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गुना में वकीलों का तीखा विरोध क्यों, हनुमान चौराहे पर चक्काजाम, कुत्ते के गले में ‘कलेक्टर गुना’ की तख्ती

MP News: मध्य प्रदेश के गुना जिले में जिला कोर्ट परिसर को हनुमान चौराहे से जगनपुर क्षेत्र में शिफ्ट करने के प्रशासनिक फैसले के खिलाफ वकीलों ने बुधवार को तीखा विरोध प्रदर्शन किया। सैकड़ों वकीलों ने कोर्ट परिसर से रैली निकालकर कलेक्ट्रेट कार्यालय तक मार्च किया और कलेक्टर से स्वयं ज्ञापन लेने की मांग की।

कलेक्टर के सामने न आने से नाराज वकीलों ने हनुमान चौराहे पर ढाई घंटे तक चक्काजाम कर दिया, जिससे शहर की ट्रैफिक व्यवस्था ठप हो गई। प्रदर्शन के दौरान वकीलों ने एक विवादास्पद कदम उठाते हुए एक पालतू कुत्ते के गले में 'कलेक्टर गुना' लिखी तख्ती लटकाकर प्रतीकात्मक रूप से ज्ञापन सौंपा।

Lawyers protest in Guna block the roads dog has a plaque with Collector Guna around its neck

इस घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर हलचल मचाई, बल्कि सोशल मीडिया पर भी व्यापक विवाद को जन्म दिया। कलेक्टर ने इस प्रदर्शन को कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बताते हुए वकीलों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। यह मामला प्रशासन और वकील समुदाय के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है और गुना में न्यायिक प्रक्रिया पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।

विरोध प्रदर्शन का विवरण

गुना का जिला कोर्ट परिसर वर्तमान में हनुमान चौराहा, एबी रोड, खियावदा कॉलोनी में स्थित है, जो शहर के केंद्र में होने के कारण वकीलों और वादकारियों के लिए सुविधाजनक है। प्रशासन ने इस परिसर को जगनपुर क्षेत्र में शिफ्ट करने का फैसला लिया है, जहां नया कोर्ट परिसर और जजों के बंगले बनाए जाएंगे। इसके लिए जमीन आवंटन और प्रारंभिक प्रक्रियाएं शुरू हो चुकी हैं। हालांकि, जिला बार एसोसिएशन और वकील समुदाय इस फैसले का कड़ा विरोध कर रहा है। वकीलों का तर्क है कि नया परिसर शहर से दूर होगा, जिससे वादकारियों, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को, कोर्ट पहुंचने में परेशानी होगी। साथ ही, परिवहन लागत और समय की बर्बादी भी बढ़ेगी।

बुधवार सुबह, वकीलों ने कोर्ट परिसर में एकत्र होकर विरोध रैली निकाली और कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने करीब दो घंटे तक नारेबाजी की और मांग की कि कलेक्टर स्वयं उनका ज्ञापन स्वीकार करें। प्रशासन ने बताया कि ज्ञापन लेने के लिए अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (ADM) अखिलेश जैन और अन्य अधिकारी नियुक्त किए गए थे, लेकिन वकील कलेक्टर की व्यक्तिगत उपस्थिति पर अड़े रहे। कलेक्टर के सामने न आने से नाराज वकील कलेक्ट्रेट से हनुमान चौराहे पहुंचे और वहां हाथ में हाथ डालकर घेरा बनाकर चक्काजाम शुरू कर दिया। इस चक्काजाम से चारों दिशाओं में ट्रैफिक जाम हो गया, जिससे स्कूल बसें, एम्बुलेंस, और आम नागरिकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।

हनुमान चौराहे पर चक्काजाम और विवादास्पद प्रदर्शन

हनुमान चौराहे पर वकीलों ने ढाई घंटे तक चक्काजाम किया, जिस दौरान उन्होंने नारे लगाए जैसे, "कलेक्टर तानाशाही नहीं चलेगी" और "कोर्ट परिसर शिफ्टिंग बंद करो।" प्रदर्शन का सबसे विवादास्पद क्षण तब आया जब एक वकील अपने पालतू कुत्ते को लेकर चौराहे पर पहुंचा और कुत्ते के गले में 'कलेक्टर गुना' लिखी तख्ती लटका दी। इसके बाद वकीलों ने प्रतीकात्मक रूप से कुत्ते पर ज्ञापन रखकर प्रशासन का मजाक उड़ाया। इस कदम ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं उत्पन्न कीं, जिसमें कई लोगों ने इसे अनुचित और अपमानजनक बताया, जबकि कुछ ने वकीलों के गुस्से को प्रशासन की उदासीनता का परिणाम माना।

