निगम में नेता प्रतिपक्ष का संकट, कांग्रेस के पास एक भी अनुभवी पार्षद नहीं
सागर, 18 जुलाई। सागर नगर निगम में कांग्रेस की दुर्गति हो रही है। महज 7 पार्षद जीतकर आए हैं। निगम में विपक्ष के पास नेता प्रतिपक्ष पद के लिए योग्य पार्षद का संकट गहरा गया है। जो जीतकर आए हैं उनमें पांच महिलाएं व दो पुरुष हैं। इनमें से एक भी पार्षद न तो अनुभवी है, न ही निगम एक्ट का कोई जानकार है। जाहिर है परिषद की बैठकों में भाजपा को इसका भरपूर फायदा मिलेगा। यदि निगम एक्ट या कानून प्रावधान पर बात करें तो कांग्रेस क पास पर्याप्त संख्याबल तक नहीं है।

मप्र नगरीय निकाय चुनाव के बाद नगर निगम सागर पर एक बार फिर भाजपा पूर्ण बहुमत से काबिज हुई है। निगम में कुल 48 वार्ड हैं, इनमें से भाजपा ने 40 वार्ड जीत लिए। एक निर्दलीय पार्षद भी जीतकर आए हैं। बाकी के 7 वार्ड से कांग्रेस के पार्षद चुनकर आए हैं। यह संख्या बल इतना नहीं है कि कांग्रेस विधिवत अपना सशक्त नेता प्रतिपक्ष चुन सके। दूसरी ओर निगम में कांग्रेस पार्टी के सिंबल पर जो पार्षद जीतकर आए हैं, उनमें 5 महिलाएं व दो पुरुष पार्षद हैं। इनमें से सभी पार्षद पहली दफा निगम की सीढियां चढ रहे हैं।
निगम की कानूनी और तकनीकि जानकारी आवश्यक
निगम प्रशासन के अनुसार निगम परिषद में मुख्य विपक्षी पार्टी को नेता प्रतिपक्ष चुनना होता है। इसमें अभी तक पार्टी के कद्दावर, सीनियर, निगम एक्ट के जानकारी, निगम की कार्यप्रणाली को बारीकि से समझने वाले, निगम परिषद, सत्तापक्ष और प्रभाव रखने वाले विपक्षी पार्षद को विपक्ष का नेता बनाया जाता रहा है। लेकिन इस दफा इस योग्यता वाले कोई भी पार्षद कांग्रेस के पास मौजूद नहीं है।












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