे की खेप नहीं, बल्कि एक पूरे अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश था।

लहसुन की आड़ में चल रही थी नशे की सप्लाई चेन
खुफिया सूचना के बाद नीमच-मिर्जापुर फंटे पर जैसे ही संदिग्ध पिकअप पहुंची, पुलिस ने उसे चारों ओर से घेर लिया। तलाशी शुरू हुई, तो लहसुन के ढेर में छुपी ज़हर की पुड़िया सामने आई - एमडी ड्रग्स, जो पार्टी ड्रग्स के नाम से भी कुख्यात है।
कौन हैं ये तस्कर? एक फरार, दूसरा सप्लायर, तीसरा नेटवर्क ऑपरेटर
गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी एक दूसरे से बिल्कुल अलग शहरों से हैं - लेकिन ड्रग्स की दुनिया में एक ही कड़ी में जुड़े थे: शम्सुद्दीन उर्फ अन्नू (32) - मंदसौर के मदारपुरा का निवासी। यह वही आरोपी है जो राजस्थान में 41 किलो अफीम के मामले में जेल गया था और पैरोल पर निकलने के बाद चार महीने से फरार था। अब फिर सलाखों के पीछे है।
- यामीन खान (47) - मुंबई के माहिम वेस्ट का निवासी, जो मुंबई में ड्रग्स का मुख्य वितरक बताया जा रहा है।
- समीर शेख (50) - मुंबई में ही नेटवर्क को संचालित करने और फाइनेंशियल लेन-देन देखने वाला व्यक्ति।
Mandsaur Smugglers: टीआई भरत चावड़ा का खुलासा: "मुंबई था टारगेट मार्केट"
टीआई भरत चावड़ा ने मीडिया को बताया कि ये आरोपी मंदसौर से एमडी लेकर मुंबई में सप्लाई करते थे - विशेष रूप से माहिम और आसपास के इलाकों में। जांच में यह भी सामने आया कि इस नेटवर्क में लोकल ट्रांसपोर्ट एजेंसियों, छोटे वितरकों और कथित "बिजनेस कवर" के जरिए ड्रग्स खपाया जा रहा था।
अब कौन-कौन फंसेगा इस ड्रग्स जाल में?
एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। नारकोटिक्स विंग अब तस्करी नेटवर्क के फाइनेंशियल लिंक, बैंक अकाउंट्स, और हवाला चैनल तक पहुँचने की तैयारी कर रही है। यह भी जांचा जा रहा है कि क्या ये गिरोह अंतरराष्ट्रीय तस्करों से जुड़ा हुआ था।
एमडी ड्रग्स: एक पुड़िया जो मौत की गारंटी बन सकती है
MDMA, जिसे आमतौर पर 'एमडी' या 'मॉली' के नाम से जाना जाता है, पार्टी ड्रग्स की दुनिया में बेहद लोकप्रिय है, लेकिन यह युवाओं के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर कहर बनकर टूटता है। भारत में इसका अवैध व्यापार आसानी से छिपाया जा सकता है, क्योंकि यह कोई पौधा या गंध नहीं छोड़ता, बल्कि रासायनिक रूप से निर्मित होता है।
क्या मंदसौर बन रहा है 'नशे की मंडी'? मंदसौर, जो कभी सिर्फ अफीम उत्पादन के लिए जाना जाता था, अब नकली नशे के नेटवर्क के लिए भी बदनाम हो रहा है।
- पहले अफीम, फिर हेरोइन, अब एमडी।
- छोटे कस्बों से बड़े महानगरों तक नेटवर्क।
- किसान की आड़ में तस्कर, ट्रकों की आड़ में ज़हर।
- क्या यह जिला अब "माफिया मंडल" बनता जा रहा है?
अब आगे क्या?
- फॉरेंसिक टेस्ट से एमडी की पुष्टि कर दी गई है।
- आरोपियों के फोन डेटा और सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच की जा रही है।
- ड्रग्स नेटवर्क के मुंबई और राजस्थान कनेक्शन को लेकर बड़े खुलासे आने की उम्मीद है।
लहसुन की गंध में छिपा था नशे का ज़हर, लेकिन अब नहीं बचेगा कोई
एक तरफ सरकार युवाओं को नशे से बचाने के लिए अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग समाज में ज़हर बेचकर करोड़ों कमा रहे हैं। लेकिन मंदसौर नारकोटिक्स विंग की इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है -
"लहसुन में नशा छिपा हो या शब्दों में चालाकी - कानून की आँखें अब सब कुछ देख रही हैं।"












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