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MP News: नकली शराब का कहर, 1330 मौतों ने खोली शराब नीति की पोल, जीतू पटवारी ने की जांच की मांग

मध्य प्रदेश में पिछले एक दशक (2016-2025) में नकली और जहरीली शराब के कारण 1330 से अधिक लोगों की मौत ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था और शराब नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन मौतों ने न केवल परिवारों को उजाड़ा है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी कमजोर किया है।

इस मुद्दे पर मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 27 जुलाई 2025 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने बीजेपी सरकार की "शराब उदारीकरण नीति" को शराब माफिया के बेलगाम होने का कारण बताया और नकली शराब कांडों की न्यायिक जांच की मांग की।

Fake liquor wreaks havoc 1330 deaths expose the liquor policy Jeetu Patwari demands investigation

पटवारी ने कहा कि यह मौतें सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि परिवारों की बर्बादी और सामाजिक विघटन की दर्दनाक कहानियां हैं। यह खबर मध्य प्रदेश की शराब नीति, इसके सामाजिक प्रभाव, और कांग्रेस की मांगों को विस्तार से उजागर करती है।

नकली शराब का कहर: 1330 से अधिक मौतें

पिछले 10 वर्षों में मध्य प्रदेश में नकली और जहरीली शराब के कारण हुई मौतों ने सरकार की लचर शराब नीति को कठघरे में खड़ा किया है। कुछ प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं:

  • रतलाम (2024): नकली शराब पीने से 8 लोगों की मौत, 20 से अधिक अस्पताल में भर्ती।
  • मंदसौर (2023): जहरीली शराब से 12 लोगों की जान गई, जिसमें ज्यादातर मजदूर थे।
  • उज्जैन (2020): 14 लोगों ने नकली शराब पीने के बाद दम तोड़ा।
  • इंदौर (2024): अवैध शराब के कारोबार से जुड़े एक कांड में 6 लोगों की मौत।
  • छिंदवाड़ा (2025): हाल ही में 5 लोगों की जहरीली शराब से मौत।

इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नकली शराब का कारोबार मध्य प्रदेश में एक संगठित अपराध के रूप में फल-फूल रहा है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में 2016 से 2025 तक नकली शराब से होने वाली मौतों की संख्या 1330 से अधिक हो चुकी है। इनमें से अधिकांश मामले ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में सामने आए हैं, जहां सस्ती और अवैध शराब आसानी से उपलब्ध होती है।

जीतू पटवारी का सरकार पर हमला

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने X पर एक वीडियो बयान जारी कर बीजेपी सरकार की शराब नीति को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री मोहन यादव जी, आपकी सरकार की शराब उदारीकरण नीति ने शराब माफिया को बेलगाम कर दिया है। रतलाम, मंदसौर, इंदौर, उज्जैन जैसे शहरों में नकली शराब से लोग मर रहे हैं, और आपकी सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। यह सिर्फ मौतें नहीं, बल्कि परिवारों की बर्बादी है।"

पटवारी ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि मध्य प्रदेश में शराब की खपत में 50% की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा:

  • 10.2% महिलाएं तंबाकू का सेवन करती हैं।
  • 1% महिलाएं शराब का सेवन करती हैं।

"ये आंकड़े एक चेतावनी हैं। शराब अब पुरुषों तक सीमित नहीं रही, बल्कि महिलाओं और युवाओं तक पहुंच गई है। यह सामाजिक विघटन का संकेत है। सरकार की नीतियां इस खतरे को और बढ़ा रही हैं," पटवारी ने कहा।

शराब उदारीकरण नीति: माफिया का बढ़ता दबदबा

बीजेपी सरकार की शराब नीति, जिसे 2020 में उदारीकरण के तहत लागू किया गया, ने शराब की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए। इनमें शराब की दुकानों की संख्या बढ़ाना, लाइसेंस प्रक्रिया को आसान करना, और देसी-विदेशी शराब की बिक्री को प्रोत्साहित करना शामिल है। हालांकि, इस नीति के कई दुष्परिणाम सामने आए हैं:

शराब माफिया का वर्चस्व: अवैध शराब का कारोबार बढ़ा, जिसके कारण नकली और जहरीली शराब की बिक्री में वृद्धि हुई।

धार्मिक स्थलों की अनदेखी: शराबबंदी वाले 19 शहरों, जैसे उज्जैन और अमरकंटक, में भी शराब की दुकानें खुल गईं। मंदिरों और धार्मिक स्थलों के पास शराब की बिक्री ने सामाजिक और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई।

स्कूल-कॉलेज के पास शराब की दुकानें: भोपाल, इंदौर, और ग्वालियर जैसे शहरों में स्कूल, कॉलेज, और अस्पतालों के 100 मीटर की परिधि में शराब की दुकानें खुलने से महिलाओं और छात्रों में असुरक्षा का भाव बढ़ा।

पटवारी ने कहा, "शराब की दुकानों के सामने सुबह से ही असामाजिक तत्वों का जमावड़ा होता है। इससे महिलाएं और लड़कियां असुरक्षित महसूस करती हैं। मध्य प्रदेश पहले से ही महिला अपराधों में देश में अव्वल है, और यह नीति इसे और बदतर बना रही है।"

