अब दिग्विजय सिंह ने शिवराज चौहान पर केस दर्ज कराने के लिए लिखा पत्र, लगाए ये आरोप
भोपाल, 12 अप्रैल: कांग्रेस नेता व पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर भोपाल क्राइम ब्रांच ने धार्मिक उन्माद फैलाने के आरोप में केस दर्ज किया है। दरअसल कांग्रेस ने खरगोन और बड़वानी जिले के सेंधवा में हुई को लेकर एक वीडियो शेयर किया था। जो बाद में फर्जी साबित होने पर उन्होंने इसे डिलीट कर दिया था। जिसके बाद राज्य पुलिस ने इस मामले में दिग्विजय सिंह पर केस दर्ज किया। अब दिग्विजय सिंह ने शिवराज चौहन का एक पुराना ट्वीट शेयर कर उन पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की थी।

मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने राज्य के पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर सीएम शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ "मई 2019 में ट्विटर पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी का मनगढ़ंत वीडियो" डालने के लिए प्राथमिकी दर्ज करने के लिए लिखा है। पत्र में कांग्रेस नेता ने लिखा कि, 2016 में शिवराज सिंह चौहान ने कूटरचित वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर किया था।
दिग्विजय सिंह ने पत्र में लिखा कि, राज्य के चार बार के मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी के मंदसौर के भाषण के वीडियो के साथ छेड़छाड़ की। उन्होंने छत्तीसगढ़ के नेताओं के फेब्रिकेडेट वीडियो बनकार आपराधिक साजिश की है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी का मूल वीडियो के साथ पेन ड्राइव में संलग्न कर प्रेषित कर रहा हूं। इसके साथ दिग्विजय सिंह ने शिवराज चौहान के उस ट्वीट का लिंक भी शेयर किया है। जिस शिवराज सिंह ने चौहान नेअपने अकाउंट से शेयर किया था।
पत्र में कांग्रेस नेता ने कहा कि मेरा इस पत्र के माध्यम से अनुरोध है कि, सोशल मीडिया पर फेब्रिकेटेड वीडियो और असत्य टिप्पणी पोस्ट करने के मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विरुद्ध आईटी एक्ट के तहक साइबर क्राइम और आईपीसी की सुसंगत धाराओं में अपराध पंजीबद्ध करने के निर्देश देने का कष्ट करें। इससे पहले भोपाल क्राइम ब्रांच ने चित्तौड़ कांप्लेक्स निवासी प्रकाश मांडे की तहरीर पर दिग्विज सिंह मुकदमा दर्ज किया।
कांग्रेस नेता के खिलाफ क्राइम ब्रांच ने धारा 153(ए)( किसी धर्म या संप्रदाय के खिलाफ धार्मिक भावनाओं से लोगों के बीच में शांति या बाधा उत्पन्ना होती है।), धारा 295(ए)(धार्मिक भावनाओं को आहत करना।), धारा 465 (कूटरचना करना।) धारा 505 (2) (गैर जमानती, संज्ञेय व दो समुदायों के बीच शत्रुता, घृणा की भावना पैदा करने का आशय के तहत असत्य कथन कहना। इसमें तीन साल तक का कारावास का प्रविधान है।) के तहत मामला दर्ज किया है।












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