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दमोह के घटेरा में 'मालगाड़ी' के नीचे से होकर जाता है 'स्कूल' का रास्ता!

दमोह के जबेरा ​के निकट घटेरा रेलवे स्टेशन सरकारी स्कूल के बच्चों के लिए आने-जाने का आम रास्ता बन गया है। यदि ट्रैक पर मालगाड़ी खड़ी हो तो छोटे-छोटे बच्चे-बच्चियां ट्रेन के नीचे से जान जोखिम में डालकर निकलकर स्कूल पहुंचते

Damoh ट्रेन के नीचे से निकलकर जाता है स्कूल का रास्ता


Damoh जिले के घटेरा स्टेशन से स्कूल जाते समय स्कूली बच्चों का दृश्य उस समय बड़ा असहज दिखाई देता है जब वे कंधे पर स्कूल बैग टांगकर रेलवे ट्रैक को पार कर रहे होते हैं। यह मामला जनपद शिक्षा केंद्र जबेरा के हाई स्कूल घटेरा में पहुंचने वाले चार गांव के छात्र- छात्राओं का है, जो प्रतिदिन अपनी जान जोखिम में डालकर मजबूरी में रेलवे स्टेशन की रेलवे की पटरी पार कर पढ़ने स्कूल पहुंचते हैं। जरा सी लापरवाही इनके लिए हादसे का कारण बन सकती है। कारण ट्रैक पर जब मालगाड़ी खड़ी होती हैं, तो छोटे-छोटे बच्चे ट्रेन के नीचे से निकलते हैं।
ट्रेन के नीचे से निकलकर जाता है स्कूल का रास्ता

घटेरा गांव की हाई स्कूल में रेलवे लाइन के उस पार बसे घटेरा ग्राम के आदिवासी मोहल्ला गड़िया एवं चंद्रपुरा गांव सहित ब्यारमा नदी इस पार जनपद पंचायत दमोह अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत मुहली एवम मड़िया गांव के करीब के दो दर्जन से अधिक संख्या में छात्र-छात्राओ को पढ़ाई के लिए घटेरा जाना पड़ता है। यह वह बच्चे है जो कक्षा पांचवी या आठवीं तक पढ़ाई कर रहे है।। रेलवे स्टेशन घटेरा में फुटओवर ब्रिज नहीं है। इधर अंडर ब्रिज में हमेशा कीचड़, गंदगी और पानी भरा रहताा है, जिस कारण बच्चों सहित गांव वाले रेलवे पटरी पार कर ही एक तरफ से दूसरी तरफ आते-जाते हैं। बच्चों को उस वक्त और परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जब रेलवे ट्रैक पर माल गाड़ियां खड़ी हो जाती हैं तो छात्र-छात्राओं को मालगाड़ी के नीचे से निकलना पड़ता है। इस दौरान कई दफा बच्चे चोटिल भी हो जाते हैंं। यदि जरा सी लापरवाही हो जाए तो बड़ा हादसा हो सकता है।

शिक्षकों ने पटरी पार करने का प्रशिक्षण भी दिया है
अपने स्कूल के बच्चों की रेलवे पटरी पार करने की मजबूरी को देखते हुए स्कूल के शिक्षकों ने छात्र-छात्राओं को अलग से रेलवे ट्रैक पार करने का प्रशिक्षण दिया गया है। इसमें बताया गया है कि अप और डाउन रूट के सिग्नल देखकर ही रेल ट्रैक पार करना है। वही ग्राम चंदपुरा के छात्र प्रकाश और अभिषेक ने बताया कि रेल पटरी को पार करते समय काफी डर लगता है, लेकिन रेल पटरी पार करना छात्र-छात्राओं का शौक नही मजबूरी है।

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    सिग्नल देखकर ट्रैक पार करना है
    रेलवे लाइन के उस पार बसे घटेरा ग्राम के आदिवासी मोहल्ला एवं ग्राम चंद्रपुरा, गढ़िया, मुहली, मड़िया गांव के बहुत से छात्र छात्राएं हाई स्कूल घटेरा पढ़ने आते हैं, उन्हें समय-समय पर रेलवे ट्रैक को किस तरह सावधानी पूर्वक सिग्नल देखकर पार करना है इस संबंध में बच्चो को दिशा निर्देश दिए जाते हैं। जिससे वह सुरक्षित रेलवे ट्रैक पार कर स्कूल आ सके।
    - सुरेंद्र जैन, प्रभारी प्राचार्य, हाई स्कूल घटेरा, दमोह

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