Kuno: जंगल छोड़कर भागा 'चीता ओवान' वापस कूनो पहुंचा, दक्षिण अफ्रीकी विशेषज्ञों ने किया था ट्रेंकुलाइज
नामीबिया से आया चीता ओवान बीते छह दिन से कूनों का जंगल छोड़ बाहर भाग गया था। विशेषज्ञों व कूनो की टीम उसके पीछे-पीछे चल रही थी। वह शिवपुरी जिले में आबादी के निकट पहुंचा तो फिर उसका रेस्क्यू किया गया।

कूनो के जंगल से भागा नामीबियाई चीता ओवान आखिरकार अपने ठिकाने और साथी चीतों के पास वापस पहुंच गया है। उसे शिवपुरी जिले के जंगल से सटे खेत से रेस्क्यू कर लिया गया है। टीम उसे तनाव से बचाने ट्रेंकुलाइज करने से बच रहे थे, लेकिन जब चीता वापस आने के बजाय बाघों के इलाके की तरफ बढ़ने लगा तो उसे रेस्क्यू करने का विकल्प चुना गया। बता दें कि बीते शुक्रवार-शनिवार की रात चीता ओवान जंगल से बाहर निकलकर आबादी वाले इलाके झार बरौदा पहुंच गया था। वह रोज करीब 20 से 25 किलोमीटर का सफर तय कर लोकेशन बदल रहा था। उसे गुरुवार को शिवपुरी जिले की बैराड़ तहसील क्षेत्र के डाबरपुरा गांव से रेस्क्यू किया गया।
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दक्षिण अफ्रीका के नामीबिया से सितंबर महीने में भारत लाए गए चीतों में से एक नर चीता ओवान शुक्रवार की रात में कूनो नेशनल पार्क से भाग निकला था। वह बफर जोन इलाके से सटे झार बरौदा गांव के एक प्याज के खेत में घूमते दिखा था। दक्षिण अफ्रीका से आए विशेषज्ञ, डाॅक्टर और कूनो व वन विभाग की टीम उसे लगातार ट्रेस कर रही थी। गुरुवार को चीता शिवपुरी जिले की सीमा के जंगलों में पहुंच गया था। जहां उसने काले हिरण का शिकार भी किया था। वह वापस कूनो आने के बजाय लगातार शिवपुरी जिले के जंगलों में आगे बढ़ रहा था, जिस कारण कूनो प्रबंधन व विशेषज्ञों की टीम ने उसे बेहोश कर रेस्क्यू का निर्णय लिया था।

दक्षिण अफ्रीका के विशेषज्ञों ने किया ट्रेंकुलाइज
शिवपुरी जिले की बराड़ तहसील क्षेत्र के डाबरपुरा गांव व गाजीगढ़ के जंगलों में चीता ओवान डेरा जमाए था। वह जंगल से सटे खेतों में भी घूमता रहा। यहीं पर दक्षिण अफ्रीका के विशेषज्ञों की टीम ने उसे ट्रेंकुलाइज किया। उसे डाॅट से बेहोशी की दवा का इंजेक्शन दिया गया। जिसके कुछ समय बाद वह बेहोश हो गया। विभाग की टीम ने उसे पिंजरे में रखकर विशेष वाहन से ट्रेवल कर वापस कूनो के जंगल में पहुंचाया, जहां उसके साथी चीते एल्टन व फ्रेडी पहले से मौजूद हैं। बीती देर शाम उसे यहां लाया गया था। कूनो वन विभाग के डीएफओ प्रकाश कुमार वर्मा ने स्थानीय मीडिया को ओवान के सफल रेस्क्यू की जानकारी साझा की है।

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ओवान और आशा को सबसे पहले जंगल में छोड़ा गया था
कूनो प्रबंधन के अनुसार चीता ओवान नामीबिया से आने वाले चीतों की पहली खेप में आया था। पीएम मोदी ने ओवान और आशा को पिंजरे से आजाद का बाड़े में छोड़ा था। सबसे इन दोनों को बड़े बाडे से आजाद कर कूनो के जंगलों में फ्री रेंज में आजाद किया गया था। इनके बाद एल्टन और फ्रेडी नाम के दो चीतों को भी फ्री रेंज में छोड़ दिया गया था। ओवान 2 अ्रपै्रल को जंगल से भागकर करीब 20 किलोमीटर दूर झार बरौदा गांव में आबादी के बीच पहुंच गया था। यहां से कूनो के बफर जोन से होते हुए नाहड़-सिलपुरा फिर पिपरवास के जंगल से होते हुए शिवपुरी जिले के गाजीगढ़ तहसील इलाके में खेतों तक पहुंच गया था।












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