MP News: बालाघाट के पूर्व विधायक किशोर समरीते को संसद उड़ाने की धमकी देने का दोषी करार, जानिए पूरा मामला
MP News: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के लांजी विधानसभा सीट से पूर्व विधायक किशोर समरीते को संसद को उड़ाने की धमकी देने के मामले में दोषी ठहराया गया है।
यह मामला दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में चल रहा था, जहां विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने उन्हें IPC की धारा 506 के तहत दोषी पाया। इस धारा के तहत आरोपी को अधिकतम 7 साल तक की सजा हो सकती है। मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी को होगी, जिसमें अदालत आरोपी को सजा सुनाने पर विचार करेगी।

क्या था मामला?
यह मामला उस वक्त सामने आया जब किशोर समरीते ने कथित तौर पर राज्यसभा के सेक्रेटरी जनरल के कार्यालय को एक धमकी पत्र भेजा था। इस पत्र में समरीते ने दावा किया था कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की जाती हैं तो वह संसद को उड़ा देंगे। इस धमकी ने पूरे राजनीतिक और सुरक्षा हलकों में खलबली मचा दी थी, और इसे गंभीरता से लिया गया था।
पार्सल की जांच में क्या निकला?
18 फरवरी को कोर्ट के फैसले में यह कहा गया कि राज्यसभा के सेक्रेटरी जनरल के कार्यालय को भेजे गए पार्सल की जांच की गई थी। जांच में यह पाया गया कि पार्सल में मिले पदार्थों की विस्फोट करने की क्षमता के मामले में वे हानिरहित थे। हालांकि, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 5(ए) और धारा 9बी(1)(बी) के तहत आरोप साबित नहीं हुए, लेकिन अदालत ने यह स्पष्ट किया कि समरीते ने उस पत्र को भेजा था, जिसमें संसद को उड़ा देने की धमकी दी गई थी।
विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 5(ए) और 9बी(1)(बी) के तहत आरोप विफल
कोर्ट ने इस मामले में विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 5 (ए) के तहत आरोपों को खारिज किया, जिसमें विस्फोटक पदार्थ के जरिए किसी के जीवन को खतरे में डालने की बात की गई थी। इसी तरह से विस्फोटक अधिनियम की धारा 9बी(1)(बी) के तहत भी आरोप साबित नहीं हो सके, जिसमें विस्फोटक पदार्थ का निर्माण, आयात या निर्यात करने की बात की गई थी। लेकिन अदालत ने यह माना कि समरीते ने जो पत्र भेजा था, उसमें संसद को उड़ाने की धमकी दी गई थी, और यह गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
अदालत के फैसले से कानून व्यवस्था को बल
कोर्ट ने इस फैसले के साथ ही यह संदेश दिया कि कोई भी व्यक्ति इस प्रकार की धमकियों को हल्के में नहीं ले सकता। भले ही विस्फोटक सामग्री से जुड़ा आरोप साबित न हुआ हो, लेकिन किसी भी प्रकार की आतंकवादी धमकी देने के लिए कड़ी सजा का प्रावधान होना चाहिए, ताकि समाज में भय का माहौल पैदा न हो। इस फैसले से यह भी स्पष्ट होता है कि अदालत ने आरोपी की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए उचित सजा देने का निर्णय लिया है, ताकि अन्य लोग इस तरह की घातक धमकियों से बच सकें।
किशोर समरीते की राजनीति और उनकी छवि
किशोर समरीते मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के लांजी विधानसभा सीट से पूर्व विधायक हैं। वे अपनी राजनीतिक यात्रा में एक प्रमुख नेता रहे हैं और उन्हें क्षेत्र में खासा समर्थन प्राप्त था। हालांकि, इस मामले ने उनकी छवि को धक्का पहुँचाया है, और उनकी राजनीति में यह घटना एक महत्वपूर्ण मोड़ बन गई है। समरीते का यह कृत्य उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई को तेज करता है और उनके समर्थन में खड़े लोगों के लिए भी सवाल खड़ा करता है।
अगली सुनवाई 27 फरवरी को
किशोर समरीते के खिलाफ यह मामला कोर्ट में अभी जारी है, और अगली सुनवाई 27 फरवरी को होगी। इस दौरान अदालत उन्हें सजा सुनाने के मामले पर विचार करेगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कोर्ट कितनी सजा देती है और समरीते की भविष्य की राजनीतिक योजनाओं पर इसका क्या असर पड़ता है।
क्या था धमकी भरा पत्र?
यह मामला 16 सितंबर 2022 का है, जब किशोर समरीते ने राज्यसभा के महासचिव कार्यालय को एक धमकी भरा पत्र भेजा था। पत्र में समरीते ने चेतावनी दी थी कि यदि उनकी 70 मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो वह 30 सितंबर को संसद भवन को उड़ा देंगे। इस पत्र के साथ उन्होंने एक पैकेट भी भेजा था, जिसमें धमकी भरा पत्र, कुछ झंडे, संविधान की एक प्रति और कुछ जिलेटिन की छड़ें थीं।
समरीते ने यह पत्र अपने क्षेत्र की समस्याओं का हल न निकलने पर स्पीकर को भेजा था, और इसका उद्देश्य अपनी मांगों को मनवाना था। पत्र में दी गई धमकी के बाद संसद मार्ग पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया, और जांच शुरू की गई।
कोर्ट का फैसला
कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए समरीते को विस्फोटक रखने और जीवन को खतरे में डालने के आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि पैकेट में विस्फोटक सामग्री का कोई प्रमाण नहीं मिला। हालांकि, समरीते को धारा 506 के तहत संसद को उड़ाने की धमकी देने के आरोप में दोषी करार दिया गया। अदालत ने यह भी कहा कि धमकी देने का उद्देश्य आतंकित करना था, और इस तरह की धमकियों को कानून के तहत गंभीर अपराध माना जाता है।
समरीते की राजनीतिक पृष्ठभूमि
किशोर समरीते पहले समाजवादी पार्टी से लांजी के विधायक थे और बाद में बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गए थे। उनकी इस घटना ने न केवल उनके राजनीतिक करियर को झटका दिया, बल्कि उनके समर्थकों के बीच भी सवाल खड़े किए हैं। समरीते ने अपनी धमकी को अपनी राजनीतिक मांगों के साथ जोड़ा था, लेकिन यह कार्रवाई कानून के तहत अपराध मानी गई।












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