नामीबिया और दक्षिण अफ्रीकी नर-मादा चीतों की कराएंगे क्राॅस ब्रीडिंग, ताकि नई प्रजाति बेहतर मिले
नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से आए नर-मादा चीतों की क्राॅस ब्रीडिंग कराकर भारत में चीतों की नई व बेहतर प्रजाति तैयार करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। दोनों देशों से आए नर-मादा चीतों को बाड़ों में साथ-साथ रखा गया है।

चीतों की दो अलग-अलग देशों से आई प्रजाति को मिक्स कराकर चीतों की और बेहतर प्रजाति भारत में तैयार की जाएगी, ताकि भारत में जन्म लेने वाले चीते यहां के पर्यावरण, वातावरण और भौगोलिक स्थितियों में बेहतर तरीके से सर्वाइव कर सकें।
देश के चीता प्रोजेक्ट के तहत करोड़ों रुपए खर्च करके मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में लाए गए नामीबिया से 8 और दक्षिण अफ्रीका से 12 चीतों में से दो चीतों की मौत से प्रोजेक्ट पर जहां सवाल उठाए जा रहे हैं, तो इधर कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन और चीता प्रोजेक्ट से जुड़े एक्सपर्ट ने इसके अगले प्लान पर काम शुरू कर दिया है। इसमें नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से नर और मादा चीतों की क्राॅस ब्रीडिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ताकि नई ब्रीडिंग से बेहतर और भारतीय जलवायु के हिसाब से सर्वाइव करने वाले चीतो की प्रजाति जन्म ले सके।
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चीता पवन को भी बाड़े में दो मादा चीतों के साथ रखा
बता दें कि नामीबियाई चीता ओबान चीते भारतीय नाम पवन दिया गया है, उसे दक्षिणी अफ्रीका से लाई र्गइं दो मादा चीतों के साथ बाड़े में रखा गया है। चीता पवन पार्क के जंगल छोड़कर तीन दफा भाग चुका है। इधर नामीबिया से लाई गई मादा धात्री को दक्षिण अफ्रीकी नर चीता त्वालू के साथ बाडे में छोड़ा गया है, ताकि ताकि इनके बीच मिलन हो और क्राॅस ब्रीडिंग के बाद चीतों की नई जनरेशन जन्म ले सके।
ब्लड रिलेशन में संबंध बनने से कई तरह की बीमारियों का खतरा होता है
वन्य प्राणी विशेषज्ञों की राय में जब कोई भी प्राणी एक ही ब्लड रिलेशन में पीढ़ी दर पीढ़ी संबंध बनाता है तो इसमें नई नस्ल को विभिन्न तरह की बीमारियों का खतरा बन जाता है। यही चीतों को लेकर भी है, इस कारण दो अलग-अलग देशों से आए चीतों की क्राॅस ब्रीडिंग की प्लानिंग की गई है। अलग-अलग जीनपू के जीवों में ब्रीडिंग से अच्छी प्रजाति के चीते मिलेंगे।












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