MP News: गुना के मारकी महू में टपरे के नीचे चल रहे स्कूल पर ज्योतिरादित्य सिंधिया की त्वरित कार्रवाई
MP News: मध्य प्रदेश के गुना जिले के मारकी महू गांव में एक टपरे के नीचे संचालित हो रहे शासकीय प्राथमिक विद्यालय की जर्जर हालत ने न केवल स्थानीय लोगों का ध्यान खींचा, बल्कि केंद्रीय मंत्री और गुना सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की त्वरित कार्रवाई ने इसे सुर्खियों में ला दिया। अपने बेंगलुरु दौरे के बीच में ही सिंधिया ने इस मामले का संज्ञान लिया और गुना कलेक्टर को फोन कर स्कूल भवन के निर्माण के लिए तत्काल निर्देश दिए।
कलेक्टर ने आश्वासन दिया है कि एक-दो दिन में निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। यह घटना न केवल सिंधिया की जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है, बल्कि ग्रामीण भारत में शिक्षा के बुनियादी ढांचे की चुनौतियों को भी उजागर करती है। वन इंडिया हिंदी की यह विशेष रिपोर्ट लाई है इस रोचक और प्रेरणादायक कहानी की पूरी जानकारी।

टपरे में पढ़ रहे बच्चे, मारकी महू स्कूल की बदहाली
गुना जिले के बमोरी विकासखंड में बसे छोटे से गांव सांगई के मारकी महू में स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय पिछले तीन वर्षों से अत्यंत जर्जर स्थिति में है। स्कूल की छत से प्लास्टर झड़ने और बारिश में पानी रिसने की वजह से बच्चों के लिए इमारत में पढ़ाई करना असुरक्षित हो गया था। मजबूरी में शिक्षकों ने बच्चों की कक्षाएं तिरपाल से बने अस्थायी टपरे के नीचे शुरू कीं। गर्मी, बारिश, और ठंड में खुले टपरे में पढ़ने वाले बच्चों की तस्वीरें स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया के जरिए सामने आईं, जिसने प्रशासन और सरकार का ध्यान इस ओर खींचा।
स्थानीय निवासी रामविलास साहू ने बताया, "स्कूल की हालत इतनी खराब थी कि बारिश में बच्चे भीग जाते थे। टपरे में पढ़ाई करना बच्चों के लिए मुश्किल था, लेकिन कोई और रास्ता नहीं था।" स्कूल में पढ़ने वाले 40 से अधिक बच्चे इस स्थिति से जूझ रहे थे, और अभिभावकों ने कई बार प्रशासन से शिकायत की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी।
सिंधिया की त्वरित कार्रवाई: बेंगलुरु से कलेक्टर को कॉल
केंद्रीय संचार और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, जो गुना-शिवपuri लोकसभा क्षेत्र से सांसद भी हैं, को जैसे ही इस स्कूल की जर्जर हालत की जानकारी मिली, उन्होंने तत्काल कार्रवाई की। बेंगलुरु में अपने दो दिवसीय दौरे के बीच, जहां वे ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की तैयारियों में व्यस्त थे, सिंधिया ने समय निकालकर गुना कलेक्टर डॉ. सतेन्द्र सिंह को फोन किया। उन्होंने स्कूल भवन के निर्माण को यथाशीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए, ताकि बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
कलेक्टर डॉ. सतेन्द्र सिंह ने बताया, "माननीय मंत्री जी ने इस मामले को बहुत गंभीरता से लिया। उन्होंने मुझसे तुरंत कार्ययोजना तैयार करने और निर्माण शुरू करने को कहा। हमने तत्काल इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी है, और अगले एक-दो दिन में निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।" कलेक्टर ने यह भी आश्वासन दिया कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाएगा, ताकि भविष्य में बच्चों को ऐसी समस्याओं का सामना न करना पड़े।
स्कूल की स्थिति: तीन साल से जर्जर, टपरे में पढ़ाई
मारकी महू का शासकीय प्राथमिक विद्यालय ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों के लिए शिक्षा का एकमात्र साधन है। इस स्कूल में पहली से पांचवीं कक्षा तक के बच्चे पढ़ते हैं, जिनमें ज्यादातर किसान और मजदूर परिवारों से हैं। स्कूल भवन की हालत पिछले तीन वर्षों से खराब थी। छत का प्लास्टर गिरने और दीवारों में दरारें आने के कारण यह इमारत असुरक्षित हो गई थी। मॉनसून के दौरान पानी रिसने से स्थिति और बिगड़ गई, जिसके कारण शिक्षकों को मजबूरन तिरपाल का टपरा बनाकर कक्षाएं चलानी पड़ीं।