कलेक्टर की प्रतिक्रिया और कार्रवाई की चेतावनी

गुना कलेक्टर ने इस प्रदर्शन पर कड़ी नाराजगी जताई और इसे कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बताया। बुधवार रात 8 बजे, कलेक्टर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर पोस्ट किया: "कानून व्यवस्था बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। आज कुछ अधिवक्ताओं द्वारा लाउडस्पीकर का प्रयोग करते हुए, निर्धारित संख्या से अधिक लोगों के साथ कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश सहित हनुमान चौराहे पर जाम किया गया, जिससे आम नागरिकों को भारी असुविधा हुई। SDM गुना ने स्पष्ट किया कि हनुमान चौराहे पर किया गया जाम बिना अनुमति के अवैधानिक रूप से किया गया। प्रशासन द्वारा इस विषय में नियमानुसार उचित एवं आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।"

कलेक्ट्रेट सूत्रों के अनुसार, प्रशासन वकीलों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 188 (लोक सेवक के आदेश की अवज्ञा), धारा 341 (अवैध बाधा उत्पन्न करना), और धारा 144 (अवैध जमावड़ा) के तहत FIR दर्ज करने पर विचार कर रहा है। साथ ही, लाउडस्पीकर के अनधिकृत उपयोग के लिए मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों के उल्लंघन का मामला भी बन सकता है।

प्रशासन और वकीलों के बीच तनाव

प्रदर्शन के दौरान ADM अखिलेश जैन, SDM शिवानी पांडे, और पुलिस बल मौके पर मौजूद रहे। SDM ने वकीलों से अपील की कि चक्काजाम से आम जनता को परेशानी हो रही है, इसलिए वे प्रदर्शन समाप्त करें और ज्ञापन सौंपकर अपनी बात रखें। हालांकि, वकील अपनी मांग पर अड़े रहे और कलेक्टर की उपस्थिति की जिद करते रहे। जिला बार एसोसिएशन के एक वरिष्ठ सदस्य ने कहा, "हमारा विरोध शांतिपूर्ण था। कोर्ट परिसर को शिफ्ट करना जनता और वकीलों के हित में नहीं है। कलेक्टर को हमारी बात सुननी चाहिए थी।"

प्रशासन का तर्क है कि नया कोर्ट परिसर आधुनिक सुविधाओं, पर्याप्त पार्किंग, और बेहतर बुनियादी ढांचे के साथ बनाया जाएगा। कलेक्ट्रेट के एक अधिकारी ने बताया, "वर्तमान कोर्ट परिसर में जगह की कमी, पुरानी इमारत की खराब स्थिति, और पार्किंग की समस्या है। नया परिसर इन सभी समस्याओं का समाधान करेगा।" हालांकि, वकीलों का कहना है कि शिफ्टिंग का फैसला बिना उनकी सहमति के लिया गया, जो "तानाशाही" का प्रतीक है।

कोर्ट शिफ्टिंग का पृष्ठभूमि और पूर्व विरोध

गुना का जिला कोर्ट परिसर कई दशकों से हनुमान चौराहे पर स्थित है। यह स्थान शहर के केंद्र में होने के कारण वादकारियों और वकीलों के लिए सुविधाजनक है। प्रशासन ने इसे जगनपुर क्षेत्र में शिफ्ट करने का फैसला लिया है, जहां जजों के बंगले भी बनाए जाएंगे। इस प्रस्ताव के लिए जमीन आवंटन और निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। प्रशासन का दावा है कि नया परिसर अधिक विशाल, आधुनिक, और तकनीकी रूप से सुसज्जित होगा, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में सुधार होगा।

