राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्दे खाक हुआ आकिल का पार्थिव शरीर, अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा में थे तैनात

राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्दे खाक हुआ आकिल का पार्थिव शरीर, अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा में थे तैनात

दमोह, 25 मई: अमरनाथ यात्रा के चलते बीएसएफ जवान आकिल खान की ड्यूटी अनंतनाम में लगाई गई थी।ड्यूटी के दौरान करंट लगने से आकिल खान की 23 मई को आकस्मिक मौत हो गई। आकिल खान मध्य प्रदेश के दमोह के रहने वाले थे। आज सुबह करीब 11 बेज उनका पार्थिव शरीर दमोह पहुंचा। जैसे ही शहीद आकिल खान का शव पहुंच वैसे ही भारी संख्या में जनसैलाब उन्हें नम आंखों से श्रद्धांजलि देने के लिए उमड़ पड़ा। वंदे मातरम और भारत माता के जयकारों से पूरा शहर गूंज उठा।

Last rites of martyr Aakil Khan performed in Damoh

बीएसएफ की विशेष टुकड़ी आकिल खान का पार्थिव शरीर लेकर फुटेरा वार्ड पहुंची। शहीद का पार्थिव शरीर देखकर परिजनों में कोहराम मच गया। पत्नी शाजिया खान, वृद्ध मां और बहन का हाल खराब था। 2 साल बेटा दानिश और 5 साल की बेटी फानूस भी विलाप देखकर सहमे हुए एक तरफ खड़े थे। वहीं, जिले के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ जन प्रतिनिधियों ने सुबह आकिल खान के अंतिम दर्शन किए। इसके बाद अंतिम यात्रा शुरू हुई। इस दौरान शहर के मुख्य चौराहों पर पंडाल लगाकर शहीद की अंतिम यात्रा में फूल बरसाए जा रहे थे। शहर के मुख्य चौराहों पर आकिल को श्रद्धासुमन करते हुए फ्लेक्स लगे हुए थे।

Last rites of martyr Aakil Khan performed in Damoh

वहीं, शहीद आकिल खान का अंतिम दीदार करने के लिए हजारों लोग उमड़ पड़े, पुष्प अर्पित कर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद शहर के पठानी मोहल्ला होते हुए कीर्ति स्तंभ, घंटाघर, फुटेरा फाटक होते हुए यात्रा सिंगपुर कब्रस्तान पहुंची। जिसमें हजारों लोग शामिल हुए। सिंगपुर कब्रस्तान में राजकीय सम्मान के साथ आकिल खान को सुपुर्दे खाक किया गया। बचपन से सेना में जाने का सपना देखने वाले आकिल 14 वर्ष पूर्व बीएसएफ में 19 फरवरी 2008 को नियुक्त हुए थे और खुशी-खुशी अपनी मां शकीला बेगम से विदा लेकर दिल में देश सेवा अरमान सजाकर घर से निकले थे।

आकिल के परिवार में पत्नी साजिया खान के अलावा आठ वर्ष की बेटी और तीन वर्ष का बेटा, मां के साथ दो भाई एक बहन भी है। बता दें कि आकिल खान की पोस्टिंग पठानकोट कैम्प में थी, लेकिन अमरनाथ यात्रा प्रारम्भ होने से पहले आकिल को अनंतनाग में अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया था। जहां पर ड्यूटी के दौरान उन्हें करंट लग गया, जिससे उनकी मौत हो गई थी।

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