• search
मध्य प्रदेश न्यूज़ के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  

मध्यप्रदेशः शिवराज सरकार की उपेक्षा के चलते सड़कों पर भीख मांगने को मजबूर है देश का होनहार खिलाड़ी

|
    Para Athlete Manmohan Singh Lodhi इस मजबूरी की वजह से मांग रहे सड़कों पर भीख | वनइंडिया हिंदी
    Manmohan Singh Lodhi, a National-level player begging on streets mp

    नई दिल्ली। कुदरत का दस्तूर कहें या फिर वक्त की हकीकत, लेकिन सच ये है कि जब इंसान के हुनर का सिक्का अपने पूरे सबाब पर होता है तो हर कोई उस वक्त के जादू को अपने हित के लिए अपने पाले में समेटने की कोशिश करता है। कुछ ऐसा ही रिश्ता है खेल और सियासत का भी, जब किसी खिलाड़ी का हुनर करतब दिखाने लगता है तो सियासी हुक्मरान उसके हुनर को अपनी छवि के महिमामंडन के लिए हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं। उनके लिए नई-नई घोषणाएं, नए पद, सम्मान सबकी वकालत करते हैं लेकिन अफसोस की उनके दावों और वादों में हकीकत बस जुबानी होती है जमीनी नहीं। ऐसा ही एक उदाहरण है मध्यप्रदेश के एक दिव्यांग खिलाड़ी मनमोहन सिंह लोधी का जिनको कि शिवराज सिंह सरकार ने सपने तो दिखाए लेकिन उनको अमलीजामा अबतक नहीं पहना सके जिसकी वजह से दो जून की रोटी की तलाश और परिवार को खुश रखने की आश में मनमोहन खेल के मैदान से सड़क तक पहुंच गए और खेल सामानों की जगह उनके हाथ में कटोरा आ गया जिससे की वो भीख मांगने को मजबूर हैं।

    हादसे में हो गए थे विकलांग

    दरअसल दिव्यांग एथलीट मनमोहन सिंह लोधी नरसिंहपुर जिले की गोटेगांव तहसील के कंदरापुर गांव के रहने वाले हैं। 2009 में हुए एक हादसे में उनको अपना एक हांथ गंवाना पड़ा था लेकिन बावजूद इसके ये हादसा उनके हौसलों को नहीं डिगा सका और मनमोहन ने दौड़ में कई राजकीय और राष्ट्रीय पदक जीते। अहमदाबाद में आयोजित प्रतियोगिता में 100-200 मीटर की फर्राटा दौड़ में उन्होंने सिल्वर मेडल हासिल किया था। वहीं 2017 में मनमोहन को मप्र का सर्वश्रेष्ठ दिव्यांग खिलाड़ी भी घोषित किया गया था।

    शिवराज सरकार ने किया था वादा तो जगी थी आसः

    चुनावी बिगुल जब बजता है तो सियासी गलियारों में घोषणाएं भी आम होती हैं। ऐसा ही एक किस्सा था एमपी के शिवराज सरकार का भी, बता दें कि मध्यप्रदेश में साल 2003 से बीजेपी की सरकार है और उसके मुख्यमंत्री हैं शिवराज सिंह। वहीं शिवराज सरकार ने 2017 में राष्ट्रीय पदक जीतने वाले दिव्यांग खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने का वादा किया था और दिव्यांगों के करीब 6000 पदों पर भर्ती करने का भी एलान किया था, लेकिन शायद वो अपना वादा भूल गए जिसके कारण एक खिलाड़ी सड़कों पर भीख मांगने को मजबूर है।

    कई बार लगाई गुहारः

    कई बार लगाई गुहारः

    सियासी हुक्मरानों के लिए फरियादी सिर्फ उस वक्त जरूरी होते हैं जब चुनावी समर का दौर हो वरना तो बस फरियादी सत्तासीनों के लिए एक दिनचर्या का हिस्सा हैं जिनका आना-जाना लगा रहता है। ऐसा ही कुछ हुआ मनमोहन के साथ भी। दरअसल मनमोहन को जब सीएम की इस घोषणा का पता चला तो उन्होंने अपनी खेल प्रतिभा के आधार पर सरकारी नौकरी के लिए प्रयास शुरू किया, लेकिन नौकरी का कागज कोरा ही रह गया। मनमोहन ने बताया कि वो 4 बार मु्ख्यमंत्री से मिले लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात जैसा ही रहा, वो भरोसा देते रहे , हम मानते रहे, लेकिन उम्मीदों से पेट की भूख कहां मिटती है। नतीजतन देश का हुनर सड़कों पर भीख मांगने के लिए मजबूर है।

    जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

    अधिक मध्य प्रदेश समाचारView All

    देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
    English summary
    Manmohan Singh Lodhi, a National-level player begging on streets mp
    For Daily Alerts

    Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
    पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

    Notification Settings X
    Time Settings
    Done
    Clear Notification X
    Do you want to clear all the notifications from your inbox?
    Settings X
    X
    We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more