वकील समुदाय पिछले कई हफ्तों से इस फैसले का विरोध कर रहा है। पिछले हफ्ते, वकीलों ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को ज्ञापन सौंपकर अपनी आपत्तियां दर्ज की थीं। सोमवार को, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को भी ज्ञापन दिया गया, जिसमें कोर्ट को वर्तमान स्थान पर बनाए रखने की मांग की गई। जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा, "नया परिसर शहर से 5-7 किलोमीटर दूर होगा। इससे ग्रामीण वादकारियों को परिवहन की समस्या होगी, और वकीलों का समय और पैसा भी बर्बाद होगा।"

सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया

हनुमान चौराहे पर चक्काजाम और कुत्ते को 'कलेक्टर गुना' की तख्ती लटकाने की घटना ने सोशल मीडिया पर तीव्र बहस छेड़ दी है। @MPVoice ने लिखा, "गुना में वकीलों का विरोध जायज, लेकिन कुत्ते को तख्ती लटकाना अनुचित। प्रशासन को संवाद के जरिए समाधान निकालना चाहिए।" @GunaNagrik ने टिप्पणी की, "कलेक्टर की गैरमौजूदगी ने वकीलों को उकसाया। यह प्रशासन की असंवेदनशीलता का परिणाम है।" दूसरी ओर, कुछ यूजर्स ने प्रशासन का समर्थन करते हुए कहा कि चक्काजाम अवैध था और इससे आम जनता को परेशानी हुई। @CitizenVoiceMP ने लिखा, "वकीलों का गुस्सा समझ में आता है, लेकिन चक्काजाम और अपमानजनक प्रदर्शन गलत है। दोनों पक्षों को बातचीत करनी चाहिए।"

कानूनी और सामाजिक प्रभाव

वकीलों के इस प्रदर्शन और कलेक्टर की कार्रवाई की चेतावनी ने गुना में तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर दी है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वकीलों के खिलाफ FIR दर्ज होती है, तो यह मामला और उलझ सकता है। मध्य प्रदेश बार काउंसिल और बार काउंसिल ऑफ इंडिया इस मामले में हस्तक्षेप कर सकते हैं। @barandbench ने पोस्ट किया, "गुना में वकीलों का चक्काजाम: कोर्ट शिफ्टिंग के खिलाफ प्रदर्शन, प्रशासन की कार्रवाई की चेतावनी। बार काउंसिल को मध्यस्थता करनी चाहिए।"

इसके अलावा, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को इस मामले की जानकारी दी गई है, और संभव है कि हाईकोर्ट स्वत: संज्ञान ले। वकीलों का कहना है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे प्रदर्शन को और तेज करेंगे, जिसमें कोर्ट कार्यवाही का बहिष्कार भी शामिल हो सकता है।

सुझाव और समाधान

  • इस विवाद को सुलझाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:
  • संवाद और मध्यस्थता: प्रशासन और जिला बार एसोसिएशन के बीच तत्काल बैठक आयोजित की जाए। एक तटस्थ मध्यस्थ, जैसे हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज, को इस प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है।
  • पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया: कोर्ट शिफ्टिंग के फैसले को पारदर्शी बनाया जाए। वकीलों, वादकारियों, और जनता के सुझावों को शामिल करने के लिए सार्वजनिक सुनवाई आयोजित की जाए।
  • नए परिसर की सुविधाएं: प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नया परिसर शहर से सुलभ हो और इसमें परिवहन, पार्किंग, और वादकारियों के लिए आवश्यक सुविधाएं हों।
  • कानूनी कार्रवाई में संयम: कलेक्टर को वकीलों के खिलाफ कार्रवाई में संयम बरतना चाहिए ताकि तनाव और न बढ़े। इसके बजाय, बातचीत को प्राथमिकता दी जाए।
  • सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन: हनुमान चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस की तैनाती और CCTV निगरानी बढ़ाई जाए ताकि भविष्य में चक्काजाम जैसी घटनाओं से बचा जा सके।
  • जागरूकता अभियान: प्रशासन को जनता और वकीलों के बीच कोर्ट शिफ्टिंग के लाभों और आवश्यकता के बारे में जागरूकता अभियान चलाना चाहिए।
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