MP News: चलती ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच फंसी लड़की, अशोकनगर में जीआरपी जवान ने दिखाया साहस, जान बचाई

MP News: मध्य प्रदेश के अशोकनगर रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार को एक दिल दहला देने वाली घटना घटी, जब एक नाबालिग लड़की ने चलती ट्रेन में चढ़ने की कोशिश की, लेकिन पैर फिसलने से वह ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच फंस गई।

इस घातक हादसे के बावजूद लड़की की जान बचाने के लिए जीआरपी के जवान गोविंद सिंह चौहान ने साहस और सूझबूझ का परिचय दिया। उनकी तेज़ी से की गई मदद ने एक और हादसे को टाल दिया, जिससे इस घटना को लेकर हर ओर उनकी तारीफ हो रही है।

GRP Jawan s presence of mind in saving a girl s life at Ashoknagar railway station MP police viral video

घटना का वीडियो भी हुआ वायरल इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें जीआरपी जवान गोविंद सिंह चौहान को लड़की को ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच से बाहर खींचते हुए देखा जा सकता है। इस बहादुरी के लिए गोविंद सिंह की हर तरफ सराहना हो रही है। मध्य प्रदेश पुलिस ने उन्हें इस कार्य के लिए सम्मानित करने का ऐलान किया है, और डीजीपी कैलाश मकवाना ने आरक्षक गोविंद सिंह चौहान को 10,000 रुपये का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है।

कैसे हुआ हादसा?

शुक्रवार दोपहर करीब एक बजे बीना-कोटा मेमो ट्रेन बीना से बारां जा रही थी। ट्रेन जब अशोकनगर स्टेशन पर पहुंची, तब किशोरी अपनी मां और दो भाईयों के साथ प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर खाना लेने उतरी थी। अचानक ट्रेन के चलने पर लड़की दौड़ते हुए ट्रेन में चढ़ने की कोशिश करने लगी।

वह भागते हुए ट्रेन के दरवाजे तक पहुंचने में तो कामयाब हुई, लेकिन अचानक उसका पैर फिसल गया और वह ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच फंसकर घिसटने लगी।

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जीआरपी जवान की फुर्ती से बची लड़की की जान यह सब बहुत तेजी से हुआ, लेकिन उसी समय वहां खड़े जीआरपी जवान गोविंद सिंह चौहान ने बिना एक पल गंवाए अपनी सूझबूझ दिखाई। उन्होंने फौरन दौड़कर लड़की का हाथ पकड़ा और उसे खींचते हुए सुरक्षित स्थान पर बाहर खींच लिया। अगर यह मदद समय पर नहीं मिलती, तो लड़की का जीवन खतरे में पड़ सकता था।

कैसे बचाया

गोविंद सिंह ने क्या बताया? घटना के बाद गोविंद सिंह चौहान ने बताया, "लड़की स्टेशन के बाहर खाने का कुछ सामान लेने गई थी। जब मैंने देखा कि वह दौड़ते हुए ट्रेन की ओर आ रही है और ट्रेन अचानक चल पड़ी है, तो मुझे अंदाजा हो गया कि वह ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर सकती है। उसके एक हाथ में मोबाइल था और दूसरे हाथ में कुछ सामान। मुझे यकीन था कि वह नहीं चढ़ पाएगी, इसलिए मैंने तुरंत उसकी तरफ दौड़ना शुरू किया। पास में पहुंचते ही यह हादसा हुआ, और मैंने उसे खींच लिया।"

जीआरपी ने दी समझाइश

हादसे के बाद घबराई किशोरी को जीआरपी ने दी समझाइश इस हादसे के बाद लड़की और उसके परिजनों में घबराहट फैल गई, लेकिन जीआरपी के जवानों ने उन्हें शांत किया और इस घटना के बाद किसी भी प्रकार की और समस्या से बचने के लिए उन्हें समझाया। इस घटना के कारण ट्रेन करीब 10 मिनट तक स्टेशन पर रुकी रही, लेकिन आखिरकार उसका सफर फिर से शुरू हो सका।

गोविंद सिंह चौहान की बहादुरी

गोविंद सिंह की बहादुरी पर प्रशंसा यह घटना न केवल गोविंद सिंह चौहान की बहादुरी को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि हमारे सुरक्षा कर्मी किस तरह अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए दूसरों की जिंदगी को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। गोविंद सिंह ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए एक जीवन को बचाया, और इसके लिए उन्हें सराहा जा रहा है।

मध्य प्रदेश पुलिस का सम्मान मध्य प्रदेश पुलिस के डीजीपी कैलाश मकवाना ने गोविंद सिंह चौहान की इस साहसिक कार्रवाई के लिए उन्हें नकद पुरस्कार देने का ऐलान किया है। उनका कहना है, "गोविंद सिंह चौहान ने इस मुश्किल घड़ी में जो साहस दिखाया, वह काबिले तारीफ है। हमें गर्व है कि हमारे जवान ऐसे खतरनाक हालात में भी अपना कर्तव्य निभाते हैं और दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान की परवाह नहीं करते।"

समाज को प्रेरणा यह घटना न केवल पुलिसकर्मियों के लिए, बल्कि हर नागरिक के लिए एक प्रेरणा है। यह दर्शाता है कि अगर हम सजग और फुर्तीले रहते हैं, तो हम किसी की जिंदगी बचा सकते हैं। गोविंद सिंह चौहान की यह बहादुरी न केवल एक उदाहरण है, बल्कि यह यह भी बताता है कि समाज में छोटे-छोटे प्रयास कैसे बड़े बदलाव ला सकते हैं।

कुल मिलाकर, अशोकनगर रेलवे स्टेशन की इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि हमारी सुरक्षा और बचाव प्रणाली हर स्थिति में हमारी रक्षा करने के लिए तैयार रहती है, और गोविंद सिंह चौहान की सूझबूझ ने यह सिद्ध कर दिया कि जिम्मेदारी निभाने वाले ही असल हीरो होते हैं।

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