स्कूल के शिक्षक रामकिशोर शर्मा ने बताया, "हम बच्चों को टपरे में पढ़ाते थे, लेकिन बारिश में तिरपाल भीग जाता था। गर्मी में बच्चों को पसीने से तर-बतर होना पड़ता था। हमने कई बार प्रशासन को लिखित में शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।" स्थानीय लोगों ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर भी उठाया, और @GunaCitizenVoice ने ट्वीट किया, "मारकी महू का स्कूल टपरे में चल रहा है। क्या यही है शिक्षा का अधिकार? @JM_Scindia @MPGovt" इस ट्वीट ने सिंधिया का ध्यान इस ओर खींचा।
सिंधिया की जनसेवा: समय और स्थान की परवाह नहीं
यह पहली बार नहीं है जब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने संसदीय क्षेत्र की समस्याओं पर त्वरित कार्रवाई की हो। गुना-शिवपuri क्षेत्र के सांसद के रूप में, वे लगातार स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता देते रहे हैं। चाहे वे दिल्ली, मुंबई, या बेंगलुरु में हों, उनके लिए अपने क्षेत्र की जनता की चिंता हमेशा सर्वोपरि रही है। मारकी महू की इस घटना ने एक बार फिर साबित किया कि सिंधिया की जनसेवा की भावना समय और स्थान की सीमाओं से परे है।
कलेक्टर का आश्वासन: दो दिन में शुरू होगा निर्माण
गुना कलेक्टर डॉ सतेन्द्र सिंह ने बताया कि स्कूल भवन के निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) और जिला पंचायत को तत्काल कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। "हमने भवन की डिजाइन और बजट को अंतिम रूप दे दिया है। अगले एक-दो दिन में निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। यह भवन आधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा, जिसमें कक्षाएं, शौचालय, और पीने का पानी शामिल होगा।"
कलेक्टर ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री स्कूल उत्कृष्टता योजना के तहत इस स्कूल को और बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाए जाएंगे। "हमारा लक्ष्य है कि मारकी महू के बच्चे सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल में पढ़ाई करें," उन्होंने जोड़ा।
ग्रामीण शिक्षा की चुनौतियां
मारकी महू का यह स्कूल मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के बुनियादी ढांचे की बदहाली का एक उदाहरण है। राज्य शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में 10,000 से अधिक स्कूल जर्जर भवनों में चल रहे हैं, और कई स्कूलों में शौचालय, पानी, और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। मॉनसून के दौरान स्थिति और खराब हो जाती है, जब बारिश से भवनों को नुकसान पहुंचता है।
शिक्षा विशेषज्ञ प्रो. अनिल गुप्ता ने कहा, "मारकी महू जैसे स्कूलों की स्थिति ग्रामीण शिक्षा की चुनौतियों को दर्शाती है। सरकार को न केवल भवन निर्माण पर ध्यान देना चाहिए, बल्कि शिक्षकों की कमी और संसाधनों की उपलब्धता पर भी काम करना चाहिए।"
जनता और विपक्ष की प्रतिक्रिया
मारकी महू के निवासियों ने सिंधिया की इस त्वरित कार्रवाई की सराहना की है। अभिभावक श्यामलाल प्रजापति ने कहा, "हमारे बच्चों को अब टपरे में नहीं पढ़ना पड़ेगा। सिंधिया जी का धन्यवाद, जिन्होंने हमारी आवाज सुनी।"
हालांकि, कांग्रेस ने इस मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, "यह शर्मनाक है कि मध्य प्रदेश में बच्चे टपरे में पढ़ने को मजबूर हैं। अगर सिंधिया जी को बेंगलुरु से फोन करना पड़ रहा है, तो यह साबित करता है कि स्थानीय प्रशासन और बीजेपी सरकार नाकाम रही है।"
कांग्रेस नेता मुकेश नायक ने भी टिप्पणी करते हुए कहा, "सिंधिया जी की कार्रवाई स्वागत योग्य है, लेकिन यह सवाल उठता है कि तीन साल तक प्रशासन ने इस स्कूल की सुध क्यों नहीं ली? सरकार को पूरे प्रदेश के जर्जर स्कूलों के लिए एक व्यापक योजना बनानी चाहिए।"
भविष्य की दिशा और सुझाव
मारकी महू स्कूल की यह घटना ग्रामीण शिक्षा की बदहाली को सुधारने की जरूरत को रेखांकित करती है। कुछ सुझाव जो इस स्थिति को बेहतर कर सकते हैं:
- स्कूलों का सर्वे: पूरे मध्य प्रदेश में जर्जर स्कूल भवनों का सर्वे कर तत्काल मरम्मत और निर्माण शुरू किया जाए।
- आधुनिक सुविधाएं: स्कूलों में शौचालय, पीने का पानी, और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
- जागरूकता: स्थानीय समुदाय और जनप्रतिनिधियों को स्कूलों की स्थिति की निगरानी के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
- बजट आवंटन: शिक्षा के बुनियादी ढांचे के लिए विशेष बजट और समयबद्ध योजनाएं बनाई जाएं।
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