सामाजिक प्रभाव: घरेलू हिंसा और परिवारों की बर्बादी

नकली शराब और शराब की बढ़ती खपत ने मध्य प्रदेश में सामाजिक और पारिवारिक संकट को गहरा किया है। कुछ प्रमुख प्रभाव इस प्रकार हैं:

घरेलू हिंसा में वृद्धि: शराब के नशे में पुरुषों द्वारा महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा के मामले बढ़े हैं। मध्य प्रदेश में 2024 में NCRB के अनुसार घरेलू हिंसा के 15,000 से अधिक मामले दर्ज हुए।

आर्थिक बर्बादी: मजदूर और निम्न-आय वर्ग के परिवार अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा शराब पर खर्च कर रहे हैं, जिससे परिवार आर्थिक संकट में हैं।

युवाओं पर प्रभाव: ड्रग्स और शराब की लत ने युवाओं को अपराध और नशे की ओर धकेला है। भोपाल में हाल ही में सामने आए ड्रग्स और यौन शोषण के मामले इसका उदाहरण हैं।

सामाजिक विघटन: धार्मिक और सामाजिक स्थलों के पास शराब की बिक्री ने सामुदायिक एकता को कमजोर किया है।

पटवारी ने कहा, "शराब की नीति ने न केवल परिवारों को बर्बाद किया है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी तोड़ दिया है। यह सरकार की विफलता का जीता-जागता सबूत है।"

हाल की घटनाएं और नकली शराब का कारोबार

2024-25 में मध्य प्रदेश में नकली शराब से जुड़ी कई घटनाओं ने सुर्खियां बटोरीं:

  • रतलाम (जुलाई 2024): एक अवैध शराब भट्टी से बनी जहरीली शराब ने 8 लोगों की जान ले ली। पुलिस ने भट्टी मालिक रामलाल को गिरफ्तार किया, लेकिन जांच में बड़े माफिया तक नहीं पहुंची।
  • छिंदवाड़ा (जून 2025): एक गांव में 5 लोग नकली शराब पीने से मरे। पुलिस ने दो तस्करों को गिरफ्तार किया।
  • मुरैना (2021): जहरीली शराब से 24 लोगों की मौत ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया।

इन घटनाओं में एक समानता यह थी कि नकली शराब का कारोबार स्थानीय माफिया और कुछ पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा था। जीतू पटवारी ने आरोप लगाया, "शराब माफिया और पुलिस की सांठगांठ के कारण ही नकली शराब का कारोबार फल-फूल रहा है। सरकार इस पर पर्दा डाल रही है।"

कांग्रेस की मांगें: न्यायिक जांच और नीति में बदलाव

जीतू पटवारी ने इस संकट से निपटने के लिए सरकार से निम्नलिखित मांगें की हैं:

न्यायिक जांच: नकली शराब से हुई सभी मौतों की रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच कराई जाए ताकि दोषियों को सजा मिले और माफिया का पर्दाफाश हो।

शराब नीति में सुधार: शराब की बिक्री पर सख्त नियंत्रण, अवैध भट्टियों पर कार्रवाई, और लाइसेंस प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए।

शराबबंदी क्षेत्रों में सख्ती: धार्मिक स्थलों और शराबबंदी वाले 19 शहरों में शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लागू हो।

शैक्षणिक और धार्मिक स्थलों से दूरी: स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, और मंदिरों के 100 मीटर की परिधि में शराब की दुकानें बंद की जाएं।

महिलाओं की सुरक्षा: शराब की दुकानों के आसपास असामाजिक तत्वों पर नकेल कसी जाए और सीसीटीवी निगरानी बढ़ाई जाए।

जागरूकता अभियान: शराब और ड्रग्स के दुष्प्रभावों के खिलाफ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाए जाएं। पटवारी ने कहा, "हमारी मांग है कि सरकार तुरंत कदम उठाए, वरना कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेगी।"

सरकार का जवाब

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस मुद्दे पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन गृह विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि सरकार नकली शराब के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है। पिछले एक साल में 500 से अधिक अवैध शराब भट्टियां ध्वस्त की गईं और 2000 से अधिक तस्करों को गिरफ्तार किया गया। हालांकि, विपक्ष ने इन दावों को अपर्याप्त बताया और कहा कि बड़े माफिया अभी भी पुलिस की पहुंच से बाहर हैं।

विशेषज्ञों की राय और सुझाव

सामाजिक और कानूनी विशेषज्ञों ने नकली शराब के संकट को एक गंभीर सामाजिक और प्रशासनिक विफलता बताया। भोपाल के वकील अनिल शर्मा ने कहा, "नकली शराब का कारोबार पुलिस और प्रशासन की नाकामी का परिणाम है। इसके लिए एक स्वतंत्र जांच आयोग बनाया जाना चाहिए।" विशेषज्ञों ने निम्नलिखित सुझाव दिए:

  • फोरेंसिक लैब की स्थापना: नकली शराब की पहचान के लिए हर जिले में फोरेंसिक लैब स्थापित की जाए।
  • सख्त लाइसेंसिंग: शराब दुकानों और भट्टियों के लाइसेंस की नियमित जांच हो।
  • पुलिस सुधार: शराब माफिया के साथ पुलिस की सांठगांठ पर नजर रखने के लिए विशेष निगरानी इकाई बनाई जाए।
  • जागरूकता और पुनर्वास: शराब की लत से प्रभावित लोगों के लिए पुनर्वास केंद्र और जागरूकता अभियान शुरू किए जाएं।
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