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MP News: ईडी की बड़ी कार्रवाई: भोपाल और ग्वालियर में 8 ठिकानों पर छापे, सौरभ शर्मा से जुड़ा मामला

MP News: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने आज सुबह भोपाल और ग्वालियर में 8 ठिकानों पर छापे मारे। यह कार्रवाई पूर्व सीनियर सब रजिस्ट्रार केके अरोरा के खिलाफ की गई है।

छापेमारी में ईडी की टीम ने भोपाल के इंद्रपुरी स्थित नवोदय अस्पताल के संचालक डॉ. श्याम अग्रवाल के ठिकानों समेत 4 जगहों पर और ग्वालियर के मुरार स्थित सीपी कॉलोनी में 4 ठिकानों पर कार्रवाई की।

ED s big action raids on 8 locations in Bhopal and Gwalior Saurabh Sharma case

सौरभ शर्मा से जुड़ा मामला

केके अरोरा, जो आरटीओ के पूर्व कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा से जुड़े बताए जा रहे हैं, उनके ठिकानों पर छापेमारी की गई। ईडी की टीम सुबह करीब 5 बजे अरोरा के सभी ठिकानों पर पहुंची और फिलहाल अधिकारी दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं।

विनय हासवानी से कनेक्शन

पूर्व सीनियर सब रजिस्ट्रार अरोरा, भोपाल के प्रमुख कारोबारी विनय हासवानी के बिजनेस पार्टनर भी हैं। एक और बड़ा खुलासा तब हुआ जब विनय हासवानी के मेंडोरी स्थित फार्म हाउस से 54 किलो सोना और 11 करोड़ रुपये नकद से भरी कार मिली थी। यह कार आरटीओ के पूर्व कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा के रिश्तेदारों के पास थी। विनय हासवानी, जो कि सौरभ शर्मा के मौसा के रिश्ते में हैं, इस मामले में महत्वपूर्ण कड़ी बन रहे हैं। इसके अलावा, विनय हासवानी पूर्व डीएसपी मुनीश राजोरिया के दामाद भी हैं, जो मामले को और भी जटिल बना रहा है।

डॉ. श्याम अग्रवाल के ठिकानों पर छापेमारी

भोपाल में ईडी ने डॉ. श्याम अग्रवाल के इंद्रपुरी बी सेक्टर स्थित घर और उनके अस्पतालों पर भी रेड की। इनमें नवोदय कैंसर अस्पताल और एमपी नगर स्थित उनके अन्य अस्पताल शामिल हैं। इस छापेमारी के दौरान ईडी को भारी मात्रा में निवेश से संबंधित दस्तावेज और नकद रकम मिलने का अनुमान है, हालांकि इसकी पुष्टि अभी तक नहीं की गई है।

ईडी की कार्रवाई और आगे की जांच

ईडी की यह छापेमारी एक बड़े वित्तीय घोटाले और धन शोधन मामले से जुड़ी हुई प्रतीत हो रही है। अधिकारियों का कहना है कि इन ठिकानों पर की जा रही जांच के दौरान प्राप्त दस्तावेज और अन्य साक्ष्य मामले की जटिलताओं को उजागर कर सकते हैं। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि इन सभी व्यक्तियों के आपस में क्या संबंध हैं और उनके द्वारा किए गए अनैतिक वित्तीय लेन-देन के पीछे कौन-कौन से बड़े नाम हैं।

सौरभ शर्मा पर चेक पोस्ट पर तैनाती में दलाली के आरोप, करोड़ों का अवैध साम्राज्य

पूर्व आरटीओ कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा पर प्रदेशभर में चेक पोस्ट पर तैनाती के लिए दलाली करने और अवैध तरीके से करोड़ों रुपये की संपत्ति बनाने का गंभीर आरोप है। सौरभ शर्मा, जो मूल रूप से ग्वालियर के रहने वाले हैं, ने महज 12 साल की नौकरी में एक ऐसा साम्राज्य खड़ा किया जो आमतौर पर भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों से जुड़ा हुआ था।

अनुकंपा नियुक्ति से शुरू हुआ सफर

सौरभ शर्मा को अपने पिता की जगह पर अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। इसके बाद, उन्होंने परिवहन विभाग में नौकरी की शुरुआत की और चंद सालों में ही अपनी स्थिति को बहुत मजबूत बना लिया। वह केवल 12 साल में ही अवैध तरीके से भारी संपत्ति अर्जित करने में सफल रहे।

सौरभ की रहन-सहन में अचानक आए बदलाव ने विभाग और जांच एजेंसियों का ध्यान आकर्षित किया। इसके चलते, उसके खिलाफ शिकायतें उठने लगीं, जिसमें आरोप लगाया गया कि उसने विभाग के भीतर दलाली का जाल फैला रखा था। एक समय ऐसा आया जब सौरभ ने अपनी कार्यशैली पर लगने वाले आरोपों से बचने के लिए वीआरएस लेने का फैसला किया।

भूमि और प्रॉपर्टी में निवेश

वीआरएस लेने के बाद सौरभ शर्मा भोपाल के कई बड़े बिल्डरों के साथ प्रॉपर्टी में निवेश करने लगे। उनकी संपत्तियों और निवेशों में तेजी से वृद्धि हुई, जो जांच एजेंसियों के लिए एक बड़ा सवाल बन गया। इसके बाद लोकायुक्त ने उसके ठिकानों पर जांच शुरू की और पाया कि सौरभ ने न केवल अवैध तरीके से संपत्ति जमा की, बल्कि परिवहन विभाग में अपने प्रभाव का उपयोग करते हुए चेक पोस्ट पर तैनाती कराने के लिए दलाली भी की।

आयकर विभाग की कार्रवाई

19 और 20 दिसंबर की रात आयकर विभाग की टीम ने एक और बड़ा खुलासा किया जब मेंडोरी के जंगल में एक इनोवा कार से 54 किलो सोने की सिल्लियां और 11 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए। यह बरामदगी सौरभ शर्मा के अवैध कारोबार की एक और कड़ी को उजागर करती है, जिससे यह साफ हो जाता है कि उसने अपनी छोटी सी नौकरी के दौरान किस तरह से कानून और व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई।

आगे की जांच और संभावित खुलासे

सौरभ शर्मा के खिलाफ जारी जांच ने कई सवाल खड़े किए हैं, खासकर उसके द्वारा किए गए अवैध निवेश, भूमि सौदों और भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर। लोकायुक्त, आयकर विभाग और अन्य जांच एजेंसियां उसकी पूरी संपत्ति और लेन-देन के नेटवर्क को खंगालने में जुटी हुई हैं। इन जांचों से और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं, जिनसे प्रदेश के कई अहम लोग भी जुड़ सकते हैं।

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