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MP Election: 'मैं चुनाव नहीं लड़ना चाहता था, लेकिन...', इंदौर-1 से टिकट मिलने पर क्या बोले कैलाश विजयवर्गीय

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए सोमवार को बीजेपी की दूसरी लिस्ट भी जारी हो गई। जिससे सियासी गलियारों में हलचल मची हुई है। पार्टी ने अपने 3 केंद्रीय मंत्रियों समेत 7 सांसदों को मैदान में उतारा है। इसके अलावा बीजेपी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय भी इंदौर-1 से चुनाव लड़ेंगे।

वहीं दूसरी लिस्ट आते ही कैलाश विजयवर्गीय के घर के बाहर उनके समर्थकों का जमावड़ा लग गया। उन्होंने अपने नेता को माला पहनाकर जमकर नारेबाजी की। वहीं विजयवर्गीय भी आगामी चुनाव में जीत का दावा कर रहे हैं।

Kailash Vijayvargiya

मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि मैंने कहा था कि मैं चुनाव नहीं लड़ना चाहता, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने परसों मुझे कुछ निर्देश दिए। मैं असमंजस में था और लिस्ट की घोषणा होने के बाद मैं आश्चर्यचकित रह गया। मेरा सौभाग्य है कि मुझे चुनावी राजनीति में भाग लेने का अवसर मिला। मैं पार्टी की अपेक्षाओं को पूरा करने का प्रयास करूंगा।

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    'मैं चुनाव नहीं लड़ना चाहता था, लेकिन...', इंदौर-1 से टिकट मिलने पर क्या बोले कैलाश विजयवर्गीय

    उन्होंने आगे कहा कि ये पार्टी का आदेश है। मुझसे कहा गया था कि मुझे काम सौंपा जाएगा और मैं अगर नहीं भी कहूंगा, तो भी मुझे ये करना होगा। मैं पार्टी का सिपाही हूं, पार्टी जो भी कहेगी मैं करूंगा। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी दो-तिहाई बहुमत की ओर बढ़ चुकी है। समय आने पर पता चल जाएगा कि वो कितने ज्यादा सीटें जीतेगी।

    इन केंद्रीय मंत्रियों को टिकट
    बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, प्रहलाद पटेल, फग्गन सिंह कुलस्ते को मैदान में उतारा है। इसके अलावा सांसद राकेश सिंह, रीति पाठक, गणेश सिंह, उदय प्रताप सिंह एमपी विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। सोमवार को जारी हुई लिस्ट दूसरी थी, इससे पहले 39 प्रत्याशियों के साथ पहली लिस्ट आई थी। माना जा रहा कि आने वाली अन्य लिस्ट में कई और सरप्राइज देखने को मिल सकते हैं।

    2018 में क्या था समीकरण?
    मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं। जिसमें बहुमत का आंकड़ा 116 है। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया और 114 सीटें जीतीं, जबकि बीजेपी 109 पर ही सिमट गई थी। वहीं बसपा ने दो और अन्य दलों ने 5 सीटों पर जीत हासिल की थी। कांग्रेस ने अन्य और बसपा के समर्थन से सरकार का गठन किया। साथ ही कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाया। हालांकि सरकार 15 महीने में ही गिर गई थी। उस वक्त ज्योतिरादित्य सिंधिया की अगुवाई में कई विधायकों ने बगावत कर दी थी। जिसके बाद शिवराज सिंह चौहान फिर से सीएम बने थे।

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