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Bhind News: क्लर्क के जूतों से दलित महिला की पिटाई, 50 बार चक्कर लगाने के बाद भी नहीं हुआ पीड़िता का काम

Bhind MP News: भिंड जिले के गोहद तहसील में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक सरकारी क्लर्क ने गरीब महिला को उसके अधिकार के लिए बार-बार गुहार लगाने के बाद भी न केवल अनसुना किया, बल्कि उसे जूतों से भी मारा।

यह पूरी घटना 55 साल की दीपा जाटव के साथ हुई, जो अपने 23 साल पुराने हक की लड़ाई लड़ रही थी। दीपा का आरोप है कि उन्होंने रिश्वत दी, फिर भी उनका काम नहीं हुआ और जब उन्होंने सवाल उठाया तो उन्हें जूते से मारा गया।

Incident with Dalit woman due to clerk s shoes in Bhind Deepa Jatav Land lease work not done

रिश्वत देने के बाद भी टाला जाता रहा काम

दीपा जाटव के मुताबिक, उन्हें और उनके परिवार को 23 साल पहले 5 बीघा जमीन का पट्टा मिला था, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में इसे ऑनलाइन दर्ज कराने के लिए वह पिछले छह महीने से तहसील ऑफिस का चक्कर काट रही थीं। उन्होंने एसडीएम से लेकर पटवारी तक से मदद की गुहार लगाई, लेकिन कहीं से कोई राहत नहीं मिली। अंत में, उन्होंने क्लर्क नवल किशोर गौड़ से काम कराने के लिए रिश्वत देने का भी फैसला किया।

दीपा ने बताया कि जब उन्होंने बार-बार गुहार लगाई तो क्लर्क ने 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी, जिसे दीपा ने उधार लेकर दे दिए। गरीबी में गुजर-बसर करने के बावजूद उसने उन पैसों को किसी तरह इकट्ठा किया, उम्मीद करते हुए कि अब उसका काम हो जाएगा, लेकिन इसके बावजूद क्लर्क ने उनका काम नहीं किया और उन्हें बार-बार टालता रहा।

जूतों से पिटाई का आरोप

जब दीपा ने अपनी हक की बात उठाई और चुप नहीं बैठने की धमकी दी, तो क्लर्क ने उसे तहसील ऑफिस में ही जूतों से पीटा। दीपा ने कहा, "मैंने कई बार कहा कि अब मैं चुप नहीं बैठूंगी और मुझे मेरा हक चाहिए, लेकिन उन्होंने मुझे अपमानित करते हुए जूतों से मारा।"

सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार की बढ़ती शिकायत

यह मामला भिंड जिले में सरकारी कर्मचारियों की भ्रष्टाचार और जनता के साथ अत्याचार का एक और उदाहरण बन गया है। दीपा का कहना है कि उसने 6 महीने तक तहसील कार्यालय में आवेदन दिया और अधिकारियों से न्याय की अपील की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

दीपा की स्थिति

दीपा जाटव का परिवार पहले से ही अति गरीब है और खेती-बाड़ी से अपना जीवन यापन करता है। 23 साल पहले जब उन्हें 5 बीघा जमीन का पट्टा मिला था, तो यह उम्मीद थी कि अब उनका जीवन बेहतर होगा। लेकिन सरकारी कर्मचारियों की ओर से लगातार हो रही अनदेखी और रिश्वतखोरी ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

क्या है दीपा की मांग?

दीपा ने कहा कि उनका मकसद केवल अपने जमीन का रिकॉर्ड सही कराना है, ताकि वह सरकारी मदद और योजनाओं का फायदा उठा सकें। वह चाहती हैं कि उनके साथ हुए इस अन्याय का समाधान हो और क्लर्क नवल किशोर गौड़ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

2002 में मिला पट्टा, 6 महीनों से चक्कर काट रही थीं दीपा

दीपा जाटव ने बताया कि उन्हें 2002 में 5 एकड़ जमीन का पट्टा मिला था। यह पट्टा ऑनलाइन दर्ज करने के लिए उन्होंने पिछले छह महीनों से गोहद तहसील कार्यालय के चक्कर काटे। एक दिन, जब दीपा और उनके पति क्लर्क नवल किशोर गौड़ से मदद की गुहार लगाते हुए वहां पहुंचे, तो क्लर्क ने कहा कि उनके काम को करवाने के लिए 10 हजार रुपए की रिश्वत लगेंगे। कर्ज लेकर दीपा ने वह रकम क्लर्क को दे दी, लेकिन फिर भी उनका काम टलता रहा।

50 बार चक्कर लगाने के बावजूद काम नहीं हुआ

दीपा ने बताया कि पिछले छह महीनों में वह और उनका परिवार 50 से अधिक बार तहसील कार्यालय के चक्कर काट चुके थे। हर बार कोई न कोई बहाना बनाया जाता। कभी कहा जाता कि "आजकल हो जाएगा", कभी "सर्वर काम नहीं कर रहा" और कभी "और कागज लाओ" कहकर उन्हें टाल दिया जाता था।

क्लर्क ने किया शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न

सोमवार को, जब दीपा और उनका पति एक बार फिर से तहसील पहुंचे और अपने जमीन के कागज दिखाकर मदद की गुहार लगाई, तो क्लर्क नवल किशोर गौड़ ने कहा, "तुम्हारा पट्टा ऑनलाइन नहीं कर सकते"। जब दीपा ने सवाल किया कि "अगर काम नहीं होना था तो रिश्वत क्यों ली?", तो क्लर्क ने गुस्से में आकर उन्हें गालियां दी, और फिर थप्पड़ और जूते से मारा। दीपा के साथ खड़े कुछ अन्य लोगों ने मौके पर पहुंचकर उसे बचाया।

घटना से जुड़े वीडियो और सार्वजनिक प्रतिक्रिया

यह घटना क्लर्क नवल किशोर गौड़ के द्वारा किए गए रिश्वत लेने, काम न करने, और शारीरिक उत्पीड़न को उजागर करती है। यह मामला भ्रष्टाचार और सरकारी कर्मचारियों के दुर्व्यवहार का एक और उदाहरण बनकर सामने आया है। अब, दीपा और उनके परिवार ने कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि ऐसे कर्मियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकें।

न्याय की मांग

दीपा का कहना है कि उसे और उसके परिवार को अब तक न्याय नहीं मिला। उनका कहना है कि सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार और कर्मचारियों का अपमान आम हो गया है। दीपा ने क्लर्क के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है ताकि भविष्य में किसी और को इस तरह की स्थिति का सामना न करना पड़े।

भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज

यह घटना भ्रष्टाचार और अधिकारों के हनन के खिलाफ आवाज उठाने का एक ज्वलंत उदाहरण है। दीपा की यह लड़ाई केवल अपनी व्यक्तिगत समस्याओं के लिए नहीं, बल्कि समाज के गरीब और कमजोर वर्ग के लिए भी है, जो सरकारी दफ्तरों में हो रहे भ्रष्टाचार का शिकार होते हैं